
#गिरिडीह #सड़क_दुर्घटना : रोजगार के लिए बाहर गए युवक की असमय मौत से परिवार टूटा।
गिरिडीह जिले के डुमरी थाना क्षेत्र के तेलखारा गांव के एक प्रवासी मजदूर की सिलीगुड़ी में सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। मृतक की पहचान 24 वर्षीय विनय कुमार के रूप में हुई है, जो रोज़गार के सिलसिले में सिलीगुड़ी में रहकर काम कर रहा था। दुर्घटना में उसकी मौके पर ही मौत हो गई, जिसकी सूचना मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। इस घटना से पूरे गांव में शोक का माहौल है और प्रशासन से पीड़ित परिवार को सहायता देने की मांग उठ रही है।
- तेलखारा गांव, डुमरी निवासी प्रवासी मजदूर विनय कुमार की मौत।
- सिलीगुड़ी में सड़क दुर्घटना में मौके पर ही गई जान।
- मृतक की उम्र 24 वर्ष, पिता सीताराम महतो।
- इकलौते बेटे की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल।
- ग्रामीणों ने प्रशासन से सहायता की मांग उठाई।
गिरिडीह जिले के डुमरी प्रखंड अंतर्गत तेलखारा गांव में उस समय मातम पसर गया, जब गांव के एक युवा प्रवासी मजदूर की सड़क दुर्घटना में मौत की खबर पहुंची। मृतक विनय कुमार रोज़गार की तलाश में सिलीगुड़ी गया था, जहां वह मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का सहारा बना हुआ था। अचानक हुई इस दुर्घटना ने न केवल एक युवक की जान ले ली, बल्कि एक पूरे परिवार की उम्मीदों को भी तोड़ दिया।
सिलीगुड़ी में हुआ दर्दनाक हादसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विनय कुमार सिलीगुड़ी में रहकर काम कर रहा था। इसी दौरान किसी सड़क दुर्घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के सटीक कारणों की जानकारी अभी सामने नहीं आई है, लेकिन घटना इतनी भयावह थी कि युवक को बचाया नहीं जा सका। स्थानीय स्तर पर घटना की सूचना संबंधित थाना और परिजनों को दी गई।
दुर्घटना के बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए सूचना गांव तक पहुंचाई गई। जैसे ही यह खबर तेलखारा गांव पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। ग्रामीण एक-दूसरे से घटना की पुष्टि करते नजर आए और देखते ही देखते मृतक के घर लोगों की भीड़ जुटने लगी।
इकलौते बेटे की मौत से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
मृतक विनय कुमार, अपने पिता सीताराम महतो का इकलौता पुत्र था। बेटे की असमय मौत ने माता-पिता को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और घर में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। जिस बेटे को परिवार का सहारा और भविष्य की उम्मीद माना जा रहा था, उसकी अचानक हुई मौत ने सबकुछ बदल दिया।
ग्रामीणों के अनुसार, विनय मेहनती और शांत स्वभाव का युवक था। परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए वह बाहर काम करने गया था। उसकी कमाई से घर का खर्च चलता था और माता-पिता को उम्मीद थी कि बेटा आगे चलकर परिवार की स्थिति मजबूत करेगा।
गांव में पसरा शोक, हर आंख नम
तेलखारा गांव में शायद ही कोई ऐसा घर हो जहां इस घटना की चर्चा न हो। युवा उम्र में हुई इस मौत ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है। ग्रामीणों ने बताया कि विनय की मौत सिर्फ एक परिवार का नुकसान नहीं, बल्कि पूरे गांव की क्षति है। लोग परिजनों को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं, लेकिन इस गहरे दुख के सामने सांत्वना के शब्द भी कम पड़ते नजर आ रहे हैं।
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर ऐसी घटनाएं बार-बार चिंता बढ़ा रही हैं। रोज़गार की मजबूरी में बाहर जाने वाले युवाओं के सामने कई तरह के खतरे होते हैं, जिनसे निपटने के लिए ठोस व्यवस्था की जरूरत है।
प्रवासी मजदूरों की असुरक्षा पर फिर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। बेहतर रोज़गार की तलाश में राज्य से बाहर जाने वाले हजारों युवक दुर्घटनाओं और असुरक्षित परिस्थितियों का शिकार हो रहे हैं। ऐसे मामलों में परिवारों को न केवल भावनात्मक, बल्कि आर्थिक संकट का भी सामना करना पड़ता है।
विनय कुमार की मौत के बाद उसके माता-पिता के सामने जीवनयापन की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार और प्रशासन को ऐसे परिवारों के लिए त्वरित सहायता और पुनर्वास की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि वे इस कठिन समय में अकेले न पड़ जाएं।
प्रशासन से सहायता की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों ने एकजुट होकर प्रशासन से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की है। लोगों का कहना है कि मृतक परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था, और उसकी मौत के बाद परिवार पूरी तरह असहाय हो गया है। ऐसे में सरकारी सहायता ही उनके लिए सहारा बन सकती है।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को इस तरह का दुख न झेलना पड़े।
न्यूज़ देखो: प्रवासी मजदूरों की पीड़ा और सिस्टम की जिम्मेदारी
डुमरी के प्रवासी मजदूर विनय कुमार की मौत केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रवासी श्रमिकों की असुरक्षा की कड़वी सच्चाई को उजागर करती है। रोजगार की तलाश में बाहर जाने वाले युवाओं के लिए न तो पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था है और न ही संकट के समय उनके परिवारों के लिए त्वरित राहत की ठोस प्रणाली। इस घटना के बाद प्रशासन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है कि वह पीड़ित परिवार को तत्काल सहायता प्रदान करे और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए। सवाल यह भी है कि क्या प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर अब कोई ठोस नीति बनेगी।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
एक हादसा, कई सवाल और अधूरी जिम्मेदारियां
एक युवा की असमय मौत ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर रोज़गार के लिए घर छोड़ने वाले मजदूर कितने सुरक्षित हैं। विनय कुमार जैसे हजारों युवक अपने सपनों और परिवार की जिम्मेदारियों के साथ बाहर निकलते हैं, लेकिन कई बार वे लौटकर नहीं आ पाते।
यह समय केवल शोक व्यक्त करने का नहीं, बल्कि जिम्मेदारी तय करने और समाधान खोजने का भी है। आप इस घटना को कैसे देखते हैं? क्या प्रवासी मजदूरों के लिए सुरक्षा और सहायता की व्यवस्था पर्याप्त है? अपनी राय कमेंट में साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और ऐसी आवाज़ों को मजबूती दें, ताकि किसी और परिवार को इस तरह का दर्द न सहना पड़े।



