#सिमडेगा #विश्वधरोहरदिवस : कॉलेज में कार्यक्रम कर छात्रों को धरोहर संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।
सिमडेगा के सेंट ज़ेवियर्स कॉलेज में इतिहास विभाग द्वारा विश्व धरोहर दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में छात्रों को वीडियो और चर्चा के माध्यम से धरोहरों के महत्व से अवगत कराया गया। शिक्षकों ने सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। इस आयोजन से विद्यार्थियों में जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना विकसित हुई।
- सेंट ज़ेवियर्स कॉलेज, सिमडेगा में आयोजित हुआ कार्यक्रम।
- इतिहास विभाग द्वारा विश्व धरोहर दिवस पर जागरूकता पहल।
- छात्रों को वीडियो के माध्यम से धरोहर स्थलों की जानकारी दी गई।
- सनी संतोष टोप्पो और रेनी अल्मा लकड़ा ने किया मार्गदर्शन।
- कार्यक्रम में विद्यार्थियों और शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी।
सिमडेगा स्थित सेंट ज़ेवियर्स कॉलेज में विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इतिहास विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को विश्व की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के महत्व से अवगत कराना था। इस दौरान कॉलेज परिसर में उत्साहपूर्ण माहौल देखने को मिला, जहां छात्रों और शिक्षकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
धरोहरों के महत्व पर विशेष चर्चा
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को वीडियो प्रस्तुति के माध्यम से विभिन्न विश्व धरोहर स्थलों की जानकारी दी गई। इन प्रस्तुतियों के जरिए छात्रों को ऐतिहासिक स्थलों, उनकी विशेषताओं और उनके संरक्षण की आवश्यकता के बारे में विस्तार से बताया गया।
इसके साथ ही छात्रों और शिक्षकों के बीच विचार-विमर्श भी किया गया, जिसमें सांस्कृतिक विरासत को बचाने की जिम्मेदारी पर जोर दिया गया। इस चर्चा ने छात्रों के दृष्टिकोण को व्यापक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शिक्षकों ने किया मार्गदर्शन
कार्यक्रम में इतिहास विभागाध्यक्ष एवं असिस्टेंट प्रोफेसर सनी संतोष टोप्पो ने छात्रों को संबोधित करते हुए विश्व धरोहर दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला।
सनी संतोष टोप्पो ने कहा: “विश्व धरोहर दिवस हमें अपनी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने और उसके महत्व को समझने की प्रेरणा देता है।”
वहीं, IQAC समन्वयक असिस्टेंट प्रोफेसर रेनी अल्मा लकड़ा ने भी छात्रों को धरोहर संरक्षण के प्रति जागरूक किया और ऐसे आयोजनों को ज्ञानवर्धक बताया।
रेनी अल्मा लकड़ा ने कहा: “ऐसे कार्यक्रम छात्रों को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करते हैं।”
छात्रों में बढ़ी जागरूकता
इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों को यह समझाया गया कि धरोहर केवल अतीत की पहचान नहीं होती, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य धरोहर होती है। इसके संरक्षण की जिम्मेदारी हम सभी की है।
कार्यक्रम में भाग लेने वाले विद्यार्थियों ने इसे अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन उन्हें अपनी संस्कृति और इतिहास को समझने में मदद करते हैं।
सफल आयोजन का संदेश
पूरे कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया और इसमें विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। यह पहल न केवल शैक्षणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रही, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाने में भी सहायक साबित हुई।
न्यूज़ देखो: धरोहर बचाने की जिम्मेदारी हम सभी की
सिमडेगा के इस आयोजन से यह स्पष्ट होता है कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूक करना समय की मांग है। ऐसे कार्यक्रम छात्रों को केवल जानकारी ही नहीं देते, बल्कि उनमें जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करते हैं। अब यह जरूरी है कि इस जागरूकता को व्यवहार में भी उतारा जाए और धरोहरों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाई जाए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
विरासत को बचाना भविष्य को संवारना है
हमारी संस्कृति और धरोहरें हमारी पहचान हैं, जिन्हें संजोकर रखना हमारी जिम्मेदारी है। यदि हम आज इन्हें सुरक्षित रखेंगे, तभी आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से जुड़ी रह सकेंगी। यह केवल सरकार का नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है।
आइए, हम सभी मिलकर अपनी विरासत को बचाने का संकल्प लें और इसके संरक्षण में अपना योगदान दें।
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