
#गिरिडीह #उसरी_बचाओ : संयोजक ने विकास, प्रदूषण और फंड पर उठाए सवाल।
गिरिडीह की जीवनदायिनी उसरी नदी को लेकर उसरी बचाव अभियान के संयोजक राजेश सिन्हा ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने नदी के संरक्षण, प्रदूषण रोकने और लंबित विकास कार्यों में तेजी लाने की मांग की है। सीसीएल से मिले फंड और प्रस्तावित छिलका डेम के निर्माण में देरी पर भी उन्होंने नाराजगी जताई। चेतावनी दी गई है कि जल्द सुधार नहीं हुआ तो जनांदोलन किया जाएगा।
- राजेश सिन्हा, संयोजक – उसरी बचाव अभियान ने दी आंदोलन की चेतावनी।
- सीसीएल से मिले लगभग चार करोड़ रुपये के उपयोग पर सवाल।
- शास्त्री नगर के पास प्रस्तावित छिलका डेम निर्माण में देरी।
- उसरी किनारे दस हजार पेड़ लगाने की योजना, चार हजार इस बार।
- फैक्ट्रियों पर पानी चोरी और प्रदूषण का आरोप, जांच की मांग।
गिरिडीह की उसरी नदी को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। उसरी बचाव अभियान के संयोजक राजेश सिन्हा ने नदी की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताते हुए प्रशासन और संबंधित विभागों को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो जनांदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जल, जमीन और जंगल बचाने का नारा केवल दिखावा करने वालों के लिए नहीं है, बल्कि इसके लिए ठोस कार्रवाई जरूरी है।
वर्षों से हो रही है उपेक्षा
राजेश सिन्हा ने कहा कि उसरी नदी के साथ सैकड़ों वर्षों से ज्यादती हो रही है। एक समय था जब उसरी में साल भर स्वच्छ पानी और लगभग बीस फीट बालू रहती थी, लेकिन अवैध बालू दोहन, सुस्त अफसरशाही और कमजोर नेतृत्व के कारण नदी की स्थिति बिगड़ती गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार लापरवाही के कारण नदी का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हुआ है और इसका असर गिरिडीह के पर्यावरण और जलस्रोतों पर पड़ रहा है।
“जिस उसरी में सालो भर स्वच्छ पानी और भरपूर बालू रहती थी, उसे बालू लूट और सुस्त व्यवस्था ने बर्बाद कर दिया है। अगर सुधार नहीं हुआ तो जनांदोलन के लिए तैयार रहना होगा।” – राजेश सिन्हा
फंड मिला, काम क्यों नहीं?
संयोजक ने बताया कि उसरी नदी के विकास के लिए सीसीएल की ओर से लगभग चार करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई है। इसमें से करीब दो करोड़ रुपये पिछले दो वर्षों से जिला प्रशासन के पास होने की जानकारी है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब राशि उपलब्ध है तो कार्य शुरू क्यों नहीं हो रहा। उनके अनुसार, इसी मुद्दे को लेकर अभियान आगे आंदोलन का रास्ता अपनाएगा।
छिलका डेम और अन्य योजनाएं
उसरी बचाव अभियान की टीम ने पूर्व में गिरिडीह सीसीएल के तत्कालीन जीएम बासब चटर्जी से नदी में छिलका डेम बनाने की मांग रखी थी। नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के प्रयास से पहले दो करोड़ रुपये स्वीकृत हुए, बाद में सीसीएल ने फिर लगभग दो करोड़ रुपये जिला प्रशासन को दिए जाने की जानकारी सामने आई।
बताया गया कि शास्त्री नगर स्थित अमित बरदियार छठ घाट के समीप छिलका डेम निर्माण का प्रस्ताव है। आगे दो-तीन और डेम बनाने का भी प्रावधान है।
इसके अलावा सिहोडीह पुल का निर्माण भी चुनाव के दौरान शिलान्यास के बाद अधूरा पड़ा है। इस पर भी अभियान ने सवाल उठाए हैं और आवश्यक हुआ तो आंदोलन करने की बात कही है।
प्रदूषण और पानी चोरी का आरोप
राजेश सिन्हा ने आरोप लगाया कि उसरी नदी को कुछ फैक्ट्रियां लगातार प्रदूषित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि बाला जी फैक्ट्री द्वारा रात में मोटर लगाकर नदी से पानी खींचने और दूसरे कारखाने को सप्लाई करने की बात सामने आई है।
“उसरी की धारा को रोकने और पानी चोरी पर रोक लगानी होगी। अगर सरकार ने कार्रवाई नहीं की तो संबंधित कार्यालय के सामने आंदोलन किया जाएगा।” – राजेश सिन्हा
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों द्वारा नदी किनारे अतिक्रमण किया जा रहा है, जिससे नदी की धारा प्रभावित हो रही है। इन सभी मामलों की जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
दस हजार पेड़ लगाने की योजना
संयोजक ने बताया कि उसरी नदी के किनारे दस हजार पेड़ लगाने की योजना है, जिसमें इस वर्ष चार हजार पौधे लगाए जाने का प्रस्ताव है। उनका कहना है कि यदि वृक्षारोपण और संरक्षण की दिशा में ठोस पहल होती है तो नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि जनता वर्तमान में नगर विकास मंत्री द्वारा किए गए सकारात्मक वादों का इंतजार कर रही है। यदि कार्य धरातल पर उतरा तो यह गिरिडीह के लिए बेहतर साबित होगा।
दस वर्षों से चल रहा अभियान
उसरी बचाव अभियान पिछले दस वर्षों से सक्रिय है। शुरुआत में यह जागरूकता अभियान के रूप में चला, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में हजारों प्रकृति प्रेमी इससे जुड़ गए हैं। अब यह अभियान न केवल गिरिडीह, बल्कि राज्य स्तर पर भी पहचाना जाने लगा है।
संयोजक का कहना है कि नदी केवल जलधारा नहीं, बल्कि गिरिडीह की जीवनरेखा है, जिसे बचाना सामूहिक जिम्मेदारी है।
न्यूज़ देखो: क्या उसरी को मिलेगा नया जीवन?
उसरी नदी को लेकर उठे सवाल प्रशासन के लिए गंभीर संकेत हैं। फंड की उपलब्धता के बावजूद काम में देरी, प्रदूषण और अतिक्रमण जैसे मुद्दे तत्काल समाधान की मांग करते हैं। यदि वादे जमीनी हकीकत में बदलते हैं तो यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम होगा। लेकिन यदि देरी जारी रही, तो जनांदोलन की स्थिति बन सकती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
नदी बचेगी तो भविष्य बचेगा
नदी केवल पानी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की धरोहर है। जल, जमीन और जंगल की रक्षा केवल नारों से नहीं, बल्कि जिम्मेदार कदमों से होती है।
समय आ गया है कि हम सभी अपने प्राकृतिक संसाधनों के प्रति सजग बनें और सवाल पूछें।
आप भी उसरी और अन्य जलस्रोतों की सुरक्षा के लिए अपनी भूमिका निभाएं।
अपनी राय कमेंट में दें, खबर को साझा करें और पर्यावरण संरक्षण की इस मुहिम को मजबूत बनाएं।


