
#कोलेबिरा #मनरेगा_आंदोलन : लंबित मांगों को लेकर मनरेगा कर्मियों ने बीडीओ कार्यालय के सामने किया विरोध प्रदर्शन।
सिमडेगा जिले के कोलेबिरा प्रखंड में मनरेगा कर्मियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सांकेतिक हड़ताल शुरू कर दी है। झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के आह्वान पर प्रखंड विकास कार्यालय के मुख्य द्वार के समीप कर्मियों ने विरोध प्रदर्शन किया। कर्मियों का कहना है कि सेवा सुरक्षा, नियमित वेतन और सामाजिक सुरक्षा सहित कई मांगें वर्षों से लंबित हैं। यदि 11 मार्च तक सरकार की ओर से ठोस समाधान नहीं मिला तो 12 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी।
- कोलेबिरा प्रखंड विकास कार्यालय के मुख्य द्वार के पास मनरेगा कर्मियों की सांकेतिक हड़ताल।
- झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के आह्वान पर 9, 10 और 11 मार्च तक विरोध प्रदर्शन।
- सेवा सुरक्षा, नियमितीकरण, ग्रेड पे और वेतन भुगतान सहित कई मांगें लंबित।
- कई जिलों में छह माह से अधिक समय से मानदेय बकाया होने का आरोप।
- मांगें नहीं मानी गईं तो 12 मार्च 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी।
- विरोध प्रदर्शन में करिश्मा बड़ाइक, राजू नाग, नितरन कुल्लू सहित कई कर्मी रहे शामिल।
सिमडेगा जिले के कोलेबिरा प्रखंड में सोमवार को मनरेगा कर्मियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सांकेतिक हड़ताल शुरू कर दी। झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के आह्वान पर प्रखंड क्षेत्र के सभी मनरेगा कर्मी कोलेबिरा प्रखंड विकास कार्यालय के मुख्य द्वार के समीप एकत्रित हुए और विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान रोजगार सेवकों सहित सभी कर्मियों ने सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए अपनी विभिन्न मांगों को पूरा करने की मांग उठाई। हड़ताल के दौरान कर्मियों ने कहा कि लंबे समय से वे अपनी समस्याओं को लेकर सरकार से समाधान की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
वर्षों से लंबित हैं मनरेगा कर्मियों की मांगें
सांकेतिक हड़ताल पर बैठे मनरेगा कर्मियों ने बताया कि संघ द्वारा पिछले कई वर्षों से राज्य सरकार का ध्यान मनरेगा कर्मियों की विभिन्न समस्याओं की ओर आकर्षित किया जा रहा है। इन मांगों में सेवा सुरक्षा, नियमितीकरण नीति का निर्माण, ग्रेड पे, नियमित वेतन भुगतान, सामाजिक सुरक्षा, हेल्थ इंश्योरेंस, अनुकंपा नियुक्ति और समयबद्ध मानदेय भुगतान प्रमुख रूप से शामिल हैं।
कर्मियों का कहना है कि इन मांगों को लेकर कई बार सरकार को ज्ञापन सौंपे गए हैं। इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से भी संबंधित अधिकारियों और सरकार तक अपनी बात पहुंचाई गई, लेकिन अब तक इन मांगों पर कोई ठोस और परिणामकारी निर्णय नहीं लिया गया है।
छह माह से अधिक समय से मानदेय बकाया
हड़ताली कर्मियों ने बताया कि राज्य के कई जिलों में मनरेगा कर्मियों का छह माह से अधिक समय से मानदेय बकाया है। इसके कारण कर्मियों के सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है और उनके परिवारों के भरण-पोषण में भी कठिनाई हो रही है।
कर्मियों ने यह भी कहा कि उन्हें बिना अतिरिक्त संसाधन और पारिश्रमिक के लगातार अतिरिक्त कार्यभार दिया जा रहा है। इससे उनके कार्य की कठिनाई और जिम्मेदारी दोनों बढ़ गई है।
असुरक्षित परिस्थितियों में करना पड़ता है काम
मनरेगा कर्मियों का कहना है कि फील्ड स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों को कई बार प्रतिकूल और असुरक्षित परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। इसके बावजूद उनके लिए कोई ठोस सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई है।
