Dumka

बासुकीनाथ धाम में श्रद्धा और उमंग के साथ मनाया गया नवान्न पर्व

#दुमका #नवान्न_पर्व : भक्तों ने नए अन्न का भोग अर्पित कर बाबा बासुकीनाथ से सुख-समृद्धि और उत्तम फसल की कामना की
  • बाबा बासुकीनाथ मंदिर में नवान्न पर्व धूमधाम से मनाया गया।
  • श्रद्धालुओं ने भोलेनाथ को नए अन्न का भोग अर्पित किया।
  • बाबा फौजदारीनाथ को चूड़ा, दही और मिष्ठान का भोग लगाया गया।
  • मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी।
  • पूरा परिसर बोल बम के जयकारों से गुंजायमान रहा।

दुमका स्थित बाबा बासुकीनाथ धाम में रविवार को नवान्न पर्व बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें मंदिर परिसर में नजर आईं, जहां सभी ने नए अन्न का भोग अर्पित कर भगवान भोलेनाथ से सुख-समृद्धि, शांति और उत्तम खेती की प्रार्थना की। नवान्न पर्व को कृषि संस्कृति और धार्मिक आस्था का संगम माना जाता है, इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों श्रद्धालु इस पावन दिन बासुकीनाथ पहुंचते हैं।

नए अन्न का भोग और परंपराओं का पालन

पर्व के तहत भक्तों ने भगवान फौजदारीनाथ को नया चूड़ा, दही और मिष्ठान का भोग लगाया। मान्यता है कि फसल कटने के बाद नया अन्न सबसे पहले भगवान को अर्पित किया जाए तो वर्ष भर घर में खुशहाली और समृद्धि बनी रहती है। इसी आस्था के साथ सभी भक्त पूजा-अर्चना में शामिल हुए और परंपरागत रीति से शिवलिंग पर जलाभिषेक भी किया।

मंदिर परिसर में गूंजे भक्ति के जयकारे

पूरे दिन मंदिर परिसर भक्तिमय रहा। दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने बोल बम और हर हर महादेव के जयकारों से वातावरण को पवित्र कर दिया। पुजारियों द्वारा किए गए विशेष अनुष्ठान और भोग अर्पण ने पर्व को और भी दिव्य बना दिया।

आस्था और संस्कृति का वार्षिक उत्सव

नवान्न पर्व न सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह झारखंड की कृषि परंपरा का भी महत्वपूर्ण प्रतीक है। नए अन्न की पहली भेंट भगवान को समर्पित कर लोग अपने जीवन और श्रम का फल ईश्वरीय आशीर्वाद से जोड़ते हैं। बासुकीनाथ धाम में हर वर्ष यह पर्व हजारों लोगों को आस्था के एक सूत्र में बांधता है।

न्यूज़ देखो कृषि, आस्था और परंपरा का पावन संगम

नवान्न जैसा पर्व हमें प्रकृति, श्रम और धर्म के बीच की गहरी कड़ी का एहसास कराता है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

नवान्न हमें प्रकृति से जुड़ने का संदेश देता है

आस्था तभी सार्थक होती है जब हम प्रकृति, परंपरा और समाज को मिलकर संवारें। इस पावन पर्व पर अपनी शुभकामनाएं साझा करें और खबर को आगे भेजें ताकि अधिक लोग जागरूक हों।

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