
#बगोदर #मातृपितृपूजनोत्सव : संस्कार और पारिवारिक मूल्यों का प्रेरक आयोजन।
गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड अंतर्गत गोपालडीह स्थित संस्कार विद्यालय में मातृ पितृ पूजनोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में माता-पिता के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और पारिवारिक मूल्यों की भावना को मजबूत करना था। इस अवसर पर छात्रों ने विधिवत पूजन कर आशीर्वाद लिया और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रेम व्यक्त किया। आयोजन में बड़ी संख्या में अभिभावक, शिक्षक और स्थानीय गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
- संस्कार विद्यालय, गोपालडीह में मातृ पितृ पूजनोत्सव आयोजित।
- छात्रों ने विधिवत अपने माता-पिता का किया पूजन।
- सांस्कृतिक कार्यक्रमों से व्यक्त किया सम्मान और कृतज्ञता।
- अभिभावकों की उपस्थिति से भावुक हुआ विद्यालय परिसर।
- शिक्षकों और स्थानीय गणमान्य लोगों की रही भागीदारी।
बगोदर प्रखंड के गोपालडीह स्थित संस्कार विद्यालय में मातृ पितृ पूजनोत्सव के अवसर पर विद्यालय परिसर श्रद्धा, सम्मान और भावनाओं से भर उठा। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में अपने माता-पिता के प्रति आदर, कृतज्ञता और पारिवारिक मूल्यों की समझ विकसित करना रहा। बड़ी संख्या में उपस्थित अभिभावकों, शिक्षकों और स्थानीय लोगों की मौजूदगी ने आयोजन को विशेष बना दिया।
विद्यार्थियों ने किया विधिवत पूजन
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के साथ हुई। विद्यार्थियों ने अपने माता-पिता के चरण धोकर, तिलक लगाकर और पुष्प अर्पित कर उनका पूजन किया। इसके बाद बच्चों ने अपने माता-पिता का आशीर्वाद लिया।
पूरे विद्यालय परिसर में एक श्रद्धामय और भावुक वातावरण देखने को मिला। कई अभिभावक अपने बच्चों की इस पहल से भावुक हो उठे। बच्चों के चेहरों पर सम्मान और गर्व की झलक स्पष्ट दिखाई दे रही थी।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से झलका प्रेम
पूजन के बाद छात्रों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। गीत, कविता और लघु नाटिका के माध्यम से बच्चों ने माता-पिता के त्याग, प्रेम और संघर्ष को दर्शाया। इन प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया।
विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं होते, बल्कि ये बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विद्यालय प्रबंधन ने कहा: “मातृ पितृ पूजनोत्सव जैसे आयोजन से विद्यार्थियों में संस्कार, अनुशासन और परिवार के प्रति जिम्मेदारी की भावना मजबूत होती है।”
अभिभावकों ने की सराहना
कार्यक्रम में शामिल अभिभावकों ने विद्यालय की इस पहल की सराहना की। उनका कहना था कि आज के समय में जब पारिवारिक मूल्य कमजोर पड़ते नजर आते हैं, ऐसे आयोजन बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करते हैं।
स्थानीय गणमान्य लोगों ने भी विद्यालय की इस पहल को समाज के लिए सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों को प्रारंभ से ही पारिवारिक सम्मान और संस्कार सिखाए जाएं, तो समाज में नैतिकता और अनुशासन स्वतः मजबूत होगा।
संस्कार और शिक्षा का संगम
संस्कार विद्यालय द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम शिक्षा के साथ-साथ जीवन मूल्यों को भी प्राथमिकता देने का संदेश देता है। केवल पाठ्यपुस्तक ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यवहारिक जीवन में आदर और कृतज्ञता का भाव भी उतना ही आवश्यक है।
विद्यालय परिसर में पूरे समय अनुशासन और सौहार्द का वातावरण बना रहा। कार्यक्रम के अंत में सभी अभिभावकों को धन्यवाद ज्ञापित किया गया और बच्चों को प्रेरित किया गया कि वे जीवन भर अपने माता-पिता का सम्मान करें।
न्यूज़ देखो: शिक्षा के साथ संस्कार की पहल
गोपालडीह के संस्कार विद्यालय का यह आयोजन यह दर्शाता है कि शिक्षा केवल अकादमिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। बच्चों में परिवार के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी उतना ही आवश्यक है। ऐसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं और पीढ़ियों के बीच संबंधों को मजबूत करते हैं। यदि अन्य शैक्षणिक संस्थान भी इस प्रकार की पहल करें, तो पारिवारिक मूल्यों को नई मजबूती मिल सकती है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
परिवार ही पहली पाठशाला है
माता-पिता हमारे जीवन के प्रथम शिक्षक होते हैं। उनके त्याग, परिश्रम और प्रेम को समझना हर बच्चे की जिम्मेदारी है। ऐसे आयोजनों से बच्चों को यह सीख मिलती है कि सफलता की राह में परिवार का सम्मान सर्वोपरि है।
आइए, हम सब मिलकर पारिवारिक मूल्यों को सहेजने का संकल्प लें। अपने माता-पिता के प्रति आभार व्यक्त करें और बच्चों को भी संस्कारों की शिक्षा दें। अपनी राय कमेंट में साझा करें, इस खबर को आगे बढ़ाएं और सकारात्मक पहल को समाज तक पहुंचाएं।


