Simdega

आर्मी बहाली की तैयारी कर रही माताओं को मिला सम्मान, एमपीडब्ल्यू कुश बड़ाईक की पहल ने बढ़ाया आत्मविश्वास

#सिमडेगा #महिला_सशक्तिकरण : ठंड में अभ्यास कर रही माताओं और बच्चों को सम्मान व गर्म कपड़ों से मिला संबल।

सिमडेगा में देश सेवा के लिए तैयारी कर रही महिलाओं के हौसले को नई ताकत मिली है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिमडेगा में पदस्थापित एमपीडब्ल्यू कुश बड़ाईक ने अल्बर्ट एक्का मैदान में अभ्यास कर रही साढ़े तीन दर्जन से अधिक माताओं और उनके बच्चों को सम्मानित किया। ठंड के मौसम में उनकी कठिनाइयों को देखते हुए गर्म कपड़े और कंबल वितरित किए गए। यह पहल महिला सशक्तिकरण और सामाजिक संवेदनशीलता का मजबूत संदेश देती है।

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  • अल्बर्ट एक्का मैदान, सिमडेगा में देश सेवा की तैयारी कर रहीं महिलाओं का सम्मान।
  • एमपीडब्ल्यू कुश बड़ाईक ने माताओं और बच्चों को गर्म कपड़े वितरित किए।
  • कुल 78 माताओं व बच्चों के बीच कंबल का वितरण।
  • 300 से अधिक लोगों को केले का वितरण कर पोषण का संदेश।
  • महिलाएं होमगार्ड, पुलिस और फौज में भर्ती की कर रही हैं तैयारी।
  • ठंड और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच संघर्ष कर रही माताओं का बढ़ा मनोबल।

सिमडेगा जिले में देश सेवा की तैयारी कर रही महिलाओं के जज्बे को सम्मान और सहयोग मिला। अल्बर्ट एक्का मैदान में नियमित अभ्यास करने वाली वे महिलाएं, जो अपने छोटे बच्चों को गोद में लेकर कड़ाके की ठंड में दौड़ और शारीरिक अभ्यास करती हैं, उनके संघर्ष को पहचानते हुए एक मानवीय पहल की गई। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिमडेगा में पदस्थापित एमपीडब्ल्यू कुश बड़ाईक ने इन माताओं और उनके बच्चों को सम्मानित कर उनके हौसले को नई ऊर्जा दी।

मातृत्व और देश सेवा का अनोखा संगम

अल्बर्ट एक्का मैदान में हर सुबह एक प्रेरक दृश्य देखने को मिलता है, जहां कई माताएं अपने छोटे बच्चों को साथ लेकर होमगार्ड, पुलिस और भारतीय सेना की भर्ती की तैयारी करती हैं। ठंड, संसाधनों की कमी और घरेलू जिम्मेदारियों के बावजूद उनका लक्ष्य स्पष्ट है—देश सेवा में अपना स्थान बनाना।

इन माताओं ने बताया कि कड़ाके की ठंड में बच्चों को साथ लेकर अभ्यास करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। कई बार बच्चों की देखभाल और अभ्यास के बीच संतुलन बनाना कठिन हो जाता है, लेकिन फिर भी वे अपने सपनों से पीछे नहीं हटतीं।

एमपीडब्ल्यू कुश बड़ाईक की संवेदनशील पहल

महिलाओं की इसी कठिनाई को समझते हुए एमपीडब्ल्यू कुश बड़ाईक ने उनकी सहायता करने का निर्णय लिया। उन्होंने अल्बर्ट एक्का मैदान में पहुंचकर साढ़े तीन दर्जन से अधिक माताओं एवं उनके बच्चों को सम्मानित किया। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं और बच्चों के बीच स्वेटर, जैकेट सहित अन्य गर्म कपड़ों का वितरण किया गया।

इस अवसर पर कुल 78 माताओं और बच्चों को कंबल प्रदान किए गए, ताकि वे ठंड से सुरक्षित रह सकें और अभ्यास जारी रख सकें। इसके साथ ही, मैदान में उपस्थित 300 से अधिक लोगों के बीच केले का वितरण भी किया गया, जिससे पोषण और स्वास्थ्य का संदेश दिया गया।

