
#बानो #नववर्ष_परंपरा : जलडेगा गांव में देशसेवा से लौटे जवान का सम्मान समारोह आयोजित हुआ।
सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड अंतर्गत जलडेगा गांव में नए वर्ष के अवसर पर एक नई सामाजिक परंपरा की शुरुआत की गई। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस में 38 वर्षों तक सेवा देने के बाद सेवानिवृत्त हुए जवान संतु सिंह के गांव लौटने पर भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया गया। ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ उनका नागरिक अभिनंदन किया। यह आयोजन देशसेवा के प्रति सम्मान और युवाओं में राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
- जलडेगा गांव में नए वर्ष पर नई सामाजिक परंपरा की शुरुआत।
- आईटीबीपी से सेवानिवृत्त जवान संतु सिंह का पारंपरिक स्वागत।
- 38 वर्षों तक भारत-तिब्बत सीमा पुलिस में देश सेवा।
- स्वागत समारोह का नेतृत्व भाजपा मंडल महामंत्री फ़िरू बड़ाइक ने किया।
- ग्रामीणों ने जवान के स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की।
नए वर्ष के मौके पर सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड अंतर्गत जलडेगा गांव में एक प्रेरणादायी और भावनात्मक दृश्य देखने को मिला। लंबे समय तक देश की सीमाओं की रक्षा कर सेवानिवृत्त होकर गांव लौटे एक जवान के सम्मान में पूरे गांव ने एकजुट होकर स्वागत समारोह का आयोजन किया। यह आयोजन न केवल एक व्यक्ति के सम्मान का प्रतीक बना, बल्कि समाज में देशभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा के मूल्यों को भी उजागर करता दिखा।
38 वर्षों की सेवा के बाद गांव वापसी
जलडेगा ग्राम निवासी संतु सिंह, पिता स्वर्गीय भुनेश्वर सिंह, ने 38 वर्षों तक भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में अपनी सेवाएं दीं। दुर्गम सीमाई क्षेत्रों में तैनाती के दौरान उन्होंने देश की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाई। सेवा से सेवानिवृत्त होकर जब वे अपने पैतृक गांव जलडेगा पहुंचे, तो ग्रामीणों ने इसे गर्व और सम्मान के क्षण के रूप में मनाया।
ढोल-नगाड़ों के साथ पारंपरिक स्वागत
गांव में जवान के आगमन पर ढोल-नगाड़ों, पारंपरिक वेशभूषा और रीति-रिवाजों के साथ भव्य स्वागत किया गया। ग्रामीणों ने फूल-मालाओं से उनका अभिनंदन किया और पूरे गांव में उत्सव का माहौल देखने को मिला। यह दृश्य नए वर्ष की शुरुआत को और अधिक भावनात्मक और प्रेरक बना गया।
स्वागत समारोह का नेतृत्व और आयोजन
इस सम्मान समारोह का नेतृत्व भाजपा मंडल महामंत्री सह समाजसेवी फ़िरू बड़ाइक ने किया। उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर आयोजन को सफल बनाया। समारोह के दौरान सेवानिवृत्त जवान को शॉल और सम्मान प्रतीक भेंट कर उनका अभिनंदन किया गया।
फ़िरू बड़ाइक ने कहा:
“देश की रक्षा में जीवन का बड़ा हिस्सा समर्पित करने वाले जवानों का सम्मान करना समाज का नैतिक दायित्व है। इससे आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरणा मिलती है।”
ग्रामीणों की भावना और सामूहिक संकल्प
कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि देश की सेवा कर लौटे जवानों का सम्मान करना पूरे गांव और समाज के लिए गौरव की बात है। उन्होंने नए वर्ष के अवसर पर यह संकल्प लिया कि भविष्य में भी इस प्रकार के सम्मान समारोह आयोजित किए जाएंगे, ताकि युवाओं में देशसेवा और अनुशासन की भावना और मजबूत हो सके।
ग्रामीणों का मानना है कि जब गांव स्तर पर ऐसे आयोजनों को महत्व दिया जाता है, तो यह युवाओं को सकारात्मक दिशा देता है और राष्ट्र निर्माण में उनकी भागीदारी को प्रोत्साहित करता है।
बड़ी संख्या में ग्रामीण और समाजसेवी रहे मौजूद
इस अवसर पर गांव के बड़ी संख्या में ग्रामीण, स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं समाजसेवी उपस्थित रहे। सभी ने सेवानिवृत्त जवान को शुभकामनाएं दीं और उनके अनुभवों को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया। समारोह सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ और नए वर्ष की शुरुआत को यादगार बना गया।
न्यूज़ देखो: जब गांव बनता है राष्ट्रभक्ति का मंच
जलडेगा गांव का यह आयोजन बताता है कि देशभक्ति केवल बड़े मंचों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव-गांव में उसका जीवंत रूप दिखाई देता है। सेवानिवृत्त जवानों का सम्मान कर समाज यह संदेश देता है कि देश सेवा कभी भुलाई नहीं जाती। ऐसे आयोजन प्रशासन और समाज दोनों के लिए प्रेरक उदाहरण हैं, जिन्हें अन्य गांवों में भी अपनाया जाना चाहिए। सवाल यह है कि क्या इस तरह की परंपराएं व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित की जाएंगी, ताकि राष्ट्रभक्ति जन-आंदोलन का रूप ले सके। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा, समाज के लिए संदेश
नए वर्ष की यह शुरुआत केवल एक समारोह नहीं, बल्कि एक विचार है।
यह विचार है सम्मान, कर्तव्य और राष्ट्रभक्ति का।
जब गांव अपने नायकों को पहचानता है, तभी मजबूत समाज का निर्माण होता है।
ऐसी परंपराएं युवाओं को सही दिशा देती हैं और देश के प्रति जिम्मेदारी का भाव जगाती हैं।





