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मकर संक्रांति पर केचकी संगम में उमड़ेगी आस्था, राजा मेदिनीराय स्मृति मेले को लेकर पूरी हुई तैयारी

#लातेहार #मकर_संक्रांति : केचकी संगम में पवित्र स्नान और दो दिवसीय ऐतिहासिक मेले का आयोजन।

लातेहार जिले के बरवाडीह क्षेत्र स्थित केचकी संगम में मकर संक्रांति के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने की संभावना है। 14 और 15 जनवरी को आयोजित होने वाले राजा मेदिनीराय स्मृति मेले को लेकर आयोजन समिति और प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। हजारों श्रद्धालु पवित्र स्नान, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए संगम पहुंचेंगे। यह आयोजन आस्था, परंपरा और क्षेत्रीय संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।

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  • केचकी संगम में मकर संक्रांति पर पवित्र स्नान के लिए हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना।
  • राजा मेदिनीराय स्मृति मेला 14 और 15 जनवरी को दो दिवसीय आयोजन के रूप में आयोजित।
  • मेला आयोजन मेदिनी आजाद संघ, लातेहार द्वारा किया जा रहा है।
  • श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए वॉलेंटियर्स और पुलिस बल की तैनाती।
  • मेला परंपरा की शुरुआत वर्ष 1996 में की गई थी।

लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड स्थित केचकी संगम एक बार फिर मकर संक्रांति के पावन अवसर पर आस्था और श्रद्धा का केंद्र बनने जा रहा है। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे इस संगम स्थल पर कल तड़के सुबह से ही श्रद्धालु स्नान, दान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचेंगे। पवित्र स्नान के बाद श्रद्धालु संगम परिसर में आयोजित होने वाले ऐतिहासिक राजा मेदिनीराय स्मृति मेले में शामिल होकर धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का आनंद लेंगे। मकर संक्रांति और टुसू पर्व के संयुक्त उत्सव के कारण इस वर्ष भी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

केचकी संगम का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

केचकी संगम क्षेत्र लंबे समय से श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र रहा है। मकर संक्रांति के दिन यहां स्नान को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन संगम में स्नान करने से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। यही कारण है कि लातेहार, पलामू, गढ़वा सहित आसपास के जिलों से श्रद्धालु हर वर्ष यहां पहुंचते हैं। संगम स्थल पर दान-पुण्य, तिल-गुड़, चूड़ा-दही और तिलकुट का विशेष महत्व रहता है।

राजा मेदिनीराय स्मृति मेले की ऐतिहासिक परंपरा

राजा मेदिनीराय स्मृति मेला वर्ष 1996 से लगातार आयोजित किया जा रहा है। मेदिनी आजाद संघ के संगठन सचिव कुमरेश सिंह ने बताया कि एकीकृत बिहार के दौर में तत्कालीन आदिवासी नेता गंगेश्वर सिंह ने इस मेले की शुरुआत की थी। तब से यह मेला मकर संक्रांति के अवसर पर हर वर्ष आयोजित होता आ रहा है। समय के साथ यह आयोजन प्रमंडल स्तर का प्रमुख धार्मिक-सांस्कृतिक मेला बन गया है, जहां दूर-दराज से श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं।

आयोजन समिति की तैयारियां और सुरक्षा व्यवस्था

मेले को लेकर आयोजन समिति मेदिनी आजाद संघ, लातेहार ने सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। संघ के अध्यक्ष गुड्डू सिंह ने बताया कि मेला परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए पर्याप्त संख्या में वॉलेंटियर्स की तैनाती की गई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मेले के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था फैलाने या शांति भंग करने की कोशिश करने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और उन्हें सीधे पुलिस प्रशासन के हवाले किया जाएगा।
प्रशासनिक स्तर पर भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। स्थानीय प्रशासन द्वारा संगम क्षेत्र और मेला परिसर में पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि भीड़ नियंत्रण और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

पुजारियों ने बताया शुभ मुहूर्त

स्थानीय पुजारी श्यामनाथ पाठक, उमेश मिश्र, अर्जुन पांडेय, यशवंत पाठक और सुरेंद्र पाठक ने हिंदू पंचांग के हवाले से बताया कि मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त 15 जनवरी गुरुवार को है। हालांकि परंपरा के अनुसार बड़ी संख्या में श्रद्धालु 14 जनवरी से ही संगम स्नान और दान-पुण्य शुरू कर देते हैं। इसी कारण आज से ही संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ गई है।

टुसू पर्व और क्षेत्रीय परंपराएं

सघन आदिवासी बहुल क्षेत्रों में मकर संक्रांति को टुसू पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर पारंपरिक गीत-संगीत, लोकनृत्य और सांस्कृतिक गतिविधियां भी देखने को मिलती हैं। वहीं देश के अन्य हिस्सों में यह पर्व अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जैसे दक्षिण भारत में पोंगल। वैज्ञानिक दृष्टि से इस दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करता है, जिसे नई ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।

श्रद्धालुओं में उत्साह, प्रशासन सतर्क

मेले और संगम स्नान को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। स्थानीय दुकानदारों और ग्रामीणों के लिए भी यह मेला रोजगार और आर्थिक गतिविधियों का बड़ा अवसर लेकर आता है। प्रशासन और आयोजन समिति का दावा है कि सभी व्यवस्थाएं समय पर पूरी कर ली गई हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

न्यूज़ देखो: आस्था और परंपरा का जीवंत उदाहरण

केचकी संगम का मकर संक्रांति मेला यह दर्शाता है कि कैसे धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराएं समाज को जोड़ने का काम करती हैं। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा न सिर्फ धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देती है। ऐसे आयोजनों में सुरक्षा और व्यवस्था की जिम्मेदारी प्रशासन और समाज दोनों की होती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

आस्था के साथ जिम्मेदारी निभाएं

मकर संक्रांति का यह पर्व हमें परंपराओं के साथ अनुशासन और सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश देता है। श्रद्धालुओं से अपेक्षा है कि वे स्वच्छता, सुरक्षा और शांति बनाए रखें।
अपने अनुभव और विचार साझा करें, इस खबर को दूसरों तक पहुंचाएं और आस्था के इस महापर्व को सकारात्मक रूप से मनाने में सहयोग करें।

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Akram Ansari

बरवाडीह, लातेहार

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