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स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती पर डीएवी खलारी में वार्षिक खेल उत्सव का भव्य आयोजन, बच्चों ने दिखाया उत्साह और अनुशासन

#खलारी #वार्षिकखेलउत्सव : खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और पुरस्कार वितरण के साथ मनाया गया प्रेरणादायी समारोह।

डीएवी पब्लिक स्कूल खलारी में स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर बाल वाटिका से कक्षा पांचवीं तक के विद्यार्थियों के लिए वार्षिक खेल उत्सव आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन प्राचार्य डॉ. कमलेश कुमार सहित अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। खेल और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समारोह को यादगार बना दिया।

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  • डीएवी पब्लिक स्कूल खलारी में जयंती पर खेल उत्सव का आयोजन।
  • डॉ. कमलेश कुमार, रामनारायण चौधरी (डीएसपी खलारी) एवं सरस्वती देवी ने दीप प्रज्वलित कर किया उद्घाटन।
  • बाल वाटिका से कक्षा पांचवीं तक के विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी।
  • विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में छात्रों के साथ अभिभावकों ने भी लिया हिस्सा।
  • विजेताओं को डिप्टी कमांडेंट सीआईएसएफ दिनेश कुमार सहित अतिथियों ने मेडल व प्रमाण पत्र प्रदान किए।

खलारी स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल में आधुनिक भारत के महान समाज सुधारक और आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती श्रद्धा एवं हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में बाल वाटिका से कक्षा पांचवीं तक के बच्चों के लिए वार्षिक खेल उत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्राचार्य डॉ. कमलेश कुमार, मुख्य अतिथि डीएसपी खलारी रामनारायण चौधरी एवं जिला परिषद सदस्य सरस्वती देवी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर तथा स्वामी दयानंद सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया।

स्वामी दयानंद के विचार आज भी प्रेरणास्रोत

प्राचार्य डॉ. कमलेश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती वेदों के पुनरुत्थानकर्ता, नारी शिक्षा के समर्थक और सामाजिक कुरीतियों के प्रखर विरोधी थे।

“उनके विचार आज भी समाज को दिशा देने का कार्य कर रहे हैं। हमें उनके आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए।”

मुख्य अतिथि रामनारायण चौधरी ने खेलों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि खेल बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

“खेल अनुशासन, समय प्रबंधन और टीम भावना का विकास करते हैं। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों से दूर रखते हुए खेलकूद के लिए प्रेरित करें।”

सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां

कार्यक्रम में सामाजिक विषयों पर आधारित लघु नाटिका, आकर्षक ड्रिल और रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। विद्यार्थियों ने आत्मविश्वास और उत्साह के साथ मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

खेल प्रतियोगिताओं में दिखा दमखम

वार्षिक खेल उत्सव के दौरान विभिन्न रोचक खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें छात्र-छात्राओं के साथ अभिभावकों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।

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मदर रन एंड कलेक्ट द बेबी प्रतियोगिता में काव्या रानी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। फादर रन एंड कलेक्ट द बेबी में राजवीर राज विजेता रहे। हूला हूप रेस में अमृता रानी बीसी ने बाजी मारी, जबकि हर्डल रेस में वंश राज जायसवाल प्रथम स्थान पर रहे।

थ्री लेग रेस में कुमार अपूर्व एवं ऋषभ राज की जोड़ी विजेता बनी, वहीं ओब्स्टेकल रेस में पंकज एवं समीर की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान हासिल किया।

प्रतियोगिताओं में बच्चों की फुर्ती, संतुलन, टीम भावना और खेल कौशल देखने लायक रहा। मैदान में उपस्थित अभिभावकों ने तालियों की गूंज से प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।

विजेताओं को किया गया सम्मानित

वैलेडिक्टरी समारोह में डिप्टी कमांडेंट सीआईएसएफ दिनेश कुमार, जिला परिषद सदस्य सरस्वती देवी, अतिथि संजू शर्मा एवं प्राचार्य डॉ. कमलेश कुमार द्वारा विजेता प्रतिभागियों को मेडल और प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। विद्यालय प्रबंधन ने सभी प्रतिभागियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

शिक्षा और खेल का संतुलित संगम

विद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि शिक्षा के साथ-साथ खेल गतिविधियां बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक हैं। इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सकारात्मक प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करते हैं।

कार्यक्रम में शिक्षकगण, अभिभावक एवं स्थानीय गणमान्य लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में अनुशासन, उत्साह और गरिमा का विशेष ध्यान रखा गया।

न्यूज़ देखो: शिक्षा के साथ खेल का संदेश

डीएवी खलारी का यह आयोजन केवल एक खेल उत्सव नहीं, बल्कि बच्चों के समग्र विकास की सोच का परिचायक है। स्वामी दयानंद सरस्वती के आदर्शों के साथ खेलकूद का समावेश नई पीढ़ी को संस्कार और आत्मविश्वास दोनों प्रदान करता है। ऐसे कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के प्रति सकारात्मक माहौल बनाते हैं।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

आइए, बच्चों को दें संस्कार और अवसर

बच्चों के जीवन में खेल और शिक्षा दोनों का समान महत्व है।
उन्हें डिजिटल दुनिया से संतुलित दूरी और मैदान से जुड़ाव देने की जिम्मेदारी हमारी है।
अपने क्षेत्र के विद्यालयों में हो रहे ऐसे सकारात्मक प्रयासों को समर्थन दें।
इस खबर को साझा करें और बताएं कि आपके अनुसार बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए और क्या किया जाना चाहिए।

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Jitendra Giri

खलारी, रांची

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