
#मनोहरपुर #स्वास्थ्य_लापरवाही : प्रसव के बाद मां और शिशु की मौत—अस्पताल व्यवस्था पर उठे सवाल।
पश्चिम सिंहभूम के मनोहरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के दौरान एक महिला और उसके नवजात शिशु की मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। घटना के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर नाराजगी बढ़ गई है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है।
- मनोहरपुर सीएचसी में प्रसव के दौरान मां और शिशु की मौत।
- मृतका खुशबू खंडाईत (31 वर्ष), 10 साल बाद बनी थी मां।
- परिजनों ने अस्पताल पर गंभीर लापरवाही का लगाया आरोप।
- कांग्रेस और भाजपा नेताओं ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए।
- विशेषज्ञ डॉक्टर और सुविधाओं की कमी पर भी जताई गई चिंता।
पश्चिम सिंहभूम जिले के मनोहरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत की घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। नंदपुर पंचायत के डोंगाकाटा नीचे टोला निवासी खुशबू खंडाईत (31 वर्ष) की प्रसव के दौरान मौत हो गई, जबकि जन्म के समय ही शिशु मृत पाया गया।
इस घटना के बाद परिजनों में गहरा आक्रोश है और उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
प्रसव के बाद बिगड़ी हालत, तीन घंटे में मौत
परिजनों के अनुसार, खुशबू खंडाईत को प्रसव पीड़ा होने पर मनोहरपुर सीएचसी लाया गया था। डॉक्टरों ने आश्वासन दिया कि सामान्य डिलीवरी हो जाएगी। कुछ समय बाद डिलीवरी हुई, लेकिन शिशु मृत पाया गया।
मृतका के पति रोहित खंडाईत ने कहा: “डिलीवरी के बाद पत्नी सामान्य थी, लेकिन शिशु की मौत की खबर से वह सदमे में आ गई और उसकी हालत बिगड़ गई।”
डिलीवरी के करीब तीन घंटे बाद खुशबू ने भी दम तोड़ दिया।
10 साल बाद मिली थी मातृत्व की खुशी
यह घटना इसलिए भी अधिक दुखद है क्योंकि खुशबू को शादी के 10 वर्ष बाद मां बनने का अवसर मिला था। परिवार इस खुशी को लेकर बेहद उत्साहित था, लेकिन अचानक यह हादसा हो गया।
इस घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।
परिजनों का आरोप—समय पर रेफर नहीं किया गया
परिजनों का आरोप है कि यदि अस्पताल प्रबंधन ने समय रहते स्थिति की गंभीरता को समझा होता और मरीज को बड़े अस्पताल के लिए रेफर कर दिया होता, तो महिला की जान बचाई जा सकती थी।
रोहित खंडाईत ने कहा: “स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही के कारण मेरी पत्नी और बच्चे की जान गई है।”
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना के बाद मनोहरपुर सीएचसी की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों और आवश्यक सुविधाओं की कमी है।
कांग्रेस ने जताई नाराजगी
मनोहरपुर प्रखंड कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम गोप ने इस घटना पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अस्पताल में सर्जन और स्त्री रोग विशेषज्ञ की कमी है।
सीताराम गोप ने कहा: “अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन होने के बावजूद टेक्नीशियन के अभाव में उसका उपयोग नहीं हो रहा है।”
उन्होंने मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
भाजपा कार्यकर्ताओं ने पीड़ित परिवार से की मुलाकात
घटना के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। इस दौरान अजय प्रजापति, कैलाश गुप्ता, हेमंत सांडिल, प्रदीप मिश्रा, मनोज नायक, स्वरूप पति सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
भाजपा नेता अजय प्रजापति ने कहा: “झारखंड में स्वास्थ्य विभाग की स्थिति चिंताजनक है और इस पर गंभीर ध्यान देने की जरूरत है।”
ग्रामीणों में बढ़ा भय और आक्रोश
इस घटना के बाद ग्रामीणों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भय का माहौल है। लोगों का कहना है कि यदि अस्पताल में ही सुरक्षा नहीं है, तो वे इलाज के लिए कहां जाएं।

न्यूज़ देखो: स्वास्थ्य व्यवस्था की सच्चाई उजागर
मनोहरपुर की यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करती है। जच्चा-बच्चा की मौत केवल एक परिवार का नुकसान नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल है। अब जरूरी है कि प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करे और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
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हर नागरिक को सुरक्षित और बेहतर इलाज का अधिकार है।
ऐसी घटनाएं हमें जागरूक और सक्रिय बनने की जरूरत बताती हैं।
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