सम्मान से बढ़ा आत्मविश्वास

इस पहल का महिलाओं पर गहरा असर देखने को मिला। सम्मान और सहयोग पाकर माताओं के चेहरों पर खुशी और आत्मविश्वास साफ झलक रहा था। उन्होंने कहा कि इस तरह का समर्थन न केवल शारीरिक सहायता देता है, बल्कि मानसिक रूप से भी उन्हें मजबूत बनाता है।

महिलाओं ने इस सहयोग के लिए एमपीडब्ल्यू कुश बड़ाईक के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि इससे उनका हौसला कमजोर नहीं पड़ेगा, बल्कि वे और अधिक दृढ़ संकल्प के साथ अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ेंगी।

समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण

स्थानीय लोगों ने भी इस पहल की सराहना की और इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। उनका कहना है कि जब सरकारी सेवा में कार्यरत लोग इस तरह से सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हैं, तो इससे समाज में सकारात्मक संदेश जाता है।

लोगों ने यह भी कहा कि ऐसी पहलें महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती हैं और यह साबित करती हैं कि सीमित संसाधनों के बावजूद भी बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।

पर्दे के पीछे से लगातार सेवा कार्य

यह पहली बार नहीं है जब एमपीडब्ल्यू कुश बड़ाईक ने जरूरतमंदों की सहायता की हो। बताया गया कि वे समय-समय पर असहाय और गरीब लोगों की मदद पर्दे के पीछे से करते रहते हैं। कोविड काल के दौरान उन्होंने अनगिनत लोगों के बीच सूखा राशन, सब्जी और अन्य राहत सामग्री उपलब्ध कराकर जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाई थी।

इसके अलावा भी वे विभिन्न अवसरों पर समाज के कमजोर वर्गों की मदद करते रहे हैं। उनकी यह निरंतर सेवा भावना उन्हें समाज में एक संवेदनशील और जिम्मेदार स्वास्थ्य कर्मी के रूप में स्थापित करती है।

महिलाओं के सपनों को मिला संबल

देश सेवा का सपना देख रही इन माताओं के लिए यह पहल केवल सहायता नहीं, बल्कि एक संदेश है कि समाज उनके संघर्ष को देख रहा है और उनके साथ खड़ा है। छोटे बच्चों के साथ कठिन परिस्थितियों में अभ्यास करना अपने आप में एक बड़ी चुनौती है, और ऐसे में मिला सम्मान उनके आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ा देता है।

यह कार्यक्रम यह भी दर्शाता है कि महिला सशक्तिकरण केवल नारों से नहीं, बल्कि जमीन पर किए गए छोटे लेकिन प्रभावी प्रयासों से संभव होता है।

न्यूज़ देखो: जब संवेदनशीलता बने प्रेरणा की मिसाल

सिमडेगा में एमपीडब्ल्यू कुश बड़ाईक की यह पहल बताती है कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए बड़े पद या संसाधनों की नहीं, बल्कि संवेदनशील सोच की जरूरत होती है। देश सेवा की तैयारी कर रही माताओं को सम्मान देकर उन्होंने उनके संघर्ष को पहचान दी है। ऐसे प्रयास महिलाओं के आत्मविश्वास को मजबूत करते हैं और समाज को नई दिशा देते हैं। अब जरूरत है कि ऐसी पहलें और व्यापक स्तर पर हों।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

हौसले को सलाम, सपनों को समर्थन

जब माताएं बच्चों को गोद में लेकर देश सेवा का सपना देखती हैं, तो वह केवल व्यक्तिगत लक्ष्य नहीं रहता, बल्कि पूरे समाज की उम्मीद बन जाता है। ऐसे जज्बे को सम्मान और सहयोग मिलना बेहद जरूरी है। यदि समाज के हर वर्ग से ऐसे प्रयास सामने आएं, तो कई सपने हकीकत में बदल सकते हैं।

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Rakesh Kumar Yadav

कुरडेग, सिमडेगा

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