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रामगढ़ के धोबनी में पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी से मुलाकात, सामाजिक कुरीतियों पर कार्रवाई की मांग का ज्ञापन सौंपा गया

#रामगढ़धोबनी #सामाजिकचिंता : भाषा संस्कृति बचाव एवं जन विकास मंच ने युवाओं और समाज से जुड़े मुद्दे उठाए।

रामगढ़ जिले के धोबनी में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी को सामाजिक सरोकारों से जुड़ा एक ज्ञापन सौंपा गया। यह ज्ञापन भाषा संस्कृति बचाव एवं जन विकास मंच के जिला कमेटी सदस्य कंचन राय द्वारा दिया गया। इसमें समाज में बढ़ती कुरीतियों, युवाओं के भविष्य और नशे जैसी समस्याओं पर चिंता जताई गई। ज्ञापन के माध्यम से इन मुद्दों को आगामी विधानसभा सत्र में उठाने की मांग की गई।

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  • धोबनी, रामगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी से मुलाकात।
  • ज्ञापन सौंपने वाले कंचन राय, जिला कमेटी सदस्य।
  • सोशल मीडिया पर अश्लील कंटेंट पर नियंत्रण की मांग।
  • सड़क किनारे मादक पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने का आग्रह।
  • मुद्दों को आगामी विधानसभा सत्र में उठाने की अपील।
  • कई समाजसेवी और गणमान्य लोग रहे मौजूद।

रामगढ़ जिले के धोबनी क्षेत्र में बुधवार को एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल देखने को मिली, जब भाषा संस्कृति बचाव एवं जन विकास मंच के प्रतिनिधियों ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी से मुलाकात की। यह मुलाकात केवल औपचारिक शिष्टाचार तक सीमित नहीं रही, बल्कि समाज में तेजी से फैल रही गंभीर समस्याओं को सामने रखने का माध्यम बनी। जिला कमेटी सदस्य कंचन राय के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में खासतौर पर युवाओं के भविष्य और सामाजिक वातावरण पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभावों को रेखांकित किया गया।

मुलाकात का उद्देश्य और पृष्ठभूमि

दिनांक 28 जनवरी 2026 को हुई इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य समाज में व्याप्त उन कुरीतियों की ओर ध्यान आकर्षित करना था, जो आने वाली पीढ़ी के लिए खतरा बनती जा रही हैं। मंच से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि समय रहते इन मुद्दों पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसका सीधा असर सामाजिक ताने-बाने और युवाओं की दिशा पर पड़ेगा। इसी सोच के तहत पूर्व मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर राजनीतिक स्तर पर पहल की मांग की गई।

ज्ञापन में उठाई गई प्रमुख मांगें

ज्ञापन के माध्यम से तीन प्रमुख मुद्दों को विशेष रूप से सामने रखा गया। पहला, सोशल मीडिया पर बढ़ते अश्लील वीडियो और रील्स का मामला, जिसे युवाओं के मानसिक और नैतिक विकास के लिए गंभीर खतरा बताया गया। दूसरा, सड़क किनारे अवैध रूप से बिक रहे मादक पदार्थों की खुलेआम बिक्री, जो नशे की प्रवृत्ति को बढ़ावा दे रही है। तीसरा, इन दोनों ही विषयों को आगामी विधानसभा सत्र में प्रमुखता से उठाने की मांग, ताकि राज्य स्तर पर ठोस नीति और कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।

युवाओं के भविष्य पर चिंता

भाषा संस्कृति बचाव एवं जन विकास मंच का मानना है कि सोशल मीडिया का अनियंत्रित और गलत उपयोग युवाओं को गलत दिशा में ले जा रहा है। अश्लील कंटेंट की सहज उपलब्धता न केवल नैतिक मूल्यों को कमजोर कर रही है, बल्कि सामाजिक अपराधों को भी बढ़ावा दे रही है। इसी तरह नशे के बढ़ते प्रचलन से शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य सभी प्रभावित हो रहे हैं। ज्ञापन में इस बात पर जोर दिया गया कि युवाओं को सुरक्षित और सकारात्मक वातावरण देना समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है।

नशे के खिलाफ सख्त कदम की मांग

सड़क किनारे और सार्वजनिक स्थानों पर मादक पदार्थों की अवैध बिक्री को लेकर भी गहरी चिंता व्यक्त की गई। मंच के सदस्यों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं और युवाओं को अपराध की ओर धकेलती हैं। ज्ञापन में प्रशासन से मांग की गई कि ऐसी दुकानों और विक्रेताओं पर सख्त कार्रवाई हो और नशा मुक्त समाज की दिशा में ठोस अभियान चलाया जाए।

समाजसेवियों की सक्रिय भागीदारी

इस मौके पर समाज की बेहतरी के लिए काम कर रहे कई गणमान्य और समाजसेवी लोग उपस्थित रहे। इनमें जितलाल राय, नागेन्द्र राय, सुनील हेम्ब्रम, कार्तिक राम, दुर्योधन यादव सहित अन्य लोग शामिल थे। सभी ने एक स्वर में सामाजिक सुधार और युवाओं की सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर बल दिया। उनकी मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि यह मुद्दा किसी एक व्यक्ति या संगठन तक सीमित नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक चिंता का विषय है।

राजनीतिक स्तर पर उठाने की अपेक्षा

पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी को सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से यह अपेक्षा जताई गई कि वे अपने राजनीतिक अनुभव और प्रभाव का उपयोग कर इन मुद्दों को विधानसभा के पटल पर लाएंगे। मंच के सदस्यों का मानना है कि जब तक ऐसे विषयों पर नीति निर्माण और सख्त कानून लागू नहीं होंगे, तब तक जमीनी स्तर पर बदलाव संभव नहीं है।

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सामाजिक चेतना की जरूरत

यह मुलाकात इस बात का संकेत है कि समाज के जागरूक लोग अब केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि ठोस कदम और नीतिगत बदलाव की मांग कर रहे हैं। सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाना और उसे जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

न्यूज़ देखो: समाज की आवाज को राजनीतिक मंच तक पहुंचाने की पहल

धोबनी में हुई यह मुलाकात दिखाती है कि सामाजिक मुद्दों को लेकर अब नागरिक स्तर पर भी सक्रियता बढ़ रही है। ज्ञापन के जरिए युवाओं और समाज से जुड़े गंभीर विषयों को सीधे राजनीतिक नेतृत्व के सामने रखा गया। अब देखना होगा कि इन मांगों पर विधानसभा स्तर पर क्या पहल होती है और प्रशासन किस हद तक ठोस कदम उठाता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सुरक्षित समाज, सशक्त भविष्य की ओर कदम

समाज को स्वच्छ और सुरक्षित बनाना केवल सरकार की नहीं, हम सभी की जिम्मेदारी है। जब नागरिक जागरूक होकर अपनी बात रखते हैं, तभी बदलाव की नींव पड़ती है।
अब समय है कि हम भी ऐसे मुद्दों पर सोचें और सकारात्मक पहल का हिस्सा बनें।
इस खबर पर अपनी राय साझा करें, इसे दूसरों तक पहुंचाएं और सामाजिक जागरूकता की इस मुहिम को आगे बढ़ाएं।

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Saroj Verma

दुमका/देवघर
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