47वें झारखंड दिवस पर दुमका में शक्ति प्रदर्शन, जल-जंगल-जमीन के नारों से गूंजा गांधी मैदान

47वें झारखंड दिवस पर दुमका में शक्ति प्रदर्शन, जल-जंगल-जमीन के नारों से गूंजा गांधी मैदान

author Saroj Verma
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#दुमका #झारखंड_दिवस : हजारों कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में आदिवासी अधिकार और संगठन की ताकत का प्रदर्शन।

47वें झारखंड दिवस के अवसर पर दुमका के गांधी मैदान में भव्य समारोह का आयोजन किया गया, जहां बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक जुटे। जल-जंगल-जमीन के नारों के बीच हुए इस आयोजन को राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा गया। नेताओं ने आदिवासी अधिकार, सामाजिक एकता और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।

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  • दुमका गांधी मैदान में 47वें झारखंड दिवस का भव्य आयोजन।
  • हजारों कार्यकर्ता और समर्थक हुए शामिल।
  • दिशोम गुरू शिबू सोरेन की विचारधारा को आंदोलन की आत्मा बताया गया।
  • मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व को बताया गया मजबूत।
  • आदिवासी अधिकार और सामाजिक एकता पर जोर।
  • सिंचाई, शिक्षा, रोजगार को सरकार की प्राथमिकता बताया गया।

47वें झारखंड दिवस के मौके पर दुमका का गांधी मैदान राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन गया। सुबह से ही जिले के विभिन्न हिस्सों से कार्यकर्ता और समर्थक कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने लगे थे। पारंपरिक वेशभूषा, झंडे और नारों के साथ मैदान में उत्साह और जोश साफ नजर आ रहा था।

जल-जंगल-जमीन के नारों से गूंजा मैदान

समारोह के दौरान मंच से बार-बार जल-जंगल-जमीन के नारे गूंजते रहे। वक्ताओं ने कहा कि झारखंड राज्य का गठन केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं था, बल्कि यह आदिवासी समाज के अधिकार, पहचान और सम्मान की लड़ाई का परिणाम है। इसी संघर्ष की भावना को आगे बढ़ाना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।

दिशोम गुरू शिबू सोरेन की विचारधारा को बताया आधार

नेताओं ने दिशोम गुरू शिबू सोरेन की विचारधारा को झारखंड आंदोलन की आत्मा बताते हुए कहा कि उन्हीं के संघर्ष और नेतृत्व के कारण राज्य गठन का सपना साकार हुआ। वक्ताओं ने कहा कि शिबू सोरेन की सोच आज भी संगठन और सरकार दोनों को दिशा दे रही है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व पर भरोसा

समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा गया कि वर्तमान सरकार जनहित की योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। वक्ताओं ने दावा किया कि सरकार की नीतियों से आदिवासी, दलित, पिछड़े और कमजोर वर्गों को सीधा लाभ मिल रहा है।

संगठन की एकजुटता का प्रदर्शन

गांधी मैदान में उमड़ी भीड़ ने संगठन की ताकत और एकजुटता का संदेश दिया। नेताओं ने कहा कि यह भीड़ केवल संख्या नहीं, बल्कि झारखंड की जनता का भरोसा और समर्थन है। सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का आह्वान भी किया गया।

जनकल्याण योजनाओं पर रहा जोर

वक्ताओं ने सरकार की प्राथमिकताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सिंचाई, शिक्षा, रोजगार और जनकल्याण सरकार के मुख्य एजेंडे में शामिल हैं। ग्रामीण इलाकों में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और युवाओं को रोजगार से जोड़ना सरकार की लगातार कोशिश है।

आदिवासी अधिकारों की रक्षा का संकल्प

कार्यक्रम में यह भी स्पष्ट किया गया कि आदिवासी अधिकारों से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। जल-जंगल-जमीन की रक्षा, ग्राम सभा की भूमिका और परंपरागत अधिकारों को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।

उत्सव और संघर्ष का संगम

47वें झारखंड दिवस का यह आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि संघर्ष और संकल्प का प्रतीक बनकर उभरा। नेताओं ने कहा कि झारखंड दिवस हमें अपने इतिहास, बलिदान और जिम्मेदारियों की याद दिलाता है।

न्यूज़ देखो: झारखंड दिवस से सियासी संदेश

दुमका के गांधी मैदान में हुआ यह आयोजन साफ संकेत देता है कि झारखंड दिवस अब केवल सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक संदेश देने का मंच बन चुका है। जल-जंगल-जमीन के मुद्दे और आदिवासी अधिकार एक बार फिर केंद्र में हैं। सरकार और संगठन के दावों की कसौटी आने वाला समय तय करेगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

झारखंड के भविष्य के लिए एकजुटता का आह्वान

झारखंड दिवस हमें अपने राज्य और समाज के प्रति जिम्मेदारी का एहसास कराता है। विकास, अधिकार और एकता—तीनों का संतुलन ही मजबूत झारखंड की नींव है। सजग रहें, जागरूक बनें और राज्य के भविष्य को लेकर अपनी भूमिका निभाएं। अपनी राय कमेंट में साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और झारखंड की आवाज को मजबूत करें।

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Written by

दुमका/देवघर

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