
#बानो #नवकन्या_पूजन : दुर्गापहाड़ी मंदिर में श्रद्धालुओं ने विधि विधान से कन्याओं का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
चैत्र नवरात्रि के अवसर पर बानो दुर्गापहाड़ी मंदिर में नव कन्या पूजन का आयोजन किया गया। इस धार्मिक कार्यक्रम में क्षेत्र के श्रद्धालुओं ने भाग लेकर मां दुर्गा की आराधना की। आचार्य कौशलेश दुबे के नेतृत्व में विधि विधान से पूजन संपन्न हुआ। आयोजन ने नारी सम्मान और धार्मिक आस्था का संदेश दिया।
- बानो दुर्गापहाड़ी मंदिर में नव कन्या पूजन का आयोजन।
- आचार्य कौशलेश दुबे के नेतृत्व में संपन्न हुआ विधि-विधान से पूजन।
- नौ कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर पूजन और सम्मान किया गया।
- श्रद्धालुओं की भारी भागीदारी, भक्ति गीतों से गूंजा माहौल।
- कार्यक्रम के अंत में प्रसाद वितरण और आशीर्वाद ग्रहण किया गया।
चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर बानो स्थित दुर्गापहाड़ी मंदिर में नव कन्या पूजन का भव्य आयोजन किया गया। इस धार्मिक कार्यक्रम में स्थानीय श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और पूरे श्रद्धा भाव से मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की। कार्यक्रम ने पूरे क्षेत्र में भक्ति और आध्यात्मिकता का वातावरण बना दिया।
विधि-विधान से संपन्न हुआ नव कन्या पूजन
कार्यक्रम का संचालन आचार्य कौशलेश दुबे के नेतृत्व में किया गया, जिनके साथ गंधर्व सिंह, बालगोविन्द सिंह, पंडित मनोहर दिवेदी और टीपी मनोहरन ने विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई।
पूजन के दौरान नौ छोटी कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनका आदर-सम्मान किया गया। उनके चरण धोकर, तिलक लगाकर, चुनरी ओढ़ाई गई और उन्हें प्रसाद एवं भोजन कराया गया। इस धार्मिक परंपरा के माध्यम से श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त किया।
आचार्य कौशलेश दुबे ने कहा: “नव कन्या पूजन नवरात्रि का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। इससे समाज में नारी सम्मान और धार्मिक आस्था का संदेश मिलता है।”
भक्ति गीतों और मंत्रोच्चार से गूंजा वातावरण
पूरे कार्यक्रम के दौरान भक्ति गीतों और मंत्रोच्चार से मंदिर परिसर भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और आस्था के साथ पूजा में भाग लिया, जिससे आयोजन का माहौल और भी आध्यात्मिक हो गया।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने मां दुर्गा से सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
समाज में नारी सम्मान का संदेश
उपासक समूह के सदस्यों ने बताया कि नव कन्या पूजन केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि समाज में नारी के सम्मान का प्रतीक भी है। इस आयोजन के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया गया कि बेटियों को सम्मान और महत्व देना चाहिए।
इस तरह के धार्मिक आयोजनों से समाज में सकारात्मक सोच और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा मिलता है।
श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण
कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। इस दौरान लोगों ने एक-दूसरे के साथ खुशी और आस्था का भाव साझा किया।
आयोजन को सफल बनाने में प्रेमानंद उपाध्याय, रूपेश सिंह सहित उपासक समूह के सभी सदस्यों और स्थानीय लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
सामूहिक प्रयास से सफल आयोजन
इस आयोजन ने यह साबित किया कि जब समाज एकजुट होकर धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का पालन करता है, तो उसका प्रभाव पूरे क्षेत्र में सकारात्मक रूप से दिखाई देता है। श्रद्धालुओं की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को और भी सफल बना दिया।
न्यूज़ देखो: परंपरा और सामाजिक संदेश का संगम
बानो में आयोजित यह नव कन्या पूजन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि समाज में नारी सम्मान का सशक्त संदेश भी देता है। ऐसे आयोजन लोगों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ते हैं। यह जरूरी है कि इन मूल्यों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जाए। क्या ऐसे प्रयास समाज में स्थायी बदलाव ला पाएंगे? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आस्था के साथ सम्मान भी जरूरी, समाज को दें सही दिशा
धार्मिक आयोजन तभी सार्थक होते हैं जब वे समाज को सही दिशा दें। नव कन्या पूजन जैसे कार्यक्रम हमें यह सिखाते हैं कि नारी का सम्मान हमारी संस्कृति की पहचान है।






