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मंझिआंव: टड़हे गांव में चल रही अवैध आरामिल मशीनें, वन विभाग की चुप्पी बनी सवाल

#विशुनपुरा #अवैध_आरामिल — भवनाथपुर वन क्षेत्र में चल रही तीन अवैध आरामिल मशीनें, हरे जंगलों की कटाई से पर्यावरण पर संकट
  • मंझिआंव के टड़हे गांव में चल रही हैं तीन अवैध आरामिल मशीनें
  • इमारती लकड़ियों की कटाई-चिराई से जंगलों का हो रहा दोहन
  • वन विभाग की निष्क्रियता से अवैध कारोबार फल-फूल रहा
  • सैकड़ों लकड़ियों का जखीरा आरामिल मशीनों के पास मिला
  • रेंजर ने मोबाइल पर दी प्रतिक्रिया: जानकारी नहीं थी, कार्रवाई होगी

टड़हे में खुलेआम चल रहा लकड़ी चीरने का अवैध धंधा

गढ़वा जिले के मंझिआंव प्रखंड अंतर्गत भवनाथपुर वन क्षेत्र के ग्राम टड़हे में तीन अलग-अलग स्थानों पर अवैध आरामिल मशीनें बिना अनुमति के संचालित की जा रही हैं। इन मशीनों से इमारती लकड़ियों की कटाई व चिराई का कार्य दिन-रात धड़ल्ले से किया जा रहा है, जिससे जंगलों का तेजी से दोहन हो रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, आसपास के क्षेत्रों से हरे-भरे वृक्षों को काटकर इन मशीनों तक पहुंचाया जाता है।

पर्यावरणीय नुकसान और वन अधिनियम का खुला उल्लंघन

इन अवैध मशीनों के कारण पर्यावरणीय संतुलन पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, तीनों आरामिल मशीनों के पास सैकड़ों मोटी-मोटी लकड़ियों के ढेर पाए गए, जिनमें कई चीरकर वहीं छोड़ दिए गए थे। यह वन अधिनियम 1980 और पर्यावरण संरक्षण कानूनों का सीधा उल्लंघन है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि वन विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

वन विभाग की चुप्पी और निष्क्रियता ने बढ़ाई चिंता

स्थानीय लोगों का कहना है कि वन विभाग की चुप्पी और मौन स्वीकृति से यह अवैध व्यापार फल-फूल रहा है। जिन अधिकारियों को इन गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए, वे या तो जानबूझ कर अनदेखी कर रहे हैं या अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं। यह प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्ट तंत्र की ओर भी इशारा करता है।

रेंजर ने दी प्रतिक्रिया, कहा- जानकारी नहीं थी

इस विषय में भवनाथपुर वन क्षेत्र के रेंजर प्रमोद कुमार से मोबाइल पर संपर्क किया गया, जिस पर उन्होंने कहा:

रेंजर प्रमोद कुमार ने बताया: “मुझे इसकी जानकारी नहीं थी। अगर ऐसा है तो निश्चित रूप से वन अधिनियम के तहत संवैधानिक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इससे पूर्व में भी कार्रवाई की गई है।”

उनकी यह प्रतिक्रिया वन विभाग की निगरानी प्रणाली की कमजोरी को भी उजागर करती है, क्योंकि क्षेत्र में तीन-तीन अवैध आरामिल मशीनें चल रही हैं और विभाग को जानकारी तक नहीं है।

न्यूज़ देखो: जंगलों की लूट पर वन विभाग की नींद

न्यूज़ देखो सवाल करता है कि क्या अब जंगल भी अवैध धंधेबाजों के हवाले कर दिए गए हैं?
भवनाथपुर वन क्षेत्र में टड़हे गांव के जंगलों की बेरहमी से हो रही कटाई, न सिर्फ कानून की धज्जियां उड़ाती है, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी बड़ा खतरा है।
वन विभाग की निष्क्रियता और उदासीन रवैया, इस आपराधिक गतिविधि को संरक्षण देने जैसा प्रतीत होता है।
अब समय आ गया है कि जिम्मेदार अधिकारी सख्त कार्रवाई कर इस अवैध नेटवर्क को जड़ से समाप्त करें, वरना जंगलों की हरियाली सिर्फ किताबों में रह जाएगी।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

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जंगल बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है

प्रकृति से प्राप्त संसाधनों का संरक्षण केवल सरकार का नहीं, समाज का भी कर्तव्य है।
यदि आपके आसपास इस तरह की कोई अवैध गतिविधि हो रही है, तो आवाज़ उठाइए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को हरियाली और स्वच्छ पर्यावरण मिल सके।
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