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दिशोम गुरु शिबू सोरेन की जयंती पर फटका पंचायत में जरूरतमंदों के बीच कंबल वितरण, सेवा के माध्यम से दी गई श्रद्धांजलि

#तोरपा #सेवाकार्य : शीतलहर के बीच विधायक सुदीप गुड़िया ने जरूरतमंदों तक राहत पहुंचाई।

झारखंड आंदोलन के प्रणेता दिशोम गुरु शिबू सोरेन की जयंती पर तोरपा प्रखंड के फटका पंचायत में कंबल वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का नेतृत्व तोरपा विधायक सुदीप गुड़िया ने किया, जिसमें पंचायत के विभिन्न गांवों और टोलों के जरूरतमंद परिवारों को ठंड से बचाव के लिए कंबल वितरित किए गए। आयोजन का उद्देश्य शीतलहर के दौरान गरीब, बुजुर्ग और वंचित वर्ग को राहत पहुंचाना और दिशोम गुरु के सेवा व संघर्ष के विचारों को व्यवहार में उतारना रहा। कार्यक्रम में ग्रामीणों की व्यापक भागीदारी देखने को मिली, जिससे सामाजिक एकजुटता का संदेश भी सामने आया।

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  • दिशोम गुरु शिबू सोरेन की जयंती पर फटका पंचायत में सेवा कार्यक्रम का आयोजन।
  • तोरपा विधायक सुदीप गुड़िया के नेतृत्व में जरूरतमंदों के बीच कंबल वितरण।
  • बुजुर्गों, महिलाओं और गरीब परिवारों को ठंड से राहत पहुंचाने का प्रयास।
  • पंचायत प्रतिनिधि, स्थानीय कार्यकर्ता और ग्रामीणों की रही बड़ी उपस्थिति।
  • जल, जंगल और जमीन की रक्षा के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन।

झारखंड के महान आंदोलनकारी और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक दिशोम गुरु शिबू सोरेन की जयंती को इस वर्ष तोरपा प्रखंड के फटका पंचायत में सेवा और संवेदना के साथ मनाया गया। कड़ाके की ठंड के बीच आयोजित कंबल वितरण कार्यक्रम में विधायक सुदीप गुड़िया स्वयं गांव-गांव और टोलों तक पहुंचे। उन्होंने जरूरतमंद परिवारों को कंबल वितरित कर न केवल राहत पहुंचाई, बल्कि सामाजिक सरोकार के प्रति जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी का भी संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों में उत्साह और अपनापन देखने को मिला।

दिशोम गुरु की जयंती पर सेवा का संकल्प

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक सुदीप गुड़िया ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन के संघर्षपूर्ण जीवन को याद किया। उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु ने अपना पूरा जीवन आदिवासी, गरीब और वंचित समाज के अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया। उनके विचार आज भी सामाजिक न्याय और समानता की राह दिखाते हैं।
विधायक ने कहा:

सुदीप गुड़िया ने कहा: “दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी का जीवन संघर्ष, सेवा और समर्पण का प्रतीक है। उनकी जयंती को सेवा कार्यों के माध्यम से मनाना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल स्मरण या भाषण से नहीं, बल्कि जमीन पर उतरकर जरूरतमंदों की मदद करना ही सच्ची श्रद्धांजलि का मार्ग है।

ठंड के मौसम में राहत पहुंचाने की पहल

शीतलहर के इस दौर में ग्रामीण इलाकों में गरीब और बुजुर्ग वर्ग सबसे अधिक प्रभावित होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए फटका पंचायत के विभिन्न गांवों और टोलों का चयन किया गया। कंबल पाकर बुजुर्गों, महिलाओं और जरूरतमंद परिवारों के चेहरे पर राहत और खुशी साफ झलक रही थी।
विधायक ने कहा:

सुदीप गुड़िया ने कहा: “ठंड के इस मौसम में जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाना मानवीय कर्तव्य है। राज्य सरकार और जनप्रतिनिधि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं।”

इस पहल को ग्रामीणों ने न केवल राहत के रूप में देखा, बल्कि इसे सम्मान और संवेदना से जुड़ा कदम बताया।

ग्रामीणों की प्रतिक्रिया और सहभागिता

कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण, पंचायत प्रतिनिधि और स्थानीय कार्यकर्ता उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने विधायक द्वारा किए गए इस सेवा कार्य के लिए आभार व्यक्त किया। कई बुजुर्गों ने बताया कि ठंड के मौसम में इस प्रकार की सहायता उनके लिए अत्यंत उपयोगी साबित होती है।
ग्रामीणों का कहना था कि जनप्रतिनिधि जब सीधे गांव और टोलों तक पहुंचते हैं, तो भरोसा मजबूत होता है और योजनाओं का वास्तविक लाभ दिखाई देता है। इस अवसर पर महिलाओं और युवाओं की भी सक्रिय भागीदारी रही, जिसने कार्यक्रम को सामूहिक स्वरूप प्रदान किया।

जल, जंगल और जमीन की रक्षा का संदेश

कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन के मूल विचारों—जल, जंगल और जमीन की रक्षा—को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि आज भी आदिवासी समाज के अस्तित्व और अधिकार इन्हीं तीन स्तंभों से जुड़े हैं।
यह संकल्प केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि आने वाले समय में सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी निभाने का संदेश भी देता है। कार्यक्रम ने यह स्पष्ट किया कि सेवा, संघर्ष और संरक्षण की भावना को साथ लेकर ही समाज आगे बढ़ सकता है।

न्यूज़ देखो: सेवा के जरिए राजनीति का मानवीय चेहरा

यह कार्यक्रम दिखाता है कि जयंती जैसे अवसर केवल औपचारिक आयोजन न होकर सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का माध्यम भी बन सकते हैं। विधायक सुदीप गुड़िया द्वारा ठंड के मौसम में जरूरतमंदों तक सीधे पहुंचकर सहायता देना जनप्रतिनिधित्व की सकारात्मक मिसाल है। ऐसे प्रयास शासन और समाज के बीच भरोसे को मजबूत करते हैं और योजनाओं को जमीन से जोड़ते हैं। सवाल यह है कि क्या इस तरह की निरंतर पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक सुरक्षा का दायरा और व्यापक हो पाएगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सेवा से संकल्प तक, समाज के साथ खड़े रहने का समय

दिशोम गुरु शिबू सोरेन की जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम हमें याद दिलाता है कि सामाजिक परिवर्तन छोटे-छोटे मानवीय कदमों से शुरू होता है। ठंड से बचाव का एक कंबल किसी परिवार के लिए सुरक्षा और सम्मान दोनों का प्रतीक बन सकता है। जब जनप्रतिनिधि और समाज मिलकर जरूरतमंदों के साथ खड़े होते हैं, तभी सच्ची लोकतांत्रिक भावना मजबूत होती है।

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Shivnandan Baraik

बानो, सिमडेगा

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