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कर्रा में ऑर्गेनिक अबीर प्रशिक्षण से ग्रामीण महिलाओं को मिली नई आजीविका की दिशा

#खूंटी #महिला_सशक्तिकरण : WCSF फाउंडेशन की पहल पर ऑर्गेनिक अबीर निर्माण से रोजगार का अवसर मिला।

खूंटी जिले के कर्रा प्रखंड में डब्ल्यूसीएसएफ चैरिटीस्पिरिट फाउंडेशन ने ग्रामीण महिलाओं के लिए ऑर्गेनिक अबीर निर्माण का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इस पहल में 20 महिलाओं को प्राकृतिक रंग तैयार करने से लेकर पैकेजिंग और विपणन तक की जानकारी दी गई। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को स्थायी आजीविका से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। संस्था द्वारा तैयार उत्पाद को झारखंड के विभिन्न जिलों में भेजने की योजना है।

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  • डब्ल्यूसीएसएफ चैरिटीस्पिरिट फाउंडेशन द्वारा कर्रा में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित।
  • कुल 20 ग्रामीण महिलाओं ने ऑर्गेनिक अबीर निर्माण का प्रशिक्षण लिया।
  • प्राकृतिक फूल, हल्दी, पलाश और जड़ी-बूटियों से रंग बनाने की विधि सिखाई गई।
  • उत्पादन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच पर विस्तृत मार्गदर्शन।
  • मुख्य अतिथि प्रियंका कुमारी ने महिलाओं को सम्मानजनक रोजगार से जोड़ने पर जोर दिया।

खूंटी जिले के कर्रा प्रखंड में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। डब्ल्यूसीएसएफ चैरिटीस्पिरिट फाउंडेशन द्वारा आयोजित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में महिलाओं को ऑर्गेनिक अबीर निर्माण की प्रक्रिया सिखाई गई। यह कार्यक्रम संस्था के प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित हुआ, जहां प्रतिभागियों को न केवल प्राकृतिक रंग तैयार करने की तकनीक बताई गई, बल्कि उन्हें व्यावसायिक दृष्टिकोण से भी प्रशिक्षित किया गया।

प्राकृतिक संसाधनों से तैयार होगा सुरक्षित अबीर

प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को प्राकृतिक फूलों, हल्दी, पलाश और अन्य सुरक्षित जड़ी-बूटियों से त्वचा के अनुकूल ऑर्गेनिक अबीर तैयार करने की विधि समझाई गई। रासायनिक रंगों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाते हुए बताया गया कि प्राकृतिक रंग न केवल त्वचा के लिए सुरक्षित होते हैं, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी होते हैं।

महिलाओं को रंगों की शुद्धता बनाए रखने, सूखाने की प्रक्रिया, मिश्रण की तकनीक और भंडारण के तरीकों पर भी जानकारी दी गई। प्रशिक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि तैयार उत्पाद गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरे और बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सके।

उत्पादन से बाजार तक की पूरी जानकारी

कार्यक्रम के दौरान केवल निर्माण प्रक्रिया तक सीमित न रहकर उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण, स्वच्छ पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन रणनीति जैसे पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। महिलाओं को बताया गया कि उत्पाद की आकर्षक पैकेजिंग और सही ब्रांडिंग से बाजार में बेहतर पहचान बनाई जा सकती है।

संस्था के मार्गदर्शन में प्रतिभागियों को यह भी समझाया गया कि स्थानीय मेलों, स्वयं सहायता समूह नेटवर्क और खुदरा दुकानों के माध्यम से उत्पाद की बिक्री कैसे बढ़ाई जा सकती है। इससे महिलाओं को अपने उत्पाद को व्यावसायिक स्तर पर आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

मुख्य अतिथि का संबोधन

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रियंका कुमारी ने कहा:

प्रियंका कुमारी ने कहा: “डब्ल्यूसीएसएफ चैरिटीस्पिरिट फाउंडेशन का उद्देश्य अत्यंत गरीब और जरूरतमंद महिलाओं को सम्मानजनक रोजगार से जोड़ना है।”

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उन्होंने बताया कि संस्था द्वारा तैयार किया गया ऑर्गेनिक अबीर झारखंड के विभिन्न जिलों में भेजा जाएगा। इससे महिलाओं को व्यापक बाजार उपलब्ध होगा और उनकी आय में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित की जा सकेगी।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

इस पहल का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि महिलाओं को स्थायी आजीविका से जोड़ना है। ऑर्गेनिक उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए यह पहल आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

संस्था ने आम जनता से अपील की है कि इस होली पर रासायनिक रंगों के स्थान पर स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए ऑर्गेनिक अबीर का उपयोग करें। इससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय महिलाओं की आय में वृद्धि होगी।

न्यूज़ देखो: पर्यावरण और रोजगार का संगम

कर्रा प्रखंड में शुरू की गई यह पहल दर्शाती है कि यदि प्रशिक्षण और बाजार को साथ जोड़ा जाए तो ग्रामीण महिलाओं के लिए स्थायी आय के अवसर बनाए जा सकते हैं। प्राकृतिक उत्पादों की मांग बढ़ रही है, ऐसे में ऑर्गेनिक अबीर निर्माण एक व्यवहारिक विकल्प बन सकता है। अब यह देखना होगा कि तैयार उत्पाद को बाजार में किस स्तर तक पहुंच मिलती है और अन्य प्रखंडों में भी इस मॉडल को अपनाया जाता है या नहीं।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

होली पर अपनाएं प्राकृतिक रंग, बढ़ाएं आत्मनिर्भरता

ग्रामीण महिलाओं की मेहनत और कौशल को समर्थन देना समाज की साझा जिम्मेदारी है। स्थानीय स्तर पर तैयार ऑर्गेनिक उत्पाद न केवल स्वास्थ्य के लिए बेहतर हैं, बल्कि पर्यावरण के संरक्षण में भी सहायक हैं।

यदि हम प्राकृतिक रंगों को अपनाते हैं, तो यह महिलाओं की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में सकारात्मक कदम होगा।

इस पहल के बारे में अपनी राय कमेंट करें, खबर को साझा करें और इस होली आत्मनिर्भरता एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश फैलाएं।

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