महाशिवरात्रि पर कैलाश धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब हर हर महादेव के जयघोष से गूंजा ठेठईटांगर क्षेत्र

महाशिवरात्रि पर कैलाश धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब हर हर महादेव के जयघोष से गूंजा ठेठईटांगर क्षेत्र

author Satyam Kumar Keshri
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#ठेठईटांगर #महाशिवरात्रि : कोरोमियाँ पंचायत स्थित कैलाश धाम परिसर में तड़के सुबह से उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, जलाभिषेक और भजन कीर्तन से भक्तिमय हुआ पूरा इलाका।

सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर प्रखंड अंतर्गत कोरोमियाँ पंचायत स्थित कैलाश धाम में महाशिवरात्रि के अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। तड़के सुबह से ही जलाभिषेक के लिए लंबी कतारें लगी रहीं। भजन कीर्तन, शिव मंत्रोच्चार और हर हर महादेव के जयघोष से पूरा क्षेत्र शिवमय हो उठा।

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  • कैलाश धाम, कोरोमियाँ पंचायत में तड़के सुबह से लगी श्रद्धालुओं की लंबी कतारें।
  • विधि-विधान से किया गया भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना।
  • पूरे परिसर में गूंजे हर हर महादेव के जयघोष और शिव मंत्र।
  • पुजारी सुखदेव सिंह ने श्रद्धालुओं को बताया महाशिवरात्रि का महत्व।
  • सेवा समितियों द्वारा पेयजल व महाप्रसाद की समुचित व्यवस्था।

सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर प्रखंड में इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। कोरोमियाँ पंचायत स्थित कैलाश धाम परिसर में तड़के सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं। ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ दूर-दराज के गांवों और पड़ोसी जिलों से भी बड़ी संख्या में भक्त भगवान शिव के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे। पूरे दिन मंदिर परिसर भक्तों की आस्था से सराबोर रहा।

तड़के सुबह से शुरू हुआ जलाभिषेक

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने ब्रह्ममुहूर्त में पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया। भक्त अपने साथ गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प लेकर पहुंचे और विधि-विधान से पूजा संपन्न की। शिवलिंग पर जल और दूध अर्पित कर श्रद्धालुओं ने सुख-शांति, समृद्धि और परिवार की मंगलकामना की।

मंदिर परिसर में व्यवस्था सुचारु बनाए रखने के लिए स्थानीय स्वयंसेवक भी सक्रिय रहे। कतारबद्ध तरीके से श्रद्धालुओं को दर्शन कराया गया ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।

भजन कीर्तन से भक्तिमय बना वातावरण

कैलाश धाम परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजे मंदिर ने श्रद्धालुओं को विशेष आकर्षण दिया। पूरे दिन भजन-कीर्तन और शिव मंत्रों का उच्चारण होता रहा। ढोल-नगाड़ों और शंखध्वनि के बीच “हर हर महादेव” के जयघोष से पूरा ठेठईटांगर क्षेत्र गूंज उठा।

श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर देखा गया। महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे सभी शिव भक्ति में लीन नजर आए। कई भक्तों ने व्रत रखकर रात्रि जागरण भी किया।

पुजारी सुखदेव सिंह ने बताया महाशिवरात्रि का महत्व

मौके पर कैलाश धाम के पुजारी सुखदेव सिंह उपस्थित रहे और उन्होंने श्रद्धालुओं को विधि-विधान से पूजा-अर्चना कराई। उन्होंने महाशिवरात्रि के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा:

“महाशिवरात्रि का दिन भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक है। इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।”

उन्होंने श्रद्धालुओं से संयम, सदाचार और भक्ति भावना के साथ जीवन जीने का संदेश भी दिया।

दूरदराज से पहुंचे श्रद्धालु

कैलाश धाम की प्रसिद्धि के कारण आसपास के गांवों के अलावा पड़ोसी जिलों से भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचे। कई परिवार सुबह से ही मंदिर परिसर में मौजूद रहे। श्रद्धालुओं ने बताया कि वे हर वर्ष यहां आकर महाशिवरात्रि का व्रत और पूजा संपन्न करते हैं।

स्थानीय दुकानदारों द्वारा पूजा सामग्री की दुकानें सजाई गई थीं, जिससे पूरे क्षेत्र में मेला जैसा दृश्य बना रहा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी इस अवसर पर गति मिली।

सेवा समितियों की सराहनीय पहल

श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्थानीय सेवा समितियों ने पेयजल, विश्राम स्थल और महाप्रसाद की व्यवस्था की थी। स्वयंसेवकों ने अनुशासन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शांतिपूर्ण और उत्साहपूर्ण वातावरण में पूरा कार्यक्रम संपन्न हुआ।

प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखी गई ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

न्यूज़ देखो: आस्था से जुड़ता समाज

महाशिवरात्रि जैसे पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सामूहिक सहभागिता का भी प्रतीक होते हैं। कैलाश धाम में उमड़ी भीड़ यह दर्शाती है कि ग्रामीण अंचलों में आज भी परंपराएं और आस्था जीवंत हैं। ऐसे आयोजन सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

आस्था के साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी जरूरी

पर्व और त्योहार हमें एकजुट रहने की प्रेरणा देते हैं।
भक्ति के साथ स्वच्छता और अनुशासन का पालन भी आवश्यक है।
स्थानीय मंदिरों और धार्मिक स्थलों की देखरेख में सामूहिक भागीदारी बढ़ाएं।
युवाओं को परंपराओं से जोड़कर सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाएं।

यदि आप भी महाशिवरात्रि के इस आयोजन में शामिल हुए, तो अपने अनुभव हमारे साथ साझा करें। खबर को शेयर करें और अपनी राय कमेंट में जरूर दें।

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सिमडेगा नगर क्षेत्र

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