
#लातेहार #वन_प्रशिक्षण : पीटीआर नॉर्थ के निर्देश पर बेतला में सोलर सिस्टम आधारित जलप्रबंधन कार्यशाला आयोजित हुई।
लातेहार जिले के बेतला में पीटीआर नॉर्थ के तत्वावधान में वनकर्मियों के लिए सोलर सिस्टम से जलप्रबंधन विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य वन क्षेत्रों में जल संसाधनों के संरक्षण और बेहतर उपयोग के लिए आधुनिक तकनीक की जानकारी देना था। विशेषज्ञों ने सौर पंप और जल वितरण प्रणाली के संचालन व रखरखाव पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। यह पहल वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
- बेतला स्थित एनआई सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन।
- पीटीआर नॉर्थ के डिप्टी डायरेक्टर पीके जेना के निर्देश पर कार्यक्रम।
- सोलर सिस्टम आधारित जलप्रबंधन पर वनकर्मियों को प्रशिक्षण।
- आईसीआईसीआई फाउंडेशन से प्रशिक्षक उमेश कुमार ने दी तकनीकी जानकारी।
- प्रशिक्षण से ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा।
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत बेतला में वन क्षेत्रों के जल संसाधन प्रबंधन को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। पीटीआर नॉर्थ के डिप्टी डायरेक्टर पीके जेना के निर्देश पर मंगलवार को बेतला स्थित एनआई सभागार में सोलर सिस्टम से जलप्रबंधन विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में पीटीआर के विभिन्न रेंज और बीटों से आए वनकर्मियों ने भाग लिया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य वन क्षेत्रों में जल की उपलब्धता सुनिश्चित करना, पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करना और पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा देना था। जल संकट और जलवायु परिवर्तन के वर्तमान परिदृश्य में सौर ऊर्जा आधारित जलप्रबंधन को एक प्रभावी समाधान के रूप में प्रस्तुत किया गया।
सोलर सिस्टम से जलप्रबंधन पर विस्तृत प्रशिक्षण
कार्यशाला में प्रशिक्षक उमेश कुमार (रिनेवा, आईसीआईसीआई फाउंडेशन, मुंबई) ने वनकर्मियों को सोलर सिस्टम के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया। उन्होंने सोलर पंप की संरचना, उसकी कार्यप्रणाली, जल भंडारण की व्यवस्था, वितरण प्रणाली और नियमित रखरखाव की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।
प्रशिक्षक ने बताया कि सोलर पंप के माध्यम से दूरस्थ वन क्षेत्रों में बिना डीजल या बिजली पर निर्भर हुए जल आपूर्ति संभव है। इससे न केवल संचालन लागत में कमी आती है, बल्कि पर्यावरण पर पड़ने वाला नकारात्मक प्रभाव भी कम होता है। प्रशिक्षण के दौरान सामान्य तकनीकी गड़बड़ियों और उनके समाधान पर भी व्यावहारिक जानकारी दी गई, ताकि वनकर्मी फील्ड में स्वयं समस्या का समाधान कर सकें।
प्रशिक्षक उमेश कुमार ने कहा: “सोलर आधारित जलप्रबंधन वन क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक और टिकाऊ समाधान है, जिससे ईंधन की बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलेगा।”
वन्यजीव संरक्षण में सोलर तकनीक की भूमिका
इस अवसर पर बेतला रेंजर उमेश कुमार दुबे ने कहा कि सोलर सिस्टम आधारित जलप्रबंधन से वनकर्मियों के दैनिक कार्यों में काफी सहूलियत होगी। उन्होंने बताया कि गर्मी के मौसम में वन्यजीवों के लिए जल की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती होती है, जिसे सोलर पंप के माध्यम से काफी हद तक दूर किया जा सकता है।
बेतला रेंजर उमेश कुमार दुबे ने कहा: “सोलर सिस्टम से न केवल मानव संसाधनों को सुविधा मिलेगी, बल्कि जंगल के भीतर वन्यजीवों के लिए नियमित जल आपूर्ति भी सुनिश्चित की जा सकेगी।”
उन्होंने यह भी कहा कि सौर ऊर्जा आधारित प्रणालियां दीर्घकालिक दृष्टि से वन प्रबंधन को अधिक आत्मनिर्भर और प्रभावी बनाएंगी।
वनकर्मियों की सक्रिय सहभागिता
कार्यशाला में बड़ी संख्या में वनकर्मियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और प्रशिक्षण के दौरान पूछे गए सवालों के माध्यम से अपनी जिज्ञासाएं रखीं। कार्यक्रम में वनपाल संतोष सिंह, नंदलाल साहू, वनरक्षी देवपाल भगत, गुलशन सुरीन, निरंजन कुमार, धीरज कुमार, संजीव शर्मा, सुभाष कुमार सहित कई वनकर्मी उपस्थित थे।
सभी प्रतिभागियों ने सोलर सिस्टम आधारित जलप्रबंधन को वन क्षेत्रों के लिए उपयोगी बताते हुए इसे अपने कार्यक्षेत्र में लागू करने की प्रतिबद्धता जताई।
जल संरक्षण और सतत विकास की दिशा में कदम
वन क्षेत्रों में जल स्रोतों का संरक्षण केवल मानव उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वन्यजीवों और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम वन विभाग को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सोलर आधारित जलप्रबंधन को व्यापक स्तर पर अपनाया जाए, तो इससे जंगलों में जल संकट की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है और वन संरक्षण के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी।

न्यूज़ देखो: हरित तकनीक से सशक्त होता वन प्रबंधन
बेतला में आयोजित यह कार्यशाला दर्शाती है कि वन प्रबंधन अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को अपना रहा है। सोलर सिस्टम आधारित जलप्रबंधन न केवल संसाधनों की बचत करेगा, बल्कि वन्यजीव संरक्षण को भी मजबूती देगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले समय में इस तकनीक को कितने व्यापक स्तर पर लागू किया जाता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
प्रकृति संरक्षण में तकनीक की भागीदारी
वन और जल संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की साझा जिम्मेदारी है। आधुनिक तकनीक के सही उपयोग से हम प्रकृति के साथ संतुलन बना सकते हैं। इस सकारात्मक पहल को साझा करें, अपनी राय कमेंट में दें और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने में सहभागी बनें।





