निर्वाचन आयोग का बड़ा फैसला, अब देशभर में मतदाता पहचान पत्र से जुड़ेगी आधार पहचान

बैठक में लिया गया बड़ा निर्णय

चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त डॉ. एसएस संधू और डॉ. विवेक जोशी की उपस्थिति में कल निर्वाचन सदन, नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में केंद्रीय गृह सचिव, विधायी विभाग के सचिव, MeitY के सचिव, और यूआईडीएआई के सीईओ शामिल रहे।

गड़बड़ियों से निपटने के लिए आधार लिंक अनिवार्य

मतदाता पहचान पत्रों में गड़बड़ी के आरोपों से निपटने के लिए चुनाव आयोग ने देशभर के EPIC को आधार से जोड़ने का बड़ा फैसला लिया है। आयोग ने कहा कि इसे सुनिश्चित करने के लिए जल्द ही आयोग और UIDAI के तकनीकी विशेषज्ञ मिलकर काम शुरू करेंगे।

“आयोग के पास मौजूदा समय में 66 करोड़ से अधिक मतदाताओं के आधार उपलब्ध हैं, जिन्हें स्वैच्छिक रूप से मतदाताओं ने उपलब्ध कराया है। इनको EPIC से जोड़ने की प्रक्रिया अब तेज़ी से आगे बढ़ेगी।”

फर्जी नामों पर लगेगी लगाम

आयोग ने जानकारी दी कि आधार-EPIC लिंकिंग के लिए एक विशेष एप्लिकेशन तैयार किया गया है। इससे कोई डाटा साझा नहीं होगा, बल्कि मतदाताओं की प्रमाणिकता सुनिश्चित की जाएगी और फर्जी और डुप्लीकेट नामों की पहचान हो सकेगी।

“आधार से EPIC जुड़ने के बाद मतदाताओं को भी लाभ मिलेगा और अपने EPIC में पता या अन्य जानकारी बदलना आसान हो जाएगा।”

कानूनी आधार और संविधान का हवाला

आयोग ने बैठक में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 23(4), 23(5) और 23(6) के साथ-साथ अनुच्छेद 326 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि वोट देने का अधिकार केवल भारतीय नागरिक को मिल सकता है, और यह अधिकार आधार के माध्यम से ही प्रमाणित किया जा सकता है।

“लिंकिंग प्रक्रिया पूरी तरह संविधान के अनुच्छेद 326, RP Act 1950 और सुप्रीम कोर्ट के WP (सिविल) 177/2023 के आदेशों के अनुरूप ही होगी,” — पी. पवन, उप निदेशक

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क्या आधार से EPIC लिंक करने का यह कदम चुनावी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाएगा? क्या इससे फर्जी मतदाता सूची पर रोक लगेगी? इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए बने रहिए — हर खबर पर रहेगी हमारी नज़र — ‘न्यूज़ देखो’ के साथ।

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