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बसंत पंचमी पर नवाटोली में सजा नागपुरी रंगमंच, लोककला और सामाजिक एकता का दिखा जीवंत स्वरूप

#कोलेबिरा #बसंतपंचमीउत्सव : नागपुरी गीत नृत्य और लोकसंस्कृति के संगम ने गांव को उत्सवमय बनाया।

बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर कोलेबिरा प्रखंड के नवाटोली गांव में रंगारंग नागपुरी सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुति और ग्रामीण सहभागिता ने आयोजन को खास बना दिया। कार्यक्रम का उद्घाटन जनप्रतिनिधियों द्वारा किया गया, जिसमें सामाजिक एकता और सांस्कृतिक संरक्षण का संदेश दिया गया। यह आयोजन गांव की लोककला, परंपरा और सामूहिक सहभागिता को मजबूती देने वाला साबित हुआ।

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  • नवाटोली गांव, कोलेबिरा प्रखंड में बसंत पंचमी पर भव्य नागपुरी सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित।
  • रुपेश बड़ाईक की भक्ति वंदना से कार्यक्रम की हुई प्रभावशाली शुरुआत।
  • वंशिका रजक, सुहाना देवी, लक्ष्मण सिंह, महादेव विश्वकर्मा, लालधन नायक ने दी यादगार गायन प्रस्तुति।
  • डांसर सारिका नायक के नृत्य ने दर्शकों को झूमने पर किया मजबूर।
  • कार्यक्रम का उद्घाटन भाजपा प्रखंड अध्यक्ष अशोक इंदवार एवं कार्यकारी अध्यक्ष राजेश सोनी ने किया।

बसंत पंचमी के पावन अवसर पर कोलेबिरा प्रखंड के नवाटोली गांव में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम ने पूरे क्षेत्र को उत्सव के रंग में रंग दिया। इस मौके पर नागपुरी लोकगीत, नृत्य और भक्ति संगीत की शानदार प्रस्तुतियां देखने को मिलीं। ग्रामीणों की बड़ी संख्या में उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि आज भी गांवों में लोकसंस्कृति के प्रति गहरी आस्था और जुड़ाव बना हुआ है। कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल मनोरंजन था, बल्कि सामाजिक सद्भाव, एकता और पारंपरिक कला के संरक्षण का संदेश देना भी रहा।

भक्ति वंदना से हुआ सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ

सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत प्रसिद्ध नागपुरी गायक रुपेश बड़ाईक की भक्ति वंदना से हुई। उनकी सुमधुर आवाज़ और भावपूर्ण प्रस्तुति ने कार्यक्रम स्थल पर आध्यात्मिक वातावरण बना दिया। भक्ति गीत के माध्यम से उन्होंने मां सरस्वती और बसंत पंचमी के महत्व को रेखांकित किया, जिसे दर्शकों ने तालियों के साथ सराहा। यह शुरुआत पूरे कार्यक्रम के लिए एक मजबूत और प्रभावशाली आधार साबित हुई।

नागपुरी गीतों ने बांधा समा

भक्ति वंदना के बाद नागपुरी लोकगीतों की श्रृंखला शुरू हुई, जिसमें वंशिका रजक, सुहाना देवी, लक्ष्मण सिंह, महादेव विश्वकर्मा और लालधन नायक ने एक से बढ़कर एक गीत प्रस्तुत किए। इन कलाकारों ने पारंपरिक नागपुरी धुनों के साथ आधुनिक भावनाओं का सुंदर मिश्रण प्रस्तुत किया। गीतों में प्रेम, प्रकृति, बसंत ऋतु और ग्रामीण जीवन की झलक साफ दिखाई दी। हर प्रस्तुति पर दर्शकों की तालियां और उत्साह कलाकारों का हौसला बढ़ाता नजर आया।

नृत्य प्रस्तुति ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

कार्यक्रम के दौरान डांसर सारिका नायक की नृत्य प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रही। पारंपरिक नागपुरी नृत्य शैली में किए गए उनके नृत्य ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उनकी भाव-भंगिमा, तालमेल और मंच पर आत्मविश्वास ने यह साबित कर दिया कि ग्रामीण प्रतिभाएं किसी भी मंच पर अपनी पहचान बना सकती हैं। नृत्य के दौरान दर्शकों की भागीदारी ने पूरे माहौल को जीवंत और उल्लासपूर्ण बना दिया।

फीता काटकर कार्यक्रम का किया गया उद्घाटन

कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन भाजपा प्रखंड अध्यक्ष कोलेबिरा अशोक इंदवार एवं कार्यक्रम के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश सोनी द्वारा संयुक्त रूप से फीता काटकर किया गया। उद्घाटन के बाद अपने संबोधन में अतिथियों ने बसंत पंचमी और जतरा मेला जैसे आयोजनों के सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला।

अशोक इंदवार ने कहा:

“जतरा मेला और ऐसे सांस्कृतिक आयोजन गांव में सामाजिक सद्भाव और एकता का संदेश देते हैं। गांव की कला और संस्कृति ही समाज और देश की आत्मा होती है।”

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उन्होंने आगे कहा कि इस तरह के आयोजन से न केवल मनोरंजन होता है, बल्कि युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर भी मिलता है। राजेश सोनी ने भी आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि गांव की एकजुटता और परंपराओं का संरक्षण ऐसे आयोजनों से ही संभव है।

पूजा समिति और ग्रामीणों की अहम भूमिका

इस सफल आयोजन के पीछे पूजा समिति और स्थानीय ग्रामीणों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। पूजा समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश दास, सचिव प्रेमकांत कुमार नायक और संरक्षक कृष्णा दास ने आयोजन की जिम्मेदारी को बखूबी निभाया। इसके साथ ही दिलेश्वर सिंह, जनेश्वर बिल्हौर, पारस नाथ सिंह, विक्रांत गोस्वामी, विवेक गोस्वामी, भूपेंद्र प्रसाद सिंह, सतेंद्र शर्मा, श्रीमन नारायण मिश्रा, दिनेश दास, रमेश सिंह, गणेश सिंह, अम्बेश्वर सिंह, अभिजीत साहू, विजय कुमार साहू, सुरेश लोहरा, सुरेश टोप्पो, सुरेंद्र लोहरा, संजय दास और राधेश्याम दास ने भी कार्यक्रम को सफल बनाने में महती भूमिका निभाई।

ग्रामीणों के सहयोग, व्यवस्थाओं और अनुशासन ने यह स्पष्ट कर दिया कि सामूहिक प्रयास से बड़े आयोजन भी सफलतापूर्वक किए जा सकते हैं।

मंच संचालन और आयोजन की व्यवस्था

कार्यक्रम का संचालन आश्रित इंदवार ने किया। उनके सधे हुए संचालन ने कार्यक्रम को व्यवस्थित और रोचक बनाए रखा। कलाकारों का परिचय, अतिथियों का स्वागत और कार्यक्रम की कड़ियों को जोड़ने में उनकी भूमिका सराहनीय रही। मंच, ध्वनि व्यवस्था और दर्शकों की बैठने की सुविधा भी स्थानीय स्तर पर बेहतर ढंग से की गई थी।

न्यूज़ देखो: लोकसंस्कृति से मजबूत होती सामाजिक एकता

नवाटोली में आयोजित यह नागपुरी सांस्कृतिक कार्यक्रम यह दर्शाता है कि गांवों में आज भी लोककला और परंपराओं के प्रति गहरी संवेदनशीलता मौजूद है। ऐसे आयोजन न केवल सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखते हैं, बल्कि समाज में आपसी भाईचारे और एकता को भी मजबूत करते हैं। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से यह संदेश जाता है कि लोकसंस्कृति को संरक्षण देना सामूहिक जिम्मेदारी है। आगे भी ऐसे आयोजनों को प्रोत्साहन मिलना जरूरी है ताकि ग्रामीण प्रतिभाओं को उचित मंच मिल सके। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

संस्कृति से जुड़ाव ही विकास की असली पहचान

बसंत पंचमी जैसे पर्व हमें प्रकृति, कला और ज्ञान से जुड़ने की प्रेरणा देते हैं। नवाटोली का यह आयोजन बताता है कि जब गांव एकजुट होकर अपनी संस्कृति को संजोते हैं, तो सामाजिक मजबूती अपने आप बनती है। ऐसे आयोजनों से युवा पीढ़ी को अपनी परंपराओं को समझने और आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है।

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Birendra Tiwari

सिमडेगा

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