
#Palamu_NaxalArrest: तुरीदाग पहाड़ से जीबलाल यादव की गिरफ्तारी, लेवी डायरी और पर्चा भी बरामद:
- एक लाख रुपए का इनामी टीएसपीसी उग्रवादी जीबलाल यादव गिरफ्तार
- पलामू पुलिस ने तुरीदाