
#जमशेदपुर #पुलिस_कार्रवाई : कोवाली थाना क्षेत्र से चोरी हुए शिशु को त्वरित कार्रवाई में सुरक्षित बरामद किया गया।
जमशेदपुर के कोवाली थाना क्षेत्र में 4 महीने के एक मासूम के अपहरण की घटना के बाद पुलिस ने महज 14 घंटे के भीतर उसे सकुशल बरामद कर माता-पिता को सौंप दिया। 11 जनवरी 2026 को ढेगमा साप्ताहिक हाट से बच्चा गायब हुआ था, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही पुलिस ने तकनीकी निगरानी और स्थानीय सूत्रों के सहयोग से व्यापक तलाश अभियान शुरू किया। त्वरित और समन्वित कार्रवाई से यह संवेदनशील मामला सुरक्षित अंत तक पहुंचा।
- कोवाली थाना क्षेत्र के ढेगमा हाट से 4 माह का शिशु चोरी।
- 11 जनवरी 2026 को सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय।
- तकनीकी निगरानी और स्थानीय सूत्रों से मिला सुराग।
- महज 14 घंटे में सुरक्षित बरामदगी।
- थाना परिसर में माँ की गोद में सौंपा गया बच्चा।
जमशेदपुर जिले में यह घटना न केवल पुलिस की तत्परता को दर्शाती है, बल्कि आम लोगों के भरोसे को भी मजबूत करती है। 11 जनवरी को ढेगमा साप्ताहिक बाजार में रोजमर्रा की तरह चहल-पहल थी, तभी अचानक एक दंपती का चार महीने का बच्चा लापता हो गया। कुछ ही पलों में यह खबर पूरे इलाके में फैल गई और परिजन बदहवास हो गए।
घटना की सूचना और तत्काल पुलिस कार्रवाई
बच्चे के गायब होने की जानकारी मिलते ही कोवाली थाना पुलिस ने मामले को अत्यंत संवेदनशील मानते हुए तुरंत प्राथमिकी दर्ज की। थाना स्तर पर वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया और विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस ने आसपास के इलाकों में नाकेबंदी कर दी और संभावित रास्तों पर निगरानी बढ़ा दी गई।
स्थानीय लोगों से पूछताछ के साथ-साथ बाजार में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती घंटे किसी भी अपहरण या चोरी के मामले में बेहद अहम होते हैं, और इसी सिद्धांत पर तेजी से कार्रवाई की गई।
तकनीकी निगरानी और टीम वर्क की भूमिका
जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी निगरानी का सहारा लिया। मोबाइल लोकेशन, संदिग्ध गतिविधियों और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारियों को एक-दूसरे से जोड़ते हुए पुलिस धीरे-धीरे सही दिशा में आगे बढ़ी।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया:
“यह मामला हमारे लिए केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि एक माँ की ममता और बच्चे की सुरक्षा से जुड़ा था। इसलिए हर टीम ने पूरी संवेदनशीलता और समर्पण के साथ काम किया।”
14 घंटे में सुरक्षित बरामदगी
लगातार प्रयासों के बाद पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिला और संदिग्ध स्थान पर छापेमारी की गई। महज 14 घंटे के भीतर चार महीने के मासूम को पूरी तरह सुरक्षित बरामद कर लिया गया। बच्चे को किसी प्रकार की शारीरिक क्षति नहीं पहुंची थी, जिसे देखकर पुलिस टीम और परिजनों ने राहत की सांस ली।
भावुक पल: माँ की गोद में लौटा मासूम
बच्चे को कोवाली थाना परिसर में लाया गया, जहां औपचारिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे उसकी माँ की गोद में सौंपा गया। यह दृश्य बेहद भावुक था। माँ की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए और पिता ने पुलिस का हाथ जोड़कर धन्यवाद किया।
मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि पुलिसकर्मियों के चेहरों पर भी संतोष और गर्व की झलक साफ दिखाई दे रही थी। यह पल दिखाता है कि वर्दी के पीछे भी संवेदनशील दिल धड़कता है।
पुलिस की संवेदनशीलता और सामाजिक संदेश
इस पूरे घटनाक्रम ने यह संदेश दिया कि जब मामला बच्चों की सुरक्षा का हो, तो झारखंड पुलिस किसी भी चुनौती से पीछे नहीं हटती। त्वरित निर्णय, बेहतर समन्वय और मानवीय दृष्टिकोण के कारण यह मामला सुखद अंत तक पहुंच सका।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
पुलिस द्वारा मामले में संलिप्त लोगों की पहचान और भूमिका की जांच जारी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
न्यूज़ देखो: भरोसे की जीत, पुलिसिंग की मिसाल
यह घटना साबित करती है कि जब पुलिस तत्परता, तकनीक और संवेदनशीलता के साथ काम करती है, तो असंभव भी संभव हो जाता है। 14 घंटे में मासूम की सुरक्षित बरामदगी आम जनता के विश्वास को और मजबूत करती है। ऐसे मामलों में जवाबदेही और त्वरित कार्रवाई ही असली पुलिसिंग की पहचान है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
बच्चों की सुरक्षा हम सबकी जिम्मेदारी
हर बच्चा सुरक्षित बचपन का हकदार है। इस घटना से सीख लेकर समाज और प्रशासन दोनों को और सतर्क होने की जरूरत है। यदि आप अपने आसपास किसी भी संदिग्ध गतिविधि को देखें, तो तुरंत सूचना दें। जागरूक बनें, सतर्क रहें और इस खबर को साझा कर दूसरों को भी सचेत करें।





