#खलारी #रांची #रमजान_जुम्मा : पहले जुम्मे पर रोजेदारों ने अकीदत से नमाज अदा की।
रांची जिले के खलारी, मैकलुस्कीगंज और कोयलांचल क्षेत्र की मस्जिदों में रमजान माह के पहले जुम्मे पर बड़ी संख्या में नमाजियों ने नमाज अदा की। नमाज के बाद देश में अमन, शांति और भाईचारे की दुआ मांगी गई। खलारी जामा मस्जिद में इमाम नेहाल अहमद जेयाई ने नमाज पढ़ाते हुए रोजा और इबादत के महत्व पर तकरीर की।
- खलारी, मैकलुस्कीगंज व कोयलांचल क्षेत्र की मस्जिदों में पहले जुम्मे की नमाज अदा।
- लपरा, मायापुर, बुकबुका, जी-टाइप, बाजारटांड़, नया बस्ती, डकरा, राय समेत कई मस्जिदों में भीड़।
- नमाज के बाद देश में अमन, शांति और भाईचारे की दुआ मांगी गई।
- इमाम नेहाल अहमद जेयाई ने रोजा, नमाज और रमजान की अहमियत पर दिया संदेश।
- रमजान में रोजा, जकात, फितरा, सदका और तरावीह की इबादत पर दिया जोर।
रमजान माह के पहले जुम्मे के अवसर पर खलारी, मैकलुस्कीगंज एवं पूरे कोयलांचल क्षेत्र में धार्मिक माहौल देखने को मिला। क्षेत्र की विभिन्न मस्जिदों में सुबह से ही रोजेदारों और नमाजियों की चहल-पहल बनी रही। जुम्मे की नमाज के समय मस्जिदों में बड़ी संख्या में अकीदतमंद पहुंचे और पूरे श्रद्धा एवं अनुशासन के साथ नमाज अदा की। नमाज के बाद लोगों ने देश में अमन, शांति, सद्भाव और आपसी भाईचारे की कामना करते हुए विशेष दुआ मांगी।
विभिन्न मस्जिदों में अकीदत के साथ अदा की गई नमाज
खलारी, मैकलुस्कीगंज और आसपास के कोयलांचल क्षेत्र की कई प्रमुख मस्जिदों में पहले जुम्मे की नमाज को लेकर विशेष तैयारी की गई थी। लपरा, मायापुर, बुकबुका पंचायत स्थित जामा मस्जिद, जी-टाइप, खलारी बाजारटांड़, नया बस्ती, जेहलाटांड़, धमधमियां, डकरा, राय सहित अन्य स्थानों की मस्जिदों में बड़ी संख्या में नमाजियों ने एकत्र होकर नमाज अदा की।
मस्जिद परिसरों में साफ-सफाई, अनुशासन और धार्मिक वातावरण के बीच नमाज शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। रोजेदारों ने एक साथ इबादत कर रमजान की पवित्रता और आध्यात्मिकता का संदेश दिया।
खलारी जामा मस्जिद में इमाम ने पढ़ाई जुम्मे की नमाज
खलारी जामा मस्जिद में जुम्मे की नमाज इमाम नेहाल अहमद जेयाई ने पढ़ाई। नमाज से पहले अपने तकरीर में उन्होंने रमजान माह की महत्ता, रोजा और नमाज के धार्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा:
इमाम नेहाल अहमद जेयाई ने कहा: “बालिग हुए प्रत्येक मुसलमान पर रोजा और नमाज फर्ज है। रमजान का महीना इबादत, आत्मशुद्धि और अल्लाह की रहमत हासिल करने का महीना है।”
उन्होंने बताया कि रमजान करीब एक वर्ष के लंबे अंतराल के बाद आता है और यह महीना इबादत, संयम और आत्मानुशासन का प्रतीक है।
रमजान माह की बरकत और इबादत का संदेश
इमाम ने अपने संबोधन में कहा कि रमजान का पवित्र महीना बरकतों और रहमतों से भरा होता है। इस दौरान मुसलमान रोजा रखते हैं, पांच वक्त की नमाज अदा करते हैं, तरावीह पढ़ते हैं तथा कुरान पाक की तिलावत करते हैं।
उन्होंने आगे कहा:
“रमजान में रोजा, नमाज, फितरा, जकात और सदका के माध्यम से खुदा की इबादत की जाती है और यह गुनाहों की माफी का बेहतरीन अवसर होता है।”
उन्होंने सभी रोजेदारों से इस पवित्र महीने में अधिक से अधिक इबादत करने और नेक कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की।
गरीबों और जरूरतमंदों की मदद पर विशेष जोर
तक़रीर के दौरान इमाम ने समाज में दया, करुणा और सहयोग की भावना को मजबूत करने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि रमजान केवल इबादत का महीना ही नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का भी अवसर है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करें, जकात और फितरा अदा करें तथा समाज में भाईचारा और इंसानियत को बढ़ावा दें। उनके अनुसार, जरूरतमंदों की सहायता करना इस पवित्र महीने का सबसे बड़ा सवाब माना जाता है।
अमन-शांति और भाईचारे की मांगी गई दुआ
जुम्मे की नमाज के बाद नमाजियों ने सामूहिक रूप से देश में अमन, शांति और सामाजिक सद्भाव के लिए दुआ मांगी। लोगों ने समाज में प्रेम, एकता और भाईचारे की भावना बनाए रखने की प्रार्थना की।
नमाजियों ने यह भी दुआ की कि देश और समाज में शांति बनी रहे तथा सभी लोग मिलजुल कर सौहार्दपूर्ण वातावरण में जीवन व्यतीत करें। मस्जिदों से शांति, संयम और आध्यात्मिकता का संदेश पूरे क्षेत्र में प्रसारित हुआ।
धार्मिक माहौल से गुलजार रहा कोयलांचल क्षेत्र
रमजान के पहले जुम्मे को लेकर पूरे खलारी और आसपास के कोयलांचल क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला। नमाज के दौरान अनुशासन, शांति और धार्मिक आस्था का सुंदर दृश्य नजर आया।
स्थानीय लोगों ने बताया कि रमजान का पहला जुम्मा विशेष महत्व रखता है, इसलिए बड़ी संख्या में रोजेदार मस्जिदों में पहुंचकर इबादत करते हैं। इस अवसर पर लोगों ने एक-दूसरे को रमजान की मुबारकबाद भी दी और धार्मिक परंपराओं का पालन किया।
न्यूज़ देखो: आस्था, अनुशासन और भाईचारे का सशक्त संदेश
रमजान के पहले जुम्मे पर खलारी क्षेत्र की मस्जिदों में उमड़ी भीड़ धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक है। सामूहिक दुआ और इबादत से समाज में शांति, सौहार्द और सह-अस्तित्व का संदेश मजबूत होता है। ऐसे धार्मिक आयोजन न केवल आध्यात्मिक चेतना बढ़ाते हैं बल्कि सामाजिक समरसता को भी सुदृढ़ करते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
रमजान का संदेश अपनाएं, समाज में शांति और भाईचारा बढ़ाएं
रमजान आत्मसंयम, करुणा और मानवता का पवित्र संदेश देता है।
यह महीना हमें दूसरों की मदद करने और सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
आस्था के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी निभाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
जरूरतमंदों की सहायता और भाईचारे की भावना ही सच्ची इबादत है।
आप भी समाज में शांति, सद्भाव और सहयोग का संदेश फैलाएं।
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