
#सिमडेगा #राष्ट्रीयलोकअदालत : वर्ष 2025 में चार राष्ट्रीय लोक अदालतों से हजारों परिवारों को न्यायिक राहत मिली।
सिमडेगा जिले में वर्ष 2025 के दौरान आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालतों ने न्यायिक प्रक्रिया को आम लोगों के लिए सरल और प्रभावी बनाया है। चार राष्ट्रीय लोक अदालतों के माध्यम से 97 हजार से अधिक मामलों का आपसी सहमति से निष्पादन किया गया, जिससे लोगों को वर्षों पुराने विवादों से राहत मिली। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के नेतृत्व में हुए इन आयोजनों से न केवल समय और धन की बचत हुई, बल्कि न्याय व्यवस्था पर आमजन का भरोसा भी मजबूत हुआ। यह पहल जिले में त्वरित और निःशुल्क न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आई है।
- वर्ष 2025 में चार राष्ट्रीय लोक अदालतों का आयोजन सिमडेगा जिले में किया गया।
- कुल 97,142 मामलों को निष्पादन के लिए सूचीबद्ध किया गया।
- 97,012 मामलों का आपसी समझौते के आधार पर सफल समाधान हुआ।
- कुल 6 करोड़ 46 लाख 31 हजार 876 रुपये की राशि पर समझौता किया गया।
- 96,347 प्री-लिटिगेशन और 663 लंबित न्यायालयीन मामलों का निष्पादन।
- आयोजन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार सिन्हा के नेतृत्व में संपन्न हुआ।
सिमडेगा जिले में न्याय प्रशासन द्वारा आम नागरिकों को त्वरित, सुलभ और निःशुल्क न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लोक अदालतों का आयोजन लगातार प्रभावी साबित हो रहा है। वर्ष 2025 के दौरान राष्ट्रीय लोक अदालत, लोक अदालत, विशेष लोक अदालत और स्थायी लोक अदालत के माध्यम से हजारों लोगों को वर्षों से लंबित मामलों से राहत मिली। इन अदालतों ने आम लोगों को न्यायालयों और सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर से बचाया, जिससे समय और आर्थिक संसाधनों की भी बचत हुई।
वर्ष 2025 में राष्ट्रीय लोक अदालतों का व्यापक प्रभाव
वर्ष 2025 में सिमडेगा जिले में कुल चार राष्ट्रीय लोक अदालतों का आयोजन किया गया। ये आयोजन 8 मार्च, 10 मई, 13 सितंबर और 13 दिसंबर 2025 को संपन्न हुए। इन चारों अवसरों पर कुल 97,142 मामलों को सुनवाई और समाधान के लिए रखा गया, जिनमें से 97,012 मामलों का सफल निष्पादन आपसी समझौते के आधार पर किया गया।
इन मामलों में कुल 6 करोड़ 46 लाख 31 हजार 876 रुपये की राशि पर समझौता हुआ, जो यह दर्शाता है कि लोक अदालतें केवल विवाद निपटाने का माध्यम ही नहीं, बल्कि आर्थिक विवादों के समाधान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
प्री-लिटिगेशन और लंबित मामलों का समाधान
निष्पादित मामलों में सबसे अधिक संख्या प्री-लिटिगेशन से जुड़े मामलों की रही। कुल 96,347 प्री-लिटिगेशन मामले लोक अदालत के माध्यम से सुलझाए गए। इसके साथ ही जिले के विभिन्न न्यायालयों में वर्षों से लंबित 663 मामलों का भी समाधान किया गया।
इन मामलों के निपटारे से न्यायालयों पर बढ़ते बोझ में कमी आई और न्यायिक व्यवस्था अधिक प्रभावी बन सकी। लोक अदालत के माध्यम से हुए निर्णय अंतिम होते हैं, जिनके विरुद्ध अपील का प्रावधान नहीं होता, जिससे विवाद स्थायी रूप से समाप्त हो जाते हैं।
सभी विभागों के सहयोग से संभव हुआ रिकॉर्ड निष्पादन
जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष सह प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार सिन्हा ने राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा:
