गढ़वा में नीलगायों ने बढ़ाया किसानों का संकट, फसल बचाने को दिन-रात पहरा देने को मजबूर

गढ़वा में नीलगायों ने बढ़ाया किसानों का संकट, फसल बचाने को दिन-रात पहरा देने को मजबूर

author News देखो Team
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#गढ़वा #नीलगाय_आतंक – खेती छोड़ने को मजबूर हो रहे किसान, वन विभाग कर रहा ट्रांसलोकेशन की तैयारी

  • गढ़वा जिले के कई प्रखंडों में नीलगायों का आतंक, खेती चौपट कर रहे हैं झुंड
  • सिचाई की सुविधा नहीं, ऊपर से नीलगायों के डर से किसान खेती से विमुख
  • किसान रातभर जागकर खेतों की रखवाली करने को मजबूर
  • वन विभाग ने 1000 नीलगायों को पकड़कर दूसरी जगह भेजने की प्रक्रिया शुरू की
  • गढ़वा उत्तरी वन प्रमंडल डीएफओ ने किया पत्राचार, केज और देसी तकनीकों से पकड़ने की योजना
  • किसानों को फसल नुकसान का मुआवजा देने की कवायद भी शुरू

नीलगायों के उत्पात से बेहाल किसान, खेती बन चुकी है चुनौती

गढ़वा जिले के कांडी, बरडीहा, विशुनपुरा और भवनाथपुर जैसे प्रखंडों में किसानों के सामने नीलगायों का संकट विकराल रूप ले चुका है। पहले ही सिचाई की व्यवस्था नहीं होने के कारण वर्षा आधारित खेती करने वाले किसान हर साल संघर्ष करते हैं, लेकिन अब नीलगायों का उत्पात उनके लिए दूसरी बड़ी आपदा बन गया है।

किसानों का कहना है कि जब वे किसी तरह थोड़ी बहुत खेती कर भी लेते हैं, तो उसे भी नीलगायों का झुंड रौंद देता है।

“अब तो खेती से मन ही उचट गया है, दिन-रात खेतों की रखवाली करते-करते थक गए हैं।”
रामकुमार यादव, किसान, कर्णपुरा गांव

रोशनी, घेराबंदी और पहरेदारी: नीलगायों से बचाव की जद्दोजहद

विशुनपुरा प्रखंड के कर्णपुरा गांव में सब्जी की खेती करने वाले दर्जनों किसानों को अब खेती से ज्यादा चिंता उसे नीलगायों से बचाने की है। वे बल्ब जलाकर खेतों के चारों ओर प्रकाश का इंतज़ाम करते हैं, जिससे जानवर डरकर न आएं।

साथ ही बांस की बाड़, मचान पर बैठकर निगरानी, और लोकल तकनीकों का प्रयोग कर फसल की सुरक्षा की जा रही है, लेकिन यह सब अस्थायी समाधान साबित हो रहे हैं।

वन विभाग की नई योजना: ट्रांसलोकेशन से समाधान की उम्मीद

गढ़वा उत्तरी वन प्रमंडल के डीएफओ के अनुसार, विभाग नीलगायों की समस्या को गंभीरता से ले रहा है। गढ़वा और पलामू क्षेत्र में लगभग 1000 नीलगायों को दूसरे सुरक्षित क्षेत्रों में शिफ्ट करने की योजना पर काम शुरू हो चुका है।

इस कार्य के लिए उच्च अधिकारियों को पत्राचार किया गया है और देशी तकनीकों व केज की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है। डीएफओ ने यह भी आश्वासन दिया कि किसानों को नुकसान का मुआवजा देने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।

“हमारी प्राथमिकता है कि किसानों की फसल सुरक्षित रहे और वन्य प्राणी भी अपने पर्यावरण में सुरक्षित रहें।”
वन प्रमंडल पदाधिकारी, गढ़वा उत्तर

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