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खूंटी के कर्रा में महिलाओं के लिए मशरूम प्रशिक्षण, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा बड़ा कदम

#खूंटी #महिला_सशक्तिकरण : दो दिवसीय प्रशिक्षण से ग्रामीण महिलाओं को मिला रोजगार का नया अवसर।

खूंटी जिले के कर्रा प्रखंड के दिघा डिगाडोन गांव में महिलाओं के लिए दो दिवसीय मशरूम प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस पहल को WCSF चैरिटीस्पिरिट फाउंडेशन और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहयोग से संचालित किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें आजीविका से जोड़ना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लेकर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।

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  • दिघा डिगाडोन, कर्रा (खूंटी) में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित।
  • WCSF चैरिटीस्पिरिट फाउंडेशन और ICAR प्लांडू का संयुक्त सहयोग।
  • महिलाओं को मशरूम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया सिखाई गई।
  • प्रशिक्षण के दौरान 150 मशरूम यूनिट पैकेट तैयार किए गए।
  • गांव में मशरूम उत्पादन केंद्र की भी शुरुआत की गई।

खूंटी जिले के कर्रा प्रखंड अंतर्गत दिघा डिगाडोन गांव में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। डब्ल्यूसीएसएफ चैरिटीस्पिरिट फाउंडेशन द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), पूर्वी अनुसंधान परिसर प्लांडू, रांची के सहयोग से दो दिवसीय मशरूम प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में अनुसूचित जनजाति समुदाय की बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया और नई आजीविका के अवसरों से जुड़ने की दिशा में कदम बढ़ाया।

आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रशिक्षण का उद्देश्य

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उन्हें रोजगार के नए साधनों से जोड़ना था। संस्था का मानना है कि यदि महिलाओं को सही प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, तो वे अपने परिवार और समाज के विकास में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

आयोजकों ने बताया: “इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें।”

मशरूम उत्पादन की दी गई विस्तृत जानकारी

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने महिलाओं को मशरूम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसमें मशरूम की खेती के लिए आवश्यक वातावरण, बीज तैयार करना, खाद्य सामग्री का चयन और देखभाल के तरीके शामिल थे।

इसके अलावा उत्पादन के बाद मशरूम के सुरक्षित भंडारण और बाजार में बिक्री की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी गई, ताकि महिलाएं उत्पादन के साथ-साथ विपणन में भी सक्षम बन सकें।

व्यावहारिक प्रशिक्षण से बढ़ा आत्मविश्वास

प्रशिक्षण को केवल सैद्धांतिक नहीं रखा गया, बल्कि महिलाओं को व्यावहारिक अनुभव भी दिया गया। इस दौरान महिलाओं ने खुद मशरूम उत्पादन की प्रक्रिया को अपनाते हुए करीब 150 यूनिट पैकेट तैयार किए

इस अनुभव ने महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्हें यह विश्वास दिलाया कि वे इस कार्य को अपने स्तर पर सफलतापूर्वक कर सकती हैं।

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गांव में शुरू हुआ उत्पादन केंद्र

इस कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि गांव में एक मशरूम उत्पादन केंद्र की भी स्थापना की गई। इससे महिलाएं नियमित रूप से इस कार्य से जुड़ सकेंगी और इसे स्थायी रोजगार के रूप में विकसित कर सकेंगी।

यह केंद्र गांव में रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा और महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाएगा।

ग्रामीण महिलाओं के लिए नई उम्मीद

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम ने ग्रामीण महिलाओं के लिए एक नई उम्मीद जगाई है। अब वे पारंपरिक कार्यों के अलावा नए व्यवसायिक क्षेत्रों में भी कदम रख सकती हैं।

इस पहल से न केवल महिलाओं की आय बढ़ेगी, बल्कि उनके आत्मविश्वास और सामाजिक स्थिति में भी सुधार होगा।

संस्था का लक्ष्य और भविष्य की योजना

डब्ल्यूसीएसएफ चैरिटीस्पिरिट फाउंडेशन का उद्देश्य ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से गांव स्तर पर रोजगार के स्थायी अवसर विकसित करना है। संस्था लगातार इस दिशा में कार्य कर रही है, ताकि ग्रामीण समुदायों में सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन लाया जा सके।

न्यूज़ देखो: प्रशिक्षण से बदल रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था

खूंटी के कर्रा में आयोजित यह कार्यक्रम दिखाता है कि सही दिशा में दिया गया प्रशिक्षण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदल सकता है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना केवल उनके परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के विकास के लिए जरूरी है। अब यह देखना होगा कि यह पहल कितनी दूर तक प्रभाव डाल पाती है और कितनी महिलाओं को स्थायी रोजगार मिल पाता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

आत्मनिर्भरता ही सशक्त समाज की पहचान

जब महिलाएं आत्मनिर्भर बनती हैं, तो पूरा समाज मजबूत होता है।
नई तकनीक और प्रशिक्षण से ही ग्रामीण जीवन में बदलाव संभव है।
जरूरी है कि हम ऐसे प्रयासों को आगे बढ़ाएं और अधिक लोगों को इससे जोड़ें।
हर गांव में रोजगार के अवसर पैदा करना ही असली विकास है।

आप भी इस पहल को समर्थन दें और अपने आसपास की महिलाओं को ऐसे प्रशिक्षण से जोड़ने के लिए प्रेरित करें।
अपनी राय कमेंट में साझा करें और इस खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं।

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