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पाल पंचायत संघ कौड़िया ने श्रद्धा से मनाई माता सावित्रीबाई फुले की जयंती, शिक्षा के संकल्प के साथ गूंजा सामाजिक चेतना का संदेश

#पलामू #सावित्रीबाईफुलेजयंती : कौड़िया गांव में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा, समानता और सामाजिक परिवर्तन पर दिया गया जोर।
  • पाल पंचायत संघ कौड़िया के तत्वावधान में जयंती समारोह का आयोजन।
  • 03 जनवरी 2026 को कौड़िया गांव स्थित पावस शिक्षण केंद्र परिसर में कार्यक्रम।
  • अजय सिंह चेरो ने कहा—शिक्षा ही सामाजिक परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम।
  • मुखिया कुमारी अंजना सिंह चेरो ने गांव-गांव तक शिक्षा पहुंचाने का आह्वान किया।
  • छात्र-छात्राओं के बीच पुस्तिका व कलम का किया गया वितरण।

पलामू जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत कौड़िया गांव में शनिवार, 03 जनवरी 2026 को शिक्षा की अलख और सामाजिक चेतना का एक प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जब पाल पंचायत संघ कौड़िया के तत्वावधान में भारत की प्रथम महिला शिक्षिका एवं महान समाज सुधारक माता सावित्रीबाई फुले की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। पावस शिक्षण केंद्र शिक्षा संस्थान परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक शिक्षा का संदेश पहुंचाना और सावित्रीबाई फुले के संघर्षमय जीवन से प्रेरणा लेना रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत माता सावित्रीबाई फुले जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलन के साथ की गई। इसके पश्चात उपस्थित जनसमूह ने “माता सावित्रीबाई फुले अमर रहें” के नारों के साथ उनके विचारों को स्मरण किया। समारोह में ग्रामीणों के साथ-साथ बुद्धिजीवी वर्ग, सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष उपस्थित रहे, जिससे कार्यक्रम का वातावरण पूरी तरह प्रेरणादायक बन गया।

शिक्षा से ही बदलेगा समाज : अजय सिंह चेरो

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में आजाद समाज पार्टी के पूर्व विधायक प्रत्याशी एवं चर्चित समाजसेवी नेता अजय सिंह चेरो उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने माता सावित्रीबाई फुले के जीवन और संघर्ष पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 18वीं शताब्दी का भारत सामाजिक कुरीतियों, जातिगत भेदभाव और महिलाओं की अशिक्षा से जकड़ा हुआ था, ऐसे कठिन दौर में सावित्रीबाई फुले ने समाज की रूढ़िवादी सोच को चुनौती दी।

उन्होंने कहा कि जब महिलाओं को पढ़ना पाप माना जाता था, तब महात्मा ज्योतिराव फुले और फातिमा शेख के सहयोग से सावित्रीबाई फुले ने वर्ष 1848 में भारत का पहला बालिका विद्यालय स्थापित कर इतिहास रच दिया। समाज के ठेकेदारों ने उन्हें अपमानित किया, रास्ते में पत्थर और गोबर फेंके गए, लेकिन उन्होंने शिक्षा का दीप बुझने नहीं दिया।

“माता सावित्रीबाई फुले का जीवन हमें सिखाता है कि शिक्षा ही सामाजिक परिवर्तन का सबसे सशक्त हथियार है। यदि समाज को आगे बढ़ाना है तो बेटियों को शिक्षित करना अनिवार्य है,” — अजय सिंह चेरो

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे सावित्रीबाई फुले के विचारों को केवल स्मरण तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने जीवन में आत्मसात करें।

मुखिया कुमारी अंजना सिंह चेरो का प्रेरक संबोधन

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि मुखिया कुमारी अंजना सिंह चेरो ने अपने संबोधन में कहा कि माता सावित्रीबाई फुले केवल महिला शिक्षिका ही नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति की अग्रदूत थीं। उन्होंने समाज की जड़ता को तोड़कर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का मार्ग दिखाया।

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उन्होंने कहा कि आज भी समाज में शिक्षा को लेकर असमानता बनी हुई है, जिसे समाप्त करने के लिए पंचायत स्तर पर निरंतर प्रयास की आवश्यकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समरसता के लिए पंचायत हरसंभव कदम उठाएगी।

बच्चों के बीच शैक्षणिक सामग्री का वितरण

कार्यक्रम के दौरान अजय सिंह चेरो के कर-कमलों द्वारा विद्यालय के छात्र-छात्राओं के बीच पुस्तिका और कलम का वितरण किया गया। इस पहल से बच्चों में शिक्षा के प्रति उत्साह और आत्मविश्वास साफ दिखाई दिया। बच्चों ने भी शिक्षा के मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया।

विद्यालय के शिक्षकों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों को महान विभूतियों के जीवन से सीखने और प्रेरणा लेने का अवसर प्रदान करते हैं।

समाज के गणमान्य लोग रहे उपस्थित

इस अवसर पर पाल समाज के कई गणमान्य वक्ताओं के साथ-साथ भीम आर्मी–आजाद समाज पार्टी के जिला एवं प्रदेश स्तर के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से नागमणि रजक, त्रिपुरारी सिंह चेरो, जिला अध्यक्ष चंदू राम, अनुराग भारती, सुहैल अंसारी, यशवंत पासवान, राहुल कुमार रवि, सूरज कुमार, मंतोष कुमार सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता एवं युवा नेता शामिल हुए।

सभी वक्ताओं ने सावित्रीबाई फुले के विचारों को आज के समय में भी प्रासंगिक बताते हुए शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

शिक्षा के प्रसार का लिया गया संकल्प

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने माता सावित्रीबाई फुले जी के विचारों को आत्मसात करने और समाज में शिक्षा के प्रसार के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया। आयोजन शांतिपूर्ण, अनुशासित और प्रेरणादायक वातावरण में संपन्न हुआ।

न्यूज़ देखो: शिक्षा से ही मजबूत होगा समाज

कौड़िया गांव में आयोजित यह कार्यक्रम साबित करता है कि जब समाज शिक्षा को आंदोलन के रूप में अपनाता है, तब बदलाव की राह खुद-ब-खुद बनती है। सावित्रीबाई फुले की जयंती पर दिया गया यह संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

शिक्षा को बनाएं आंदोलन, बराबरी का समाज गढ़ें

माता सावित्रीबाई फुले के विचार केवल इतिहास नहीं, बल्कि आज की जरूरत हैं। शिक्षा के इस संदेश को आगे बढ़ाएं, अपनी राय साझा करें और समाज में सकारात्मक बदलाव की इस मुहिम को मजबूत बनाएं।

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