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मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना में घोटाला! घाघरा में लाभुकों को मिले बीमार सुअर

हाइलाइट्स :

  • योजना के तहत लाभुकों को बीमार और कमजोर सुअर बांटे गए।
  • लाभुकों ने कहा – फोटो में अच्छी नस्ल के सुअर दिखाए, लेकिन असल में बीमार सुअर दिए गए।
  • कई लाभुकों के सुअर दो दिन में ही मर गए।
  • पशुपालन विभाग ने सुअरों की वापसी और दोबारा वितरण का दिया आश्वासन।

योजना में भ्रष्टाचार, किसानों को लगा बड़ा झटका

झारखंड सरकार की मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना घाघरा प्रखंड में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। इस योजना के तहत लाभुकों को अच्छी नस्ल के पशु देने के बजाय कमजोर और बीमार सुअर वितरित किए गए। इससे कई लाभुकों के सुअर दो दिन के भीतर ही मर गए।

योजना का उद्देश्य पशुपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनके लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना था, लेकिन घाघरा में इस योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितता सामने आई है।

लाभुकों की नाराजगी, खुद को ठगा महसूस कर रहे किसान

निर्मला उरांव का आरोप

घाघरा की लाभुक निर्मला उरांव ने बताया कि प्रखंड कार्यालय में उनकी अच्छी नस्ल के सुअरों के साथ तस्वीर खिंचवाई गई थी, लेकिन घर पहुंचने पर कमजोर और बीमार सुअर मिले।

“शिकायत करने पर पशुपालन पदाधिकारी ने सुअर बदलने का आश्वासन दिया, लेकिन इससे पहले ही मेरे दो सुअर मर गए। मैंने ₹14,400 का भुगतान किया था, अब ठगा महसूस कर रही हूं।”

नीमा देवी की परेशानी

लाभुक नीमा देवी ने बताया कि ₹14,400 का भुगतान करने के एक साल बाद भी उन्हें छोटे और बीमार सुअर ही मिले।

“मुझे दूध पीने वाले सुअर दे दिए गए, जो ठीक से खा-पी भी नहीं रहे।”

विनीता देवी का आरोप

लाभुक विनीता देवी ने बताया कि उन्हें भी कमजोर और छोटे सुअर मिले, जिससे एक सुअर की मौत हो गई।

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पशुपालन विभाग का जवाब – सभी सुअर बदले जाएंगे

जब इस मामले में प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी डॉ. सीमा एक्का से बात की गई, तो उन्होंने बताया –

“गाड़ी का डाला लगे होने के कारण मैं सुअरों की स्थिति ठीक से नहीं देख पाई। यदि लाभुकों को बीमार और कमजोर सुअर मिले हैं, तो सभी वितरित सुअरों को वापस लिया जाएगा और दोबारा स्वस्थ सुअर बांटे जाएंगे।”

भ्रष्टाचार से योजना की साख पर सवाल

मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना का उद्देश्य पशुपालकों की आय बढ़ाना और रोजगार देना था, लेकिन घाघरा में भ्रष्टाचार और अनियमितता ने इस योजना को कमजोर कर दिया। कागजी हेराफेरी कर सरकारी राशि की बंदरबांट और लाभुकों को कमजोर पशु देने का आरोप लग रहा है।

अब यह देखना होगा कि विभाग इस घोटाले पर क्या कार्रवाई करता है और किसानों को उनका हक कैसे मिलता है।

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