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दो वर्षों से लंबित छात्रवृत्ति भुगतान को लेकर झारखंड में ऑनलाइन आंदोलन का आह्वान

#गिरिडीह #छात्रवृत्ति_मांग : लंबित छात्रवृत्ति भुगतान के लिए 24 दिसंबर को राज्यव्यापी ट्विटर अभियान।

झारखंड में पिछले दो वर्षों से लंबित छात्रवृत्ति भुगतान को लेकर छात्रों में गहरी नाराजगी है। इसी मुद्दे पर 24 दिसंबर 2025 को सुबह 7 बजे से राज्यव्यापी ऑनलाइन आंदोलन के तहत ट्विटर अभियान आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य सरकार का ध्यान हजारों गरीब और मेधावी छात्रों के संवैधानिक अधिकारों की ओर आकर्षित करना है, जिनकी पढ़ाई छात्रवृत्ति के अभाव में प्रभावित हो रही है।

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  • 24 दिसंबर 2025 को सुबह 7 बजे से ट्विटर अभियान
  • दो वर्षों से लंबित छात्रवृत्ति भुगतान का मुद्दा।
  • गरीब और मेधावी छात्रों के भविष्य से जुड़ा सवाल।
  • अधिक ट्वीट और री-ट्वीट से आंदोलन को मजबूती।
  • राज्यव्यापी ऑनलाइन सहभागिता का आह्वान।

झारखंड में शिक्षा से जुड़े एक गंभीर मुद्दे ने एक बार फिर राज्य का ध्यान आकर्षित किया है। पिछले दो वर्षों से विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं की राशि छात्रों के खातों में नहीं पहुंच पाई है, जिससे हजारों गरीब, पिछड़े और मेधावी छात्र-छात्राएं गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। इसी समस्या को लेकर अब छात्रों और सामाजिक संगठनों ने ऑनलाइन आंदोलन का रास्ता अपनाया है।

यह ऑनलाइन आंदोलन 24 दिसंबर 2025 को सुबह 7 बजे से ट्विटर (X) प्लेटफॉर्म पर चलाया जाएगा। अभियान के माध्यम से सरकार और संबंधित विभागों से लंबित छात्रवृत्ति भुगतान शीघ्र जारी करने की मांग की जाएगी।

दो साल से अटकी छात्रवृत्ति, छात्रों पर बढ़ता दबाव

छात्रों का कहना है कि छात्रवृत्ति केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि उनका संवैधानिक अधिकार है। छात्रवृत्ति के सहारे ही कई गरीब परिवारों के बच्चे स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों में अपनी पढ़ाई जारी रख पाते हैं। लेकिन बीते दो वर्षों से भुगतान नहीं होने के कारण अनेक छात्रों को पढ़ाई छोड़ने या कर्ज लेने तक की नौबत आ गई है।

ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के छात्रों पर इसका सबसे अधिक असर देखा जा रहा है। कई छात्र हॉस्टल फीस, परीक्षा शुल्क और किताबों के खर्च तक नहीं उठा पा रहे हैं। परिणामस्वरूप शिक्षा की निरंतरता बाधित हो रही है।

ऑनलाइन आंदोलन का उद्देश्य और स्वरूप

इस अभियान को पूरी तरह शांतिपूर्ण और डिजिटल माध्यम से आयोजित किया जा रहा है। ट्विटर (X) पर अधिक से अधिक ट्वीट और री-ट्वीट कर सरकार तक छात्रों की आवाज पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। आयोजकों का मानना है कि सोशल मीडिया के माध्यम से जनदबाव बनाकर ही इस मुद्दे को प्राथमिकता दिलाई जा सकती है।

छात्र संगठनों का कहना है कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि छात्र हितों की रक्षा के लिए है। सभी झारखंडवासियों से अपील की गई है कि वे इस अभियान में सहभागी बनें और छात्रों के भविष्य को संबल दें।

हजारों छात्रों का भविष्य दांव पर

राज्य के हजारों छात्र-छात्राएं विगत दो वर्षों से छात्रवृत्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कई विद्यार्थियों ने बताया कि छात्रवृत्ति नहीं मिलने से उनकी पढ़ाई अधर में लटक गई है। कुछ छात्रों ने तो मजबूरी में पढ़ाई छोड़कर मजदूरी तक शुरू कर दी है।

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छात्रों का कहना है कि सरकार द्वारा योजनाएं तो बनाई जाती हैं, लेकिन समय पर क्रियान्वयन नहीं होने से उनका लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाता। यह स्थिति शिक्षा के अधिकार और सामाजिक न्याय की भावना पर भी सवाल खड़े करती है।

सोशल मीडिया बना छात्रों की आवाज

डिजिटल युग में सोशल मीडिया अब सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक दबाव बनाने का सशक्त मंच बन चुका है। इसी को ध्यान में रखते हुए छात्रों ने ट्विटर अभियान का रास्ता चुना है। आयोजकों का कहना है कि यदि बड़ी संख्या में लोग इस अभियान से जुड़ते हैं, तो सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना ही होगा।

छात्रों का यह भी कहना है कि एक ट्वीट या री-ट्वीट किसी छात्र के भविष्य की दिशा बदल सकता है। इसलिए आम नागरिकों, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों से भी इस अभियान में सहयोग की अपील की गई है।

संवैधानिक अधिकार और सरकार की जिम्मेदारी

छात्रवृत्ति योजनाएं सामाजिक न्याय और समान अवसर के सिद्धांत पर आधारित हैं। इनका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों को शिक्षा से जोड़ना है। यदि समय पर भुगतान नहीं होता, तो यह न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि संवैधानिक दायित्वों की भी अनदेखी मानी जाएगी।

छात्रों का कहना है कि सरकार को यह समझना होगा कि शिक्षा में निवेश ही राज्य के भविष्य में निवेश है। छात्रवृत्ति में देरी सीधे तौर पर राज्य के मानव संसाधन विकास को प्रभावित करती है।

अभियान को लेकर बढ़ती उम्मीद

ऑनलाइन आंदोलन को लेकर छात्रों में उम्मीद की एक नई किरण जगी है। उन्हें विश्वास है कि यदि राज्यभर के लोग एकजुट होकर इस अभियान में शामिल होंगे, तो यह आंदोलन निर्णायक साबित हो सकता है।

आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक छात्रवृत्ति भुगतान को लेकर ठोस कार्रवाई नहीं होती।

न्यूज़ देखो: छात्रवृत्ति मुद्दे पर सरकार की परीक्षा

दो वर्षों से लंबित छात्रवृत्ति भुगतान यह दर्शाता है कि योजनाओं और जमीनी क्रियान्वयन के बीच बड़ा अंतर है। छात्रों का ऑनलाइन आंदोलन सरकार के लिए चेतावनी भी है और अवसर भी—चेतावनी इस बात की कि शिक्षा उपेक्षित न हो, और अवसर इस बात का कि समय रहते समाधान निकालकर भरोसा बहाल किया जाए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

शिक्षा का हक़ दिलाने में भागीदार बनें

आज एक ट्वीट किसी छात्र की पढ़ाई बचा सकता है।
गरीब और मेधावी छात्रों का भविष्य हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
24 दिसंबर को इस डिजिटल आंदोलन में अपनी भागीदारी दर्ज कराएं।
अपनी राय कमेंट करें, खबर साझा करें और छात्र हित की इस आवाज को हर मंच तक पहुंचाएं।

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Surendra Verma

डुमरी, गिरिडीह

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