
#लातेहार #सड़क_सुरक्षा : केड चौक से गुजर रहे ओवरलोड हाइवा से ग्रामीणों में दहशत, प्रशासनिक कार्रवाई की उठी मांग
- बरवाडीह प्रखंड के केड चौक होकर रोजाना गुजर रहे ओवरलोड हाइवा।
- छरी (स्टोन चिप्स) लदे भारी वाहन तेज रफ्तार से दौड़ रहे।
- ग्रामीण और मुख्य सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त।
- स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया चालकों पर सबसे अधिक खतरा।
- रात में बिना लाइट और संकेतक चल रहे हाइवा।
- प्रशासन से सख्त जांच और कार्रवाई की मांग।
बरवाडीह (लातेहार) प्रखंड क्षेत्र में इन दिनों ओवरलोड हाइवा वाहनों का बेलगाम परिचालन आम लोगों के लिए गंभीर खतरे का कारण बनता जा रहा है। केड चौक से होकर रविवार समेत प्रतिदिन तेज रफ्तार में छरी (स्टोन चिप्स) लदे भारी-भरकम हाइवा गुजरते नजर आ रहे हैं। मुख्य सड़कों के साथ-साथ ग्रामीण संपर्क मार्गों पर भी क्षमता से अधिक लदे ये वाहन न केवल यातायात व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि कभी भी बड़ी सड़क दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ओवरलोड हाइवा की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, लेकिन इस पर रोक लगाने के लिए न तो परिवहन विभाग और न ही स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम उठाया जा रहा है। परिणामस्वरूप आम नागरिकों में भय और आक्रोश दोनों बढ़ रहा है।
सड़कें हो रहीं जर्जर, ग्रामीण परेशान
ग्रामीणों के अनुसार, भारी ओवरलोड वाहनों के लगातार परिचालन से क्षेत्र की सड़कें तेजी से टूट रही हैं। कई स्थानों पर सड़कें धंस चुकी हैं, बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिससे वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब गड्ढों में पानी भर जाने से दुर्घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
विशेष रूप से ग्रामीण सड़कों पर ओवरलोड हाइवा का चलना स्थानीय लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। ये सड़कें भारी वाहनों के लिए बनी ही नहीं होतीं, ऐसे में उनका टूटना स्वाभाविक है, लेकिन इसकी कीमत आम जनता को चुकानी पड़ रही है।
बच्चों और बुजुर्गों की जान पर खतरा
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि ओवरलोड हाइवा की तेज रफ्तार से स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और साइकिल व दोपहिया वाहन चालकों को सबसे ज्यादा खतरा है। सुबह और शाम स्कूल जाने-आने के समय बच्चों को सड़क पार कराने में अभिभावकों को डर सताता है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार हाइवा इतनी तेज गति में होते हैं कि अचानक सामने आ जाने पर संभलने का मौका तक नहीं मिलता। पहले भी कई बार दुर्घटनाएं होते-होते बची हैं, लेकिन यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
रात में और भी बढ़ जाता है खतरा
रात के समय स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कई ओवरलोड हाइवा बिना पर्याप्त लाइट, रिफ्लेक्टर और संकेतक के चलते हैं। अंधेरे में इन भारी वाहनों का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है, जिससे आम वाहन चालकों के लिए खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ हाइवा चालक जानबूझकर नियमों की अनदेखी करते हैं और प्रशासन की निष्क्रियता के कारण उनका हौसला बढ़ता जा रहा है।
जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों की मांग
क्षेत्र के स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने प्रशासन से ओवरलोड हाइवा पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति पूरी तरह बेकाबू हो सकती है।
लोगों ने मांग की है कि:
- प्रवेश बिंदुओं पर नियमित वाहन जांच अभियान चलाया जाए।
- हाइवा का वजन मापने की व्यवस्था की जाए।
- नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन मालिकों पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई हो।
- रात में बिना लाइट चलने वाले वाहनों पर तत्काल रोक लगाई जाए।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब ओवरलोड हाइवा खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, तब प्रशासन क्यों मौन है। क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही कार्रवाई होगी? ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को पहले से ही सतर्क होकर लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
न्यूज़ देखो: हादसे से पहले चेतावनी जरूरी
बरवाडीह प्रखंड में ओवरलोड हाइवा का मुद्दा केवल यातायात नियमों का नहीं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। यदि समय रहते प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो किसी बड़ी दुर्घटना की जिम्मेदारी तय करना मुश्किल होगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सुरक्षा पहले, लापरवाही नहीं
सड़कें विकास का माध्यम हैं, मौत का रास्ता नहीं।
ओवरलोड और तेज रफ्तार पर सख्ती ही समाधान है।
आपके क्षेत्र में भी क्या भारी वाहनों से खतरा है?
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