दरूवा में जन्माष्टमी पर्व की तैयारियों को लेकर बैठक, भव्य आयोजन का संकल्प

दरूवा में जन्माष्टमी पर्व की तैयारियों को लेकर बैठक, भव्य आयोजन का संकल्प

author Tirthraj Dubey
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#दरूवा #जन्माष्टमी : ग्रामीणों ने मिलकर भक्ति और अनुशासन के साथ पर्व मनाने की ठानी
  • तीसीबार पंचायत के दरूवा में हुई बैठक।
  • अध्यक्षता तीर्थ राज दुबे ने की।
  • सांस्कृतिक कार्यक्रमों को भव्य बनाने पर चर्चा।
  • सुरक्षा, सजावट, भजन-कीर्तन पर हुई योजना।
  • सभी ने सहयोग और अनुशासन का लिया संकल्प।

पलामू जिले के पाण्डु प्रखण्ड अंतर्गत तीसीबार पंचायत के दरूवा गांव में बुधवार को जन्माष्टमी पर्व की तैयारियों को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता तीर्थ राज दुबे (T R Dubey) ने की, जिसमें सचिव राहुल और पंचायत के कई सक्रिय सदस्य उपस्थित रहे।

भव्य और अनुशासित आयोजन की योजना

बैठक में यह तय किया गया कि इस वर्ष जन्माष्टमी पर्व को पहले से अधिक भव्य और सुव्यवस्थित तरीके से मनाया जाएगा। पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रसाद वितरण के लिए अलग-अलग टीम बनाई जाएंगी, ताकि प्रत्येक कार्य समय पर और सुचारू रूप से सम्पन्न हो सके।

अध्यक्ष की अपील

बैठक को संबोधित करते हुए अध्यक्ष तीर्थ राज दुबे ने कहा कि जन्माष्टमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि पूरे गांव की आस्था और एकता का प्रतीक है।

तीर्थ राज दुबे ने कहा: “हम सभी को अपने स्तर से योगदान देना चाहिए, ताकि यह आयोजन गांव की शान बन सके।”

सुरक्षा और सजावट पर जोर

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि आयोजन स्थल की सजावट आकर्षक और पारंपरिक शैली में की जाएगी। सुरक्षा व्यवस्था के लिए स्वयंसेवक तैनात होंगे, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। विशेष रूप से रात में होने वाले कार्यक्रमों के लिए प्रकाश व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण की योजना बनाई गई।

ग्रामीणों की सहभागिता

सभी उपस्थित लोगों ने एक स्वर में यह संकल्प लिया कि इस बार जन्माष्टमी पर्व को और भी भव्य, अनुशासित और सामूहिक सहभागिता के साथ मनाया जाएगा। ग्रामीणों का मानना है कि इस तरह के आयोजन गांव में सामाजिक एकजुटता और भक्ति भाव को और प्रबल करते हैं।

न्यूज़ देखो: भक्ति और एकता का संगम

दरूवा गांव में जन्माष्टमी की तैयारियां यह दर्शाती हैं कि जब ग्रामीण अपनी आस्था और सहयोग की भावना से एकजुट होते हैं, तो कोई भी आयोजन यादगार बन सकता है। यह न केवल धार्मिक उल्लास का प्रतीक है बल्कि सामाजिक बंधन को भी मजबूत करता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

मिल-जुलकर रचे भक्ति का उत्सव

त्योहार तभी सफल होते हैं जब उनमें समाज का हर वर्ग समान भागीदारी निभाए। जन्माष्टमी जैसे पावन अवसर पर हमें एक-दूसरे के प्रति सहयोग, प्रेम और सद्भाव का संदेश देना चाहिए। इस खबर को अपने मित्रों और परिवार के साथ साझा करें, ताकि भक्ति और एकता का यह संदेश दूर-दूर तक पहुंचे।

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Written by

पांडु, पलामू

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