#कोलेबिरा #विराटहिंदूसम्मेलन : शताब्दी वर्ष पर हजारों श्रद्धालु जुटे, सामूहिक पाठ हुआ।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर सिमडेगा जिले के कोलेबिरा प्रखंड स्टेडियम में विराट हिंदू महा सम्मेलन सह सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि हिंदू हृदय सम्राट भैरव सिंह एवं विशिष्ट अतिथियों ने भाग लिया। तीन हजार से अधिक सनातनी श्रद्धालु सम्मेलन में उपस्थित रहे। आयोजन के दौरान सामूहिक संकल्प, धार्मिक संबोधन और महाप्रसाद वितरण किया गया, जिससे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का वातावरण बना।
- कोलेबिरा स्टेडियम में आयोजित हुआ विराट हिंदू महा सम्मेलन।
- मुख्य अतिथि हिंदू हृदय सम्राट भैरव सिंह की उपस्थिति।
- विशिष्ट अतिथि जैन मुनि महाराज, विनोद पाहन, आचार्य शिवपति मिश्र, कौशल सिंह देव शामिल।
- करीब 3 हजार से अधिक श्रद्धालुओं की भागीदारी।
- सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ और संकल्प कराया गया।
- समिति के संयोजक अभिषेक कुमार सहित टीम की अहम भूमिका।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर देशभर में आयोजित कार्यक्रमों की कड़ी में कोलेबिरा प्रखंड भी शामिल रहा। कोलेबिरा स्टेडियम में आयोजित विराट हिंदू महा सम्मेलन सह सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम धार्मिक परंपराओं के अनुसार संपन्न हुआ, जिसमें अतिथियों का सम्मान, दीप प्रज्वलन और सामूहिक पाठ प्रमुख आकर्षण रहे। आयोजन के दौरान युवाओं और महिलाओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली।
पारंपरिक रीति से हुआ अतिथियों का सम्मान
कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पारंपरिक परंपरा के अनुसार की गई। मंच पर उपस्थित मुख्य अतिथि हिंदू हृदय सम्राट भैरव सिंह तथा विशिष्ट अतिथि जैन मुनि महाराज, विनोद पाहन, आचार्य शिवपति मिश्र और कौशल सिंह देव का पैर धोकर एवं अंगवस्त्र पहनाकर सम्मान किया गया। इसके पश्चात दीप प्रज्वलित कर औपचारिक उद्घाटन किया गया।
सर्वप्रथम महिला समूह द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत कर अतिथियों का अभिनंदन किया गया, जिससे कार्यक्रम का वातावरण भक्तिमय हो उठा।
आचार्य जैन मुनि पद्मराज जी महाराज का संबोधन
मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित आचार्य जैन मुनि पद्मराज जी महाराज ने अपने संबोधन में सनातन धर्म की मूल भावना, उसके सिद्धांतों और सामाजिक एकजुटता के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा:
आचार्य जैन मुनि पद्मराज जी महाराज ने कहा: “सनातन धर्म मानवता, कर्तव्य और आत्मशक्ति का संदेश देता है। हमें अपने धर्म की मूल भावना को समझते हुए समाज में एकता बनाए रखनी चाहिए।”
उन्होंने धर्म के प्रति जागरूक रहने और परंपराओं को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
भैरव सिंह का ओजस्वी उद्बोधन
इसके बाद मुख्य अतिथि हिंदू हृदय सम्राट भैरव सिंह ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने हिंदू संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकजुटता पर जोर दिया।
हिंदू हृदय सम्राट भैरव सिंह ने कहा: “आप उस धर्म से आते हैं जिसकी विरासत और पहचान अद्वितीय है। अपने भीतर की शक्ति को पहचानिए, वही शक्ति आपके धर्म और समाज की रक्षा कर सकती है।”
उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे परिवार और समाज में धार्मिक परंपराओं को जीवित रखें। साथ ही उन्होंने प्रतिदिन हनुमान चालीसा पाठ, रामायण और गीता के अध्ययन पर बल दिया।
भैरव सिंह ने कहा:
“यदि युवा जागरूक होंगे तो वर्तमान पीढ़ी के साथ आने वाली पीढ़ी भी सुरक्षित और संस्कारित रहेगी।”
धर्म परिवर्तन के मुद्दे पर चर्चा और शुद्धिकरण
कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि कुछ परिवारों ने पूर्व में अन्य धर्म अपनाया था, जिन्होंने स्वेच्छा से पुनः सनातन धर्म में शामिल होने की इच्छा जताई। आचार्य के नेतृत्व में विधि-विधान के साथ शुद्धिकरण की प्रक्रिया संपन्न कर उन्हें पुनः सनातन धर्म में शामिल किया गया।
इस अवसर पर सामूहिक संकल्प भी दिलाया गया कि समाज में एकता और सद्भाव बनाए रखा जाएगा।
सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ और संकल्प
सम्मेलन का मुख्य आकर्षण सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ रहा, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने एक स्वर में पाठ किया। मंच से उपस्थित श्रद्धालुओं को एकजुट रहने का संकल्प दिलाया गया।
कार्यक्रम के समापन पर धन्यवाद ज्ञापन किया गया। इसके बाद सभी श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद स्वरूप भंडारा की व्यवस्था की गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
आयोजन समिति की महत्वपूर्ण भूमिका
इस विशाल आयोजन को सफल बनाने में समिति के संयोजक अभिषेक कुमार, सहसंयोजक अशोक इन्दवार, कोषाध्यक्ष चंदन कुमार, सह कोषाध्यक्ष संजित कुमार, सचिव सुमंत कुमार, उपसचिव प्रवीण कुमार एवं समिति के अन्य सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
न्यूज़ देखो: शताब्दी वर्ष में संगठनात्मक शक्ति का प्रदर्शन
कोलेबिरा में आयोजित यह सम्मेलन धार्मिक और सामाजिक एकजुटता का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया। तीन हजार से अधिक लोगों की भागीदारी यह दर्शाती है कि स्थानीय स्तर पर ऐसे आयोजनों का व्यापक प्रभाव पड़ता है। हालांकि, ऐसे आयोजनों के साथ सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मर्यादाओं का संतुलन बनाए रखना भी आवश्यक है। आने वाले समय में इस प्रकार के कार्यक्रमों का समाज पर क्या दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा, इस पर नजर रखना जरूरी होगा।
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जागरूक समाज, संगठित भविष्य की ओर बढ़ता कोलेबिरा
धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम समाज को जोड़ने का माध्यम बन सकते हैं, यदि उनमें संवाद और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे। युवाओं की सक्रिय भागीदारी यह संकेत देती है कि नई पीढ़ी सामाजिक मंचों पर आगे आ रही है।
जरूरत है कि हर आयोजन सामाजिक सद्भाव, पारस्परिक सम्मान और संवैधानिक मूल्यों के साथ आगे बढ़े। जागरूक नागरिक ही मजबूत समाज का आधार होते हैं।