संघ के अनुसार झारखंड में अब तक करीब 112 मनरेगा कर्मियों की मृत्यु हो चुकी है, लेकिन उनके आश्रितों को किसी प्रकार का लाभ नहीं मिल पाया है। इस स्थिति को लेकर भी कर्मियों में गहरी नाराजगी है।
संघ का कहना है कि मनरेगा योजना के सफल क्रियान्वयन में जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। बावजूद इसके उन्हें उचित सम्मान और सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया है कि 9, 10 और 11 मार्च 2026 तक राज्यभर के सभी मनरेगा कर्मी सांकेतिक हड़ताल पर रहेंगे।
मनरेगा कर्मियों ने कहा: “यदि इस अवधि के भीतर सरकार की ओर से हमारी मांगों पर ठोस, लिखित और समयबद्ध समाधान नहीं दिया जाता है, तो 12 मार्च 2026 से राज्यभर के सभी मनरेगा कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।”
कर्मियों का कहना है कि उनकी मांगें पूरी तरह जायज हैं और सरकार को इस पर संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए।
बड़ी संख्या में कर्मियों की रही भागीदारी
कोलेबिरा प्रखंड में आयोजित इस सांकेतिक हड़ताल में कई मनरेगा कर्मियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इस दौरान रोजगार सेवक करिश्मा बड़ाइक, राजू नाग, नितरन कुल्लू, विजय कुमार साहू, विजय साहू, दिलीप ओहदार, सुरेंद्र साहू और माणिक लाल (लेखापाल) सहित प्रखंड क्षेत्र के सभी मनरेगा कर्मी उपस्थित रहे।
सभी कर्मियों ने एकजुट होकर अपनी मांगों को दोहराया और सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग की। उनका कहना था कि यदि सरकार ने समय रहते सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो आंदोलन और भी तेज किया जाएगा।
मनरेगा योजना में जमीनी कर्मियों की अहम भूमिका
मनरेगा योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने और विकास कार्यों को गति देने की एक महत्वपूर्ण योजना है। इस योजना के क्रियान्वयन में रोजगार सेवकों और मनरेगा कर्मियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। वे गांव-गांव जाकर योजनाओं को लागू करते हैं, मजदूरों का पंजीकरण करते हैं और विकास कार्यों की निगरानी करते हैं।
कर्मियों का कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने के बावजूद उन्हें उचित सुविधाएं और सुरक्षा नहीं मिल रही है, जिससे उनके मनोबल पर भी असर पड़ रहा है।
न्यूज़ देखो: जमीनी कर्मियों की अनदेखी से कैसे चलेगी ग्रामीण विकास की योजना
मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना का आधार जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारी ही होते हैं। यदि वही कर्मचारी अपनी बुनियादी मांगों के लिए आंदोलन करने को मजबूर हो जाएं, तो यह सरकार और प्रशासन दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। सेवा सुरक्षा, नियमित वेतन और सामाजिक सुरक्षा जैसी मांगें किसी भी कर्मचारी के लिए बुनियादी जरूरत हैं। अब देखना होगा कि सरकार इन मांगों पर कितनी गंभीरता से कदम उठाती है और क्या समय रहते समाधान निकाल पाती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अधिकारों के लिए जागरूकता और संवाद से ही निकलता है समाधान
किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में कर्मचारियों की समस्याओं को सुनना और उनका समाधान करना बेहद जरूरी होता है। जब संवाद और समझदारी के साथ समस्याओं का समाधान होता है, तभी विकास की योजनाएं प्रभावी तरीके से लागू हो पाती हैं।ग्रामीण विकास की योजनाओं में काम करने वाले कर्मियों का मनोबल मजबूत रहना भी उतना ही जरूरी है जितना कि योजनाओं का सही क्रियान्वयन।






