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मेदिनीनगर में नैतिक राजनीति की मिसाल बने मनोज सिंह, डिप्टी मेयर पद की दावेदारी की स्पष्ट घोषणा

#मेदिनीनगर #नगरनिकायचुनाव : आरक्षण के बीच सिद्धांतों पर अडिग रहकर पूर्व उपाध्यक्ष ने रखा नैतिक राजनीतिक दृष्टिकोण।

मेदिनीनगर नगर निगम चुनाव 2026 से पहले राजनीतिक चर्चाओं के बीच पूर्व नगर उपाध्यक्ष मनोज सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना रुख स्पष्ट किया है। आरक्षण व्यवस्था के कारण मेयर पद से पीछे हटते हुए उन्होंने डिप्टी मेयर पद के लिए दावेदारी प्रस्तुत की। उन्होंने परिवार को राजनीति में आगे कर ‘डमी उम्मीदवार’ उतारने से इनकार करते हुए नैतिक राजनीति की बात कही। यह कदम नगर निगम की राजनीति में एक अलग और सिद्धांत आधारित संदेश देता है।

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  • पूर्व नगर उपाध्यक्ष मनोज सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रखी अपनी राजनीतिक स्थिति।
  • आरक्षण व्यवस्था के कारण मेयर पद से हटने का लिया निर्णय।
  • डिप्टी मेयर पद के लिए अप्रत्यक्ष चुनाव में दावेदारी की घोषणा।
  • वार्ड संख्या 21 या 23 से पार्षद चुनाव लड़ने की संभावना।
  • परिवार की महिला को डमी उम्मीदवार बनाने से किया स्पष्ट इनकार।
  • प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई वरिष्ठ समर्थक और गणमान्य लोग उपस्थित

मेदिनीनगर नगर निगम चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होती जा रही हैं। इसी क्रम में नगर पालिका के पूर्व उपाध्यक्ष मनोज सिंह ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर न केवल अपनी भावी राजनीतिक रणनीति स्पष्ट की, बल्कि नैतिकता और सिद्धांतों पर आधारित राजनीति का संदेश भी दिया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब नगर निगम चुनाव में आरक्षण व्यवस्था को लेकर कई राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।

मनोज सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिक इच्छा मेयर पद पर चुनाव लड़ने की थी, लेकिन आरक्षण की नई स्थिति के कारण परिस्थितियां बदलीं। इसके बावजूद उन्होंने किसी भी प्रकार के राजनीतिक शॉर्टकट को अपनाने से इनकार किया और अपने सिद्धांतों पर अडिग रहने का निर्णय लिया।

आरक्षण के बाद बदली राजनीतिक परिस्थिति

प्रेस वार्ता में मनोज सिंह ने कहा कि नगर निगम चुनाव में मेयर पद के लिए आरक्षण लागू होने के बाद उनके सामने सीमित विकल्प थे। उन्होंने स्वीकार किया कि यदि वे चाहते, तो कई नेताओं की तरह अपनी पत्नी या परिवार की किसी महिला सदस्य को उम्मीदवार बनाकर अप्रत्यक्ष रूप से सत्ता में पहुंचने का प्रयास कर सकते थे।

लेकिन उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यह रास्ता उन्हें स्वीकार नहीं है। उनके अनुसार, जनता पर किसी तरह का थोपा गया निर्णय लोकतंत्र की भावना के विपरीत है।

मनोज सिंह ने कहा: “मैं केवल चुनाव जीतने के लिए अपनी पत्नी या परिवार की किसी महिला सदस्य को डमी कैंडिडेट बनाकर जनता पर निर्णय थोपना नहीं चाहता। राजनीति मेरे लिए सेवा और सिद्धांत का माध्यम है।”

डिप्टी मेयर पद के लिए अप्रत्यक्ष चुनाव में दावेदारी

मनोज सिंह ने बताया कि इस बार डिप्टी मेयर का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली के तहत होगा, जिसमें निर्वाचित पार्षद अपने मत के माध्यम से डिप्टी मेयर का चयन करेंगे। जनभावनाओं का सम्मान करते हुए उन्होंने इस पद के लिए अपनी दावेदारी प्रस्तुत की है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि डिप्टी मेयर बनने की प्रक्रिया में पहला कदम पार्षद बनना है। इसी उद्देश्य से वे आगामी नगर निगम चुनाव में वार्ड संख्या 21 या वार्ड संख्या 23 से पार्षद पद का चुनाव लड़ेंगे। पार्षद चुने जाने के बाद वे डिप्टी मेयर पद के लिए आगे बढ़ेंगे।

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जनता के विश्वास को बताया सबसे बड़ी ताकत

पूर्व उपाध्यक्ष ने कहा कि बीते वर्षों में मेदिनीनगर की जनता से उन्हें जो स्नेह, समर्थन और विश्वास मिला है, वही उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी है। उन्होंने कहा कि वे हमेशा जनता के प्रति जवाबदेह रहे हैं और आगे भी रहेंगे।

उनका मानना है कि नगर निगम की राजनीति केवल पद और सत्ता तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य शहर के समग्र विकास और नागरिकों की समस्याओं का समाधान होना चाहिए।

नगर निगम की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने का संकल्प

मनोज सिंह ने अपने वक्तव्य में नगर निगम की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनोन्मुखी बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें डिप्टी मेयर पद की जिम्मेदारी मिलती है, तो वे पार्षदों के साथ समन्वय बनाकर नगर निगम को एक मजबूत और जवाबदेह संस्था के रूप में विकसित करने का प्रयास करेंगे।

उन्होंने कहा कि शहर की बुनियादी समस्याएं—जैसे स्वच्छता, पेयजल, सड़क, प्रकाश व्यवस्था और नागरिक सुविधाएं—उनकी प्राथमिकता में रहेंगी। साथ ही, पारदर्शिता और जवाबदेही को हर स्तर पर सुनिश्चित किया जाएगा।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मनोज सिंह के साथ बड़ी संख्या में उनके समर्थक और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से मिथिलेश सिंह, पंकज सिंह, राजू खान, रामलाल सोनी, नवीन तिवारी, बीरबहादुर सिंह, राकेश सिंह, डब्लू खान, राजू सोनी, सोनु सिंह, उत्तम सिंह, मुकेश सिंह, प्रवीन तिवारी, गोपाल मिश्रा, अभय कुमार सहित अन्य लोग शामिल थे।

सभी उपस्थित लोगों ने मनोज सिंह के इस फैसले की सराहना करते हुए इसे मेदिनीनगर की राजनीति में एक सकारात्मक और नैतिक पहल बताया।

न्यूज़ देखो: नैतिक राजनीति का मजबूत संदेश

मनोज सिंह का यह रुख उस राजनीति से अलग नजर आता है, जहां सत्ता के लिए हर रास्ता अपनाया जाता है। आरक्षण के बावजूद सिद्धांतों से समझौता न करना नगर निगम की राजनीति में एक मिसाल है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता और पार्षद इस नैतिक राजनीति को कितना समर्थन देते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सिद्धांतों की राजनीति से ही मजबूत होगा शहर

लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने का नाम नहीं, बल्कि सही निर्णय लेने की जिम्मेदारी भी है। जब नेता सिद्धांतों को प्राथमिकता देते हैं, तभी शहर और समाज मजबूत बनते हैं। इस खबर पर अपनी राय जरूर साझा करें, लेख को आगे बढ़ाएं और जिम्मेदार राजनीति के इस संदेश को अधिक लोगों तक पहुंचाएं।

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