#चैनपुर #गुमशुदगी #पुलिस_सूझबूझ : भाषा की समझ और तकनीक से टला बड़ा हादसा
चैनपुर थाना क्षेत्र के कतारी कोना में ‘बच्चा चोर’ के शक में पकड़े गए एक युवक को पुलिस की सूझबूझ ने भीड़ के गुस्से से बचाया और आठ महीने से बिछड़े परिवार से मिलवा दिया। भाषा की समझ, त्वरित कार्रवाई और तकनीक के उपयोग से एक संभावित बड़ी घटना टल गई।
- कतारी कोना में ग्रामीणों ने ‘बच्चा चोर’ के शक में युवक को पकड़ा
- पुलिस ने भीड़ को शांत कर युवक को सुरक्षित थाने पहुंचाया
- बंगाली भाषा में बातचीत से खुला पहचान का राज
- व्हाट्सएप व वीडियो कॉल से हुई परिजनों से पुष्टि
- 8 महीने बाद परिवार से हुआ भावुक मिलन
भीड़ का शक, पुलिस की पड़ताल
27 फरवरी 2026 को चैनपुर थाना क्षेत्र के कतारी कोना में ग्रामीणों ने एक युवक को ‘बच्चा चोर’ होने के संदेह में पकड़ लिया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभालते हुए युवक को सुरक्षित थाने ले आई।
युवक गंदे व फटे कपड़ों में था और मानसिक रूप से अस्वस्थ प्रतीत हो रहा था। वह स्थानीय भाषा या हिंदी नहीं समझ पा रहा था, जिससे ग्रामीणों का संदेह और गहरा गया।
थाने में एसआई राजेंद्र मंडल ने उससे बंगाली भाषा में बातचीत की। बातचीत के बाद युवक सहज हुआ और अपनी पहचान बताई।
सोशल मीडिया से जुड़ी कड़ी
युवक ने अपना नाम राजू हंसदा उर्फ मानस हंसदा (25 वर्ष) बताया। उसने बताया कि वह पश्चिम बंगाल के पश्चिम मिदनापुर जिले के दातन थाना अंतर्गत बासबोनी गांव का निवासी है और साइकिल से घर से निकलकर भटकते हुए यहां पहुंच गया।
चैनपुर पुलिस ने तत्काल दातन थाना से संपर्क किया। व्हाट्सएप के माध्यम से फोटो भेजी गई और वीडियो कॉल के जरिए परिजनों ने उसकी पहचान की पुष्टि की। परिजनों ने बताया कि वह 26 फरवरी 2025 से लापता था और गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
8 महीने का इंतजार खत्म
शनिवार सुबह युवक के पिता खुदीराम हंसदा अन्य परिजनों के साथ चैनपुर थाना पहुंचे। आठ महीने बाद बेटे को सुरक्षित पाकर परिजनों की आंखें नम हो गईं।
पुलिस ने युवक को नहलाकर नए कपड़े दिए, भोजन कराया और विधिवत परिजनों को सौंप दिया। एसआई राजेंद्र मंडल ने कहा कि कोलकाता में पढ़ाई के दौरान सीखी गई बंगाली भाषा आज किसी का घर बसाने के काम आ गई। गलतफहमी के कारण जिसे लोग अपराधी समझ रहे थे, वह एक लाचार गुमशुदा बेटा निकला।
जनता से अपील
चैनपुर पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति को देखकर अफवाह के आधार पर ‘बच्चा चोर’ न समझें। कानून अपने हाथ में न लें और मारपीट जैसी घटनाओं से बचें। किसी भी संदेह की स्थिति में तुरंत पुलिस को सूचना दें।
न्यूज़ देखो विश्लेषण
यह घटना बताती है कि अफवाह कितनी खतरनाक हो सकती है और पुलिस की सूझबूझ कितनी जरूरी। यदि समय पर हस्तक्षेप न होता, तो एक निर्दोष युवक भीड़ का शिकार बन सकता था। सतर्कता के साथ संवेदनशीलता भी उतनी ही आवश्यक है।
👉 अफवाह से बचें, सत्य की पुष्टि करें और कानून पर भरोसा रखें।