Giridih

बगोदर बस स्टैंड पर शहीद शेख भिखारी और टिकैत उमरांव सिंह का शहादत दिवस श्रद्धा से मनाया गया

#गिरिडीह #शहादत_दिवस : 1857 की क्रांति के वीर सपूतों को नागरिकों और कार्यकर्ताओं ने नमन किया।

गिरिडीह जिले के बगोदर बस स्टैंड में 8 जनवरी 2026 को 1857 की क्रांति के महान स्वतंत्रता सेनानी शहीद शेख भिखारी और टिकैत उमरांव सिंह का शहादत दिवस श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। जेएलकेएम पार्टी के आयोजन में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक और कार्यकर्ता शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान दोनों वीरों के बलिदान और ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ उनके संघर्ष को याद किया गया। आयोजन ने नई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास से जोड़ने का संदेश दिया।

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  • 8 जनवरी 2026 को बगोदर बस स्टैंड, गिरिडीह में आयोजन।
  • शहीद शेख भिखारी और टिकैत उमरांव सिंह को दी गई श्रद्धांजलि।
  • कार्यक्रम का आयोजन जेएलकेएम पार्टी द्वारा किया गया।
  • बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, पदाधिकारी और कार्यकर्ता हुए शामिल।
  • शहीदों के 1857 की क्रांति में योगदान को किया गया स्मरण।

गिरिडीह जिले के बगोदर में आयोजित यह कार्यक्रम न सिर्फ श्रद्धांजलि सभा था, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को याद करने और उससे प्रेरणा लेने का अवसर भी बना। बगोदर बस स्टैंड पर जैसे ही शहीद शेख भिखारी और टिकैत उमरांव सिंह के चित्र स्थापित किए गए, वातावरण देशभक्ति के भाव से भर गया। उपस्थित लोगों ने पुष्प अर्पित कर दोनों महान वीरों को नमन किया और उनके बलिदान को याद किया।

1857 की क्रांति और झारखंड के वीर सपूत

वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि 1857 की क्रांति केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि भारतीय जनमानस में स्वतंत्रता की पहली बड़ी चिंगारी थी। इस क्रांति में झारखंड के वीर सपूतों का योगदान अमिट है। शहीद शेख भिखारी और टिकैत उमरांव सिंह ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करते हुए न सिर्फ विद्रोह का नेतृत्व किया, बल्कि अपने प्राणों की आहुति देकर आने वाली पीढ़ियों के लिए आज़ादी का मार्ग प्रशस्त किया।

शहीदों को पुष्प अर्पित कर दी गई श्रद्धांजलि

कार्यक्रम के दौरान जेएलकेएम पार्टी के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने एक-एक कर शहीदों के चित्र पर पुष्प अर्पित किए। इस दौरान दो मिनट का मौन रखकर शहीदों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना भी की गई। कार्यक्रम स्थल पर मौजूद बुजुर्गों ने स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े प्रसंग साझा किए, जिससे युवाओं को इतिहास को करीब से जानने का अवसर मिला।

वक्ताओं ने क्या कहा

वक्ताओं ने कहा कि शहीद शेख भिखारी और टिकैत उमरांव सिंह जैसे वीरों का बलिदान हमें यह सिखाता है कि स्वतंत्रता, एकता और न्याय के लिए संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाता। उन्होंने कहा कि आज जब देश आज़ाद है, तब हमारी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि हम संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की रक्षा करें।

जेएलकेएम पार्टी के एक वक्ता ने कहा:
“शहीदों का बलिदान केवल इतिहास के पन्नों में दर्ज करने के लिए नहीं है, बल्कि उसे अपने आचरण और विचारों में उतारने की आवश्यकता है। शेख भिखारी और टिकैत उमरांव सिंह का संघर्ष हमें अन्याय के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देता है।”

युवाओं को जोड़ने का प्रयास

कार्यक्रम में युवाओं की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। आयोजकों ने कहा कि इस तरह के आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपने इतिहास से जोड़ना है, ताकि वे यह समझ सकें कि आज जो स्वतंत्रता उन्हें मिली है, वह कितने बलिदानों के बाद संभव हो सकी। युवाओं से अपील की गई कि वे शहीदों के विचारों को आत्मसात करें और समाज व देश के लिए सकारात्मक भूमिका निभाएं।

सामाजिक एकता और न्याय का संदेश

कार्यक्रम के दौरान यह भी कहा गया कि 1857 की क्रांति केवल अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई नहीं थी, बल्कि सामाजिक एकता और स्वाभिमान की लड़ाई भी थी। शहीद शेख भिखारी और टिकैत उमरांव सिंह ने जाति, वर्ग और क्षेत्र से ऊपर उठकर देश के लिए संघर्ष किया। उनका जीवन आज भी सामाजिक समरसता और न्याय की प्रेरणा देता है।

आयोजन में दिखी एकजुटता

जेएलकेएम पार्टी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में पार्टी के विभिन्न स्तर के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और आम नागरिक एक मंच पर नजर आए। सभी ने एक स्वर में यह संकल्प लिया कि शहीदों के सपनों का भारत बनाने के लिए सामाजिक बुराइयों, अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष किया जाएगा।

न्यूज़ देखो: इतिहास से जुड़ने का सार्थक प्रयास

बगोदर में आयोजित यह शहादत दिवस कार्यक्रम बताता है कि स्थानीय स्तर पर इतिहास और शहीदों को याद करना आज भी प्रासंगिक है। ऐसे आयोजन न केवल श्रद्धांजलि हैं, बल्कि सामाजिक चेतना को मजबूत करने का माध्यम भी हैं। सवाल यह है कि क्या हम शहीदों के आदर्शों को अपने दैनिक जीवन में उतार पा रहे हैं। इस दिशा में निरंतर प्रयास जरूरी है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

शहीदों के सपनों को साकार करने का संकल्प लें

आजादी केवल उत्सव नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है। शहीदों का सम्मान तभी सार्थक होगा जब हम अन्याय के खिलाफ खड़े होंगे और समाज में सकारात्मक बदलाव लाएंगे।
अपने आसपास के युवाओं और बच्चों को स्वतंत्रता संग्राम की कहानियां बताइए।
इस खबर पर अपनी राय साझा करें, इसे आगे बढ़ाएं और शहीदों की विरासत को जीवित रखने में अपनी भूमिका निभाएं।

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Surendra Verma

डुमरी, गिरिडीह

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