News dekho specials
Garhwa

रामनवमी पर गढ़वा के मां भवानी अखाड़ा में परंपरा और सम्मान का संगम, पूर्व पार्षद सुरेंद्र प्रसाद कश्यप हुए सम्मानित

#गढ़वा #रामनवमी_आयोजन : मां भवानी अखाड़ा में सम्मान समारोह ने परंपरा और नई ऊर्जा का संदेश दिया।

गढ़वा शहर के रॉकी मोहल्ला स्थित मां भवानी अखाड़ा में रामनवमी के अवसर पर सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान वार्ड नंबर 15 के पूर्व पार्षद सुरेंद्र प्रसाद कश्यप को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और युवाओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। यह आयोजन सामाजिक एकता और सांस्कृतिक निरंतरता का प्रतीक बनकर उभरा।

Join News देखो WhatsApp Channel
  • गढ़वा के रॉकी मोहल्ला स्थित मां भवानी अखाड़ा में आयोजन सम्पन्न।
  • पूर्व पार्षद सुरेंद्र प्रसाद कश्यप को अंगवस्त्र देकर किया गया सम्मानित।
  • अखाड़ा की स्थापना 2011 से, अब तक 5 बार प्रथम पुरस्कार प्राप्त।
  • कार्यक्रम में वरिष्ठों के साथ युवा पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी रही।
  • अखाड़ा समिति ने 2026 पुनर्गठन के बाद नई दिशा तय करने का संदेश दिया।

गढ़वा शहर के रॉकी मोहल्ला स्थित मां भवानी अखाड़ा में रामनवमी के पावन अवसर पर एक भावनात्मक और प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान वार्ड नंबर 15 के पूर्व पार्षद सुरेंद्र प्रसाद कश्यप को सम्मानित कर उनके सामाजिक योगदान को सराहा गया। कार्यक्रम में परंपरा और आधुनिक सोच का सुंदर समन्वय देखने को मिला, जिसमें वरिष्ठों के अनुभव और युवाओं के उत्साह ने आयोजन को विशेष बना दिया।

परंपरा और गौरवशाली इतिहास का प्रतीक बना अखाड़ा

मां भवानी अखाड़ा पिछले कई वर्षों से रामनवमी के अवसर पर भव्य झांकियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए क्षेत्र में विशेष पहचान बनाए हुए है। वर्ष 2011 से लगातार यह अखाड़ा हर साल आकर्षक झांकियों के माध्यम से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता आ रहा है।

प्रतियोगिताओं में भी अखाड़ा का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा है, जहां इसे अब तक 5 बार प्रथम पुरस्कार और लगभग 10 बार द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। यही कारण है कि यह अखाड़ा अन्य समितियों के लिए भी प्रेरणा का केंद्र बना हुआ है।

2026 के पुनर्गठन के बाद नई सोच और दिशा

वर्ष 2026 में अखाड़ा समिति के पुनर्गठन के बाद यह स्पष्ट किया गया कि परंपरा को बनाए रखते हुए इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना प्राथमिक लक्ष्य होगा। इसी उद्देश्य के तहत इस वर्ष समाज के वरिष्ठ और सम्मानित व्यक्तियों को सम्मानित करने की पहल की गई।

समिति के सदस्यों ने कहा: “वरिष्ठों का सम्मान कर हम नई पीढ़ी को प्रेरणा देना चाहते हैं, ताकि हमारी परंपरा मजबूत बनी रहे।”

सम्मान समारोह में सुरेंद्र प्रसाद कश्यप का अभिनंदन

कार्यक्रम के दौरान जब पूर्व पार्षद सुरेंद्र प्रसाद कश्यप अखाड़ा परिसर पहुंचे, तो उनका भव्य स्वागत किया गया। उन्हें अंगवस्त्र और सम्मान चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनके योगदान को सराहा।

उपस्थित वक्ताओं ने कहा: “सुरेंद्र प्रसाद कश्यप का सामाजिक योगदान नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक है।”

News dekho specials

वरिष्ठ सदस्यों की मौजूदगी ने बढ़ाई गरिमा

इस अवसर पर अखाड़ा के कई पुराने और अनुभवी सदस्य भी उपस्थित रहे, जिन्होंने अपने अनुभव साझा किए। इनमें प्रमुख रूप से अमित कुमार कश्यप (पूर्व कोषाध्यक्ष), रघुवीर मधेशिया उर्फ मुनि (पूर्व अध्यक्ष), दिलीप सिंह उर्फ मुन्ना सिंह, रमेश कुमार टक्कन, जितेंद्र सिंह उर्फ छोटू, विभूति कश्यप और अविनाश कुमार (पूर्व कोषाध्यक्ष) शामिल रहे।

इन सभी ने अखाड़ा की पुरानी उपलब्धियों को याद करते हुए आने वाले समय के लिए सकारात्मक संदेश दिया।

युवाओं की भागीदारी बनी कार्यक्रम की खास पहचान

कार्यक्रम में युवा पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। शुभम गुप्ता उर्फ अपना शुभम, राहुल कश्यप, प्रिंस गुप्ता, पीयूष गुप्ता, प्रशांत कुमार, सत्यम कश्यप, शिवम कश्यप, सुमित मालाकार उर्फ चिंटू और सुजीत गुप्ता उर्फ लालो सहित कई युवाओं ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इसके अलावा संरक्षक उमेश रजक और बैजू सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भव्य बना दिया।

सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का संदेश

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि मां भवानी अखाड़ा केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एकता, सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक प्रयास का प्रतीक है।

वक्ताओं ने कहा: “वरिष्ठों के मार्गदर्शन और युवाओं की ऊर्जा के साथ यह अखाड़ा आने वाले वर्षों में नई ऊंचाइयों को छुएगा।”

यह आयोजन अतीत की उपलब्धियों को याद करने के साथ-साथ भविष्य की दिशा तय करने का माध्यम भी बना।

न्यूज़ देखो: परंपरा के साथ नई सोच की मिसाल

गढ़वा का यह आयोजन दिखाता है कि कैसे सांस्कृतिक मंच केवल धार्मिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समाज को जोड़ने और प्रेरित करने का माध्यम बनते हैं। मां भवानी अखाड़ा ने परंपरा और आधुनिक सोच का संतुलन स्थापित कर एक उदाहरण पेश किया है। ऐसे आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा और एकता का संदेश जाता है। आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह पहल अन्य क्षेत्रों में भी प्रेरणा बनती है या नहीं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

संस्कृति को संजोएं, समाज को जोड़ें

हमारी परंपराएं ही हमारी पहचान हैं और इन्हें जीवित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।
ऐसे आयोजन हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और समाज में एकता का संदेश देते हैं।
आइए, हम भी अपने क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ाने में योगदान दें।
वरिष्ठों का सम्मान करें और युवाओं को प्रेरित करें, यही सच्ची प्रगति का मार्ग है।

अगर आपको यह खबर प्रेरणादायक लगी हो तो अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें, खबर को अपने दोस्तों तक पहुंचाएं और समाज में सकारात्मक बदलाव का हिस्सा बनें।

📥 Download E-Paper

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 0 / 5. कुल वोट: 0

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!



IMG-20250723-WA0070
IMG-20251223-WA0009

नीचे दिए बटन पर क्लिक करके हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें


Related News

ये खबर आपको कैसी लगी, अपनी प्रतिक्रिया दें

Back to top button
🔔

Notification Preferences

error: