
पलामू के छतरपुर में अवैध रूप से जहरीली शराब बेची जा रही है, जिसे महुआ शराब के नाम पर यूरिया, कीटनाशक दवाइयों और अन्य रासायनिक पदार्थों से मिलाया जा रहा है। नशे की लत से जूझ रहे कई युवा इस जहरीली शराब का सेवन कर अपनी जान गवा रहे हैं। पिछले दो हफ्तों में ही छतरपुर में छह युवाओं की मौत जहरीली शराब पीने से हो चुकी है।
मृतकों की सूची
मृतकों में सुनार मुहल्ला निवासी अनिल रजक (40), गोपाल रजक (35), भोला चंद्रवंशी (35), भीष्म पासवान, अनिल चंद्रवंशी, और सुनील दास शामिल हैं। इन मौतों ने स्थानीय समुदाय को गहरे शोक में डाल दिया है, लेकिन प्रशासन की लापरवाही जारी है।
शराब माफिया की निरंतर बढ़ती गतिविधियाँ
पलामू के छतरपुर में अवैध शराब फैक्ट्रियां सक्रिय हैं, जहां कीटनाशक, यूरिया और अन्य रासायनिक दवाओं का इस्तेमाल कर जहरीला शराब तैयार किया जाता है। इसके बाद इसे होटलों और ढाबों में बेचा जाता है। कई युवक इनसे संक्रमित होकर गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं, और उनकी इलाज में गरीब परिवारों को अपने जेवर, जमीन तक बेचने पड़ रहे हैं।
चिकित्सा अधिकारियों की प्रतिक्रिया
डॉ. राजेश अग्रवाल, चिकित्सा प्रभारी, ने बताया कि शराब की लत में जकड़े युवकों के लीवर पर असर पड़ा है, जिससे उनकी मौत हो गई। उन्होंने यह भी कहा कि सहिया के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन इस अवैध कारोबार पर रोकथाम की ठोस कोशिशों की आवश्यकता है।
अधिकारियों की निष्क्रियता
हालांकि, प्रशासन इस मामले में पूरी तरह से निष्क्रिय दिखाई दे रहा है। चुनाव के दौरान नाममात्र की छापेमारी की जाती है, लेकिन उसके बाद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। इससे शराब माफिया का कारोबार और बढ़ता जा रहा है, जिसका खामियाजा स्थानीय युवाओं को भुगतना पड़ रहा है।