ओडिशा सड़क हादसे में मौत के बाद चौधरीबांध पहुंचे प्रवासी मजदूर के शव से गांव में पसरा मातम

ओडिशा सड़क हादसे में मौत के बाद चौधरीबांध पहुंचे प्रवासी मजदूर के शव से गांव में पसरा मातम

author Surendra Verma
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#गिरिडीह #दुर्घटना : ओडिशा में सड़क हादसे में जान गंवाने वाले प्रवासी मजदूर का शव गांव पहुंचते ही माहौल गमगीन हुआ।

बगोदर थाना क्षेत्र के चौधरीबांध पंचायत अंतर्गत कोडाडीह गांव के प्रवासी मजदूर विनेश्वर यादव की ओडिशा के बालेश्वर में सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। बुधवार सुबह जब उनका शव पैतृक गांव पहुंचा, तो परिजनों के चीत्कार से पूरा गांव शोक में डूब गया। घटना की सूचना पर बगोदर विधायक नागेंद्र महतो मृतक के घर पहुंचे और परिजनों से मिलकर संवेदना व्यक्त की। यह घटना प्रवासी मजदूरों की असुरक्षित परिस्थितियों को एक बार फिर सामने लाती है।

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  • कोडाडीह गांव, चौधरीबांध पंचायत के प्रवासी मजदूर विनेश्वर यादव की सड़क हादसे में मौत।
  • ओडिशा के बालेश्वर में हुई दुर्घटना, बुधवार सुबह शव गांव पहुंचा।
  • शव पहुंचते ही परिजनों की चीत्कार, पूरे गांव में शोक का माहौल।
  • सूचना पर बगोदर विधायक नागेंद्र महतो ने मृतक के घर पहुंचकर दी सांत्वना।
  • परिजनों को ढांढ़स बंधाया, हरसंभव सहयोग का आश्वासन।

बगोदर थाना क्षेत्र के चौधरीबांध पंचायत स्थित कोडाडीह गांव में बुधवार की सुबह उस समय मातम छा गया, जब प्रवासी मजदूर विनेश्वर यादव का शव ओडिशा से उनके पैतृक गांव लाया गया। जैसे ही शव गांव की सीमा में पहुंचा, परिजन अपने आंसू रोक नहीं सके और उनकी चीत्कार से वातावरण गमगीन हो गया। गांव के लोग भी बड़ी संख्या में मृतक के घर पहुंचे और परिवार को ढांढ़स बंधाने का प्रयास किया।

ओडिशा में सड़क दुर्घटना में गई जान

मिली जानकारी के अनुसार विनेश्वर यादव रोज़गार की तलाश में ओडिशा गए हुए थे और बालेश्वर में काम कर रहे थे। बीते दिनों वे किसी काम से सड़क मार्ग से जा रहे थे, तभी एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। ओडिशा से शव को लाने की प्रक्रिया पूरी करने में भी परिजनों को कई औपचारिकताओं से गुजरना पड़ा।

शव के पहुंचते ही गांव में पसरा मातम

बुधवार सुबह जैसे ही शव कोडाडीह गांव पहुंचा, परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मां, पत्नी और अन्य परिजन शव से लिपटकर बिलखते नजर आए। गांव की महिलाएं और बुजुर्ग भी इस दुखद दृश्य को देखकर भावुक हो उठे। कुछ समय के लिए पूरा गांव शोक में डूब गया और सामान्य गतिविधियां थम सी गईं।

विधायक नागेंद्र महतो ने जताई संवेदना

घटना की जानकारी मिलने पर बगोदर विधायक नागेंद्र महतो बुधवार सुबह मृतक के घर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिजनों से मुलाकात कर शोक संवेदना व्यक्त की और इस कठिन समय में धैर्य बनाए रखने की अपील की। विधायक ने परिवार को ढांढ़स बंधाते हुए कहा कि वे इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़े हैं और हरसंभव सहयोग का प्रयास किया जाएगा। उनके साथ स्थानीय लोग और पंचायत से जुड़े कुछ प्रतिनिधि भी मौजूद थे।

प्रवासी मजदूरों की मजबूरी और जोखिम

विनेश्वर यादव की मौत केवल एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि यह प्रवासी मजदूरों की उस सच्चाई को भी उजागर करती है, जहां रोज़गार की तलाश में उन्हें अपने घर-परिवार से दूर रहकर जोखिम भरे हालात में काम करना पड़ता है। बेहतर रोजगार और स्थायी आमदनी की उम्मीद में लाखों मजदूर दूसरे राज्यों का रुख करते हैं, लेकिन सड़क सुरक्षा, कार्यस्थल की असुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी उनके जीवन को लगातार खतरे में डालती रहती है।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

मृतक के परिजनों के अनुसार, विनेश्वर यादव परिवार के मुख्य कमाऊ सदस्य थे। उनकी असमय मौत से परिवार के सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है। गांव के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित परिवार को सरकारी सहायता और मुआवजा उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे इस मुश्किल दौर से उबर सकें। हालांकि इस संबंध में अभी किसी आधिकारिक सहायता की पुष्टि नहीं हुई है।

गांव में शोक और सहानुभूति

दिन भर गांव में लोगों का आना-जाना लगा रहा। हर कोई परिवार को सांत्वना देने की कोशिश कर रहा था। कुछ ग्रामीणों ने कहा कि विनेश्वर यादव मेहनती और मिलनसार व्यक्ति थे, जो परिवार की जिम्मेदारियों के लिए बाहर काम करने गए थे। उनकी मौत से पूरे गांव को गहरा आघात पहुंचा है।

न्यूज़ देखो: प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

यह घटना एक बार फिर प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और उनके लिए बेहतर व्यवस्थाओं की जरूरत को रेखांकित करती है। क्या रोजगार के लिए बाहर जाने वाले मजदूरों को पर्याप्त सुरक्षा और सहायता मिल पा रही है, यह एक गंभीर सवाल है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की संवेदना जरूरी है, लेकिन साथ ही ठोस नीतिगत कदम भी अपेक्षित हैं। पीड़ित परिवार को समय पर सहायता मिले, यह प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

पीड़ा से सबक लेकर जिम्मेदारी निभाने का समय

एक व्यक्ति की मौत पूरे परिवार और गांव को झकझोर देती है। ऐसे हादसे हमें यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि समाज और व्यवस्था के रूप में हम कितना सुरक्षित वातावरण दे पा रहे हैं। प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा, सड़क सुरक्षा और त्वरित सहायता तंत्र पर गंभीरता से काम होना चाहिए।
आप भी इस खबर पर अपनी संवेदना और राय साझा करें। इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं ताकि ऐसी घटनाओं पर जागरूकता बढ़े और जिम्मेदारी तय हो सके।

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Written by

डुमरी, गिरिडीह

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