नवरात्र के अवसर पर विश्व कल्याण आश्रम में नौ दिवसीय शतचंडी यज्ञ और अखंड दीप का आयोजन शुरू

नवरात्र के अवसर पर विश्व कल्याण आश्रम में नौ दिवसीय शतचंडी यज्ञ और अखंड दीप का आयोजन शुरू

author Pramod Mishra
101 Views Download E-Paper (16)
#पश्चिमसिंहभूम #नवरात्रआयोजन : आनंदपुर स्थित आश्रम में भव्य पूजा और यज्ञ कार्यक्रम होंगे।

पश्चिम सिंहभूम के आनंदपुर स्थित विश्व कल्याण आश्रम में शारदीय नवरात्र के अवसर पर कलश स्थापना के साथ धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत होगी। आश्रम में नौ दिनों तक शतचंडी यज्ञ, सहस्रअर्चन और अखंड दीप का आयोजन किया जाएगा। महाष्टमी और महानवमी पर विशेष पूजा और कन्या पूजन होगा। यह आयोजन क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण को मजबूत करेगा।

Join WhatsApp

🔸 आनंदपुर स्थित विश्व कल्याण आश्रम में शुक्रवार से नवरात्र प्रारंभ।
🔸 कलश स्थापना के साथ शुरू होगा नौ दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान।
🔸 26 मार्च महाष्टमी और 27 मार्च महानवमी पर विशेष पूजन।
🔸 शतचंडी यज्ञ में प्रतिदिन सहस्रअर्चन और हवन का आयोजन।
🔸 28 मार्च दशमी को विसर्जन के बाद भंडारा आयोजित होगा।
🔸 श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में अखंड दीप जलाए जाएंगे।

पश्चिम सिंहभूम जिले के आनंदपुर स्थित समीज के विश्व कल्याण आश्रम में शारदीय नवरात्र को लेकर व्यापक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज द्वारा स्थापित इस आश्रम में हर वर्ष की तरह इस बार भी भव्य धार्मिक आयोजन किया जा रहा है। शुक्रवार को विधिवत कलश स्थापना के साथ नवरात्र पूजा प्रारंभ होगी। इस दौरान श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में भागीदारी होने की उम्मीद है और पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूब जाएगा।

कलश स्थापना से होगी नवरात्र की शुरुआत

आश्रम प्रभारी ब्रह्मचारी विश्वानन्द ने जानकारी देते हुए बताया कि शुक्रवार को विधिवत पूजा-अर्चना के साथ कलश स्थापना की जाएगी। इसके साथ ही नवरात्र के नौ दिनों तक चलने वाले अनुष्ठानों की शुरुआत होगी। आश्रम परिसर स्थित माता राजराजेश्वरी मंदिर में प्रतिदिन विशेष पूजा, अर्चन और आरती आयोजित की जाएगी।

ब्रह्मचारी विश्वानन्द ने कहा: “नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं के लिए प्रतिदिन विशेष पूजा और आरती की व्यवस्था की गई है, जिससे भक्तों को आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त हो सके।”

महाष्टमी और महानवमी पर विशेष पूजन

नवरात्र के दौरान 26 मार्च को महाष्टमी और 27 मार्च को महानवमी का विशेष महत्व रहेगा। इन दोनों तिथियों पर बटुक, कन्या और सौभाग्यवती महिलाओं का पूजन किया जाएगा। यह परंपरा शक्ति स्वरूपा देवी की आराधना का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।

इन विशेष दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या अधिक रहने की संभावना है, जिसके लिए आश्रम प्रशासन द्वारा विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

दशमी पर विसर्जन और भंडारा

नवरात्र का समापन 28 मार्च को दशमी तिथि के दिन होगा। इस दिन विधिवत पूजा-अर्चना के बाद कलश विसर्जन किया जाएगा। इसके पश्चात श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रसाद वितरण किया जाएगा।

यह भंडारा न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है, जहां सभी वर्ग के लोग एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं।

शतचंडी यज्ञ से गूंजेगा आश्रम परिसर

नवरात्र के अवसर पर विश्व कल्याण आश्रम में नौ दिवसीय शतचंडी यज्ञ का आयोजन भी किया जाएगा। यज्ञ के आचार्य बसंत बिल्थरे ने बताया कि शुक्रवार को वरुण देवता के पूजन के साथ जलयात्रा निकाली जाएगी।

आचार्य बसंत बिल्थरे ने कहा: “जलयात्रा के पश्चात देवताओं का आवाहन कर शतचंडी यज्ञ का शुभारंभ किया जाएगा, जिसमें प्रतिदिन सहस्रअर्चन और हवन होगा।”

उन्होंने बताया कि इस यज्ञ के माध्यम से श्रद्धालुओं को देवी भगवती के नौ स्वरूपों के दर्शन और पूजन का अवसर प्राप्त होगा। यह आयोजन आध्यात्मिक ऊर्जा को जागृत करने का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।

अखंड दीप से बनेगा भक्तिमय वातावरण

नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा माता राजराजेश्वरी मंदिर में अखंड दीप जलाए जाएंगे। यह दीप नौ दिनों तक निरंतर प्रज्वलित रहेंगे, जो श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक हैं।

अखंड दीप जलाने की यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था को दर्शाती है, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा और शांति का भी संदेश देती है। इससे पूरे मंदिर परिसर में एक विशेष आध्यात्मिक वातावरण निर्मित होता है।

न्यूज़ देखो: धार्मिक आयोजन से मजबूत होती सामाजिक और आध्यात्मिक एकता

इस तरह के आयोजन यह दर्शाते हैं कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आज भी धार्मिक परंपराएं समाज को जोड़ने का कार्य कर रही हैं। विश्व कल्याण आश्रम का यह आयोजन न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पहचान को भी सुदृढ़ करता है। प्रशासन और आयोजन समिति की जिम्मेदारी है कि इतनी बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आयोजन कितनी व्यवस्थित तरीके से संपन्न होता है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

आस्था के इस पर्व में बनें सहभागी, समाज में सकारात्मक ऊर्जा फैलाएं

नवरात्र केवल पूजा का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशक्ति और सामाजिक एकता का भी संदेश देता है। ऐसे आयोजनों में भाग लेकर हम अपनी संस्कृति और परंपराओं को जीवित रख सकते हैं। अपने आसपास के लोगों को भी इस धार्मिक माहौल से जोड़ें और सकारात्मकता का प्रसार करें।

📥 Download E-Paper

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 5 / 5. कुल वोट: 1

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!

Written by

आनंदपुर, पश्चिम सिंहभूम

🔔

Notification Preferences

error: