सरस्वती शिशु विद्या मंदिर सलडेगा में मातृ सम्मेलन और परीक्षाफल वितरण, मातृशक्ति को मिला सम्मान

सरस्वती शिशु विद्या मंदिर सलडेगा में मातृ सम्मेलन और परीक्षाफल वितरण, मातृशक्ति को मिला सम्मान

author Satyam Kumar Keshri
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#सिमडेगा #मातृ_सम्मेलन : संस्कार और शिक्षा के संगम में माताओं और विद्यार्थियों का सम्मान हुआ।

सिमडेगा के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर सलडेगा में मातृ सम्मेलन और वार्षिक परीक्षाफल वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. आशा लकड़ा ने माताओं की भूमिका पर प्रकाश डाला। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों और मेधावी छात्रों के सम्मान से कार्यक्रम गरिमामय बना। आयोजन में शिक्षा, संस्कार और मातृशक्ति के महत्व को रेखांकित किया गया।

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  • सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, सलडेगा में भव्य कार्यक्रम आयोजित।
  • डॉ. आशा लकड़ा ने मातृशक्ति और संस्कारयुक्त शिक्षा पर जोर दिया।
  • मेधावी छात्रों की माताओं को सम्मानित किया गया
  • 100% उपस्थिति वाले छात्रों के परिवारों को भी मिला सम्मान।
  • सांस्कृतिक कार्यक्रमों से मोहक वातावरण बना।

सिमडेगा के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर सलडेगा में सोमवार को मातृ सम्मेलन सह वार्षिक परीक्षाफल वितरण कार्यक्रम बड़े ही भव्य और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस आयोजन में माताओं, विद्यार्थियों और शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली, जिससे पूरा परिसर उत्सवमय और संस्कारमय वातावरण से भर गया।

कार्यक्रम का आयोजन वनवासी कल्याण केंद्र झारखंड की शैक्षिक इकाई श्रीहरि वनवासी विकास समिति के तत्वावधान में किया गया, जिसका उद्देश्य मातृशक्ति को सम्मान देना और शिक्षा में उनके योगदान को रेखांकित करना था।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुभारंभ

कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ. आशा लकड़ा (राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य एवं पूर्व मेयर, रांची) सहित अन्य अतिथियों द्वारा मां सरस्वती, भारत माता एवं ॐ के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और पुष्पार्चन कर किया गया।

इस अवसर पर पूरे परिसर में आध्यात्मिकता और भारतीय संस्कृति की झलक देखने को मिली।

माताओं की भूमिका पर दिया गया संदेश

अपने संबोधन में डॉ. आशा लकड़ा ने माताओं की भूमिका को बच्चों के चरित्र निर्माण की आधारशिला बताया।

डॉ. आशा लकड़ा ने कहा: “संस्कारयुक्त शिक्षा ही एक सशक्त राष्ट्र के निर्माण का आधार है और इसमें माताओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है।”

उन्होंने बच्चों के जीवन में नैतिक मूल्यों और संस्कारों के महत्व पर जोर दिया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मोहा मन

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सामूहिक गीत, नृत्य और आकर्षक रूप-सज्जा ने सभी का मन मोह लिया। आचार्याओं द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत ने माहौल को और अधिक मधुर बना दिया।

परीक्षाफल वितरण और सम्मान समारोह

समारोह में वार्षिक परीक्षाफल की घोषणा की गई और प्रत्येक कक्षा में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की माताओं को सम्मानित किया गया।

इसके अलावा 100% उपस्थिति दर्ज कराने वाले विद्यार्थियों—रितिका कुमारी, रविन उरांव, नैतिक कुमार, सृष्टि कुमारी, तमन्ना नाग, पुनिका कुमारी, खुशबू कुमारी, आकाश प्रसाद, आसयानी टोप्पो, नंदनी कुमारी, कोमल रानी बेसरा, प्रतीक नाग—की माताओं को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

प्रोत्साहन राशि और सहयोग

विद्यालय के संरक्षक पुरुषोत्तम अग्रवाल ने सभी कक्षाओं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को ₹1000 की प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया।

उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अपने योगदान को जारी रखने और विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।

अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति

कार्यक्रम में अनिल प्रसाद (प्रखंड कल्याण पदाधिकारी), कृष्ण चंद्र दोराईबुरु (जिला कल्याण पदाधिकारी), अशोक बड़ाईक (भाजपा प्रदेश प्रवक्ता), सत्यजीत कुमार (एनसीसी एएनओ), संतोष दास (संकुल प्रमुख) सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

इसके अलावा विद्यालय प्रबंधन के विद्या बड़ाईक, चंदेश्वर मुण्डा, संजीत कुमार, सुदर्शन सिंह, मुरारी प्रसाद, आशा देवी, बसंत नारायण मांझी, अनिरुद्ध कुमार सहित अन्य सदस्यों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अनुशासन और संस्कार का अनूठा उदाहरण

पूरे कार्यक्रम में अनुशासन, संस्कार और सांस्कृतिक मूल्यों की झलक देखने को मिली। यह आयोजन न केवल शैक्षणिक उपलब्धियों का उत्सव था, बल्कि मातृशक्ति के सम्मान का भी प्रतीक बना।

प्रधानाचार्य जितेंद्र कुमार पाठक ने सभी अतिथियों और अभिभावकों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के सफल समापन की घोषणा की।

न्यूज़ देखो: शिक्षा के साथ संस्कार की मजबूत नींव

सलडेगा का यह आयोजन दिखाता है कि शिक्षा केवल अंकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें संस्कार और पारिवारिक मूल्यों का भी बड़ा योगदान होता है। मातृ सम्मेलन के माध्यम से माताओं को सम्मान देना एक सराहनीय पहल है, जो समाज को सही दिशा देता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

मातृशक्ति का सम्मान, उज्ज्वल भविष्य की पहचान

मां ही बच्चे की पहली शिक्षक होती है और उसका मार्गदर्शन जीवनभर साथ रहता है।
संस्कार और शिक्षा का संगम ही बच्चों को सफल बनाता है।
आइए, हम सभी मातृशक्ति का सम्मान करें और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए मिलकर प्रयास करें।
हर परिवार और विद्यालय का सहयोग ही समाज को आगे बढ़ाता है।

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