राजीव कुमार सिन्हा ने कहा: “विभिन्न विभागों के सहयोग से राष्ट्रीय लोक अदालत में इतनी बड़ी संख्या में मामलों का निष्पादन संभव हो पाया है। इसके लिए न्यायिक, प्रशासनिक एवं पुलिस पदाधिकारी बधाई के पात्र हैं। राष्ट्रीय लोक अदालत आम लोगों के लिए न्याय पाने का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम है, जहां निःशुल्क, त्वरित और स्थायी समाधान मिलता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि लोक अदालतों में आपसी सहमति से विवाद सुलझने के कारण दोनों पक्षों के बीच सौहार्द बना रहता है और न्यायिक प्रक्रिया मानवीय रूप लेती है।
अधिक से अधिक लोगों तक न्याय पहुँचाना उद्देश्य
जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव मरियम हेमरोम ने बताया कि प्रत्येक वर्ष चार राष्ट्रीय लोक अदालतों का आयोजन किया जाता है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस वैकल्पिक न्याय प्रणाली का लाभ उठा सकें।
मरियम हेमरोम ने कहा: “हमारा उद्देश्य यह रहता है कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचे। विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर जरूरतमंद लोगों को विधिक सहायता और समाधान उपलब्ध कराया जाता है।”
उन्होंने बताया कि सभी विभागों के संयुक्त प्रयास से ही वर्ष 2025 में इतनी बड़ी संख्या में मामलों का निष्पादन संभव हो सका।
वर्ष 2026 के लिए भी तय हुई लोक अदालतों की तिथियां
जानकारी दी गई कि नालसा द्वारा वर्ष 2026 में भी चार राष्ट्रीय लोक अदालतों के आयोजन की स्वीकृति प्रदान की गई है। वर्ष 2026 में राष्ट्रीय लोक अदालतें 14 मार्च, 9 मई, 12 सितंबर और 12 दिसंबर को आयोजित की जाएंगी। इन आयोजनों के माध्यम से भी अधिक से अधिक लोगों को न्यायिक राहत दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
विभिन्न विभागों से जुड़े मामलों का समाधान
वर्ष 2025 में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालतों के दौरान विभिन्न विभागों से जुड़े मामलों का निष्पादन किया गया। इनमें बैंक रिकवरी से जुड़े 1,225 मामले, सुलह योग्य 464 आपराधिक मामले, बिजली विभाग से जुड़े 180 मामले, जमीन संबंधी 141 मामले, मोटर दुर्घटना के 4 मामले और चेक बाउंस से जुड़े 7 मामले शामिल रहे।
इसके अतिरिक्त राजस्व से जुड़े मामलों में 7 लाख 7 हजार 126 रुपये की राशि पर समझौता किया गया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि लोक अदालतें बहुआयामी विवादों के समाधान में प्रभावी भूमिका निभा रही हैं।
न्यूज़ देखो: लोक अदालतें बना रहीं न्याय को आमजन के करीब
सिमडेगा जिले में राष्ट्रीय लोक अदालतों की सफलता यह दर्शाती है कि वैकल्पिक न्याय प्रणाली आम लोगों के लिए कितनी उपयोगी साबित हो सकती है। हजारों मामलों का आपसी सहमति से समाधान न्यायालयों के बोझ को कम करने के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द को भी बढ़ावा देता है। प्रशासन, न्यायपालिका और विभिन्न विभागों के समन्वय से यह संभव हो सका है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वर्ष 2026 में भी यह गति और भरोसा कायम रह पाता है या नहीं।
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न्याय को सरल बनाने की दिशा में मजबूत कदम
लोक अदालतें यह साबित कर रही हैं कि न्याय केवल अदालत की चारदीवारी तक सीमित नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन से जुड़ा एक सुलभ अधिकार है। जब विवाद संवाद और सहमति से सुलझते हैं, तो समाज में विश्वास और शांति दोनों मजबूत होते हैं। ऐसे प्रयासों से न केवल न्यायिक व्यवस्था सशक्त होती है, बल्कि नागरिकों में कानून के प्रति जागरूकता भी बढ़ती है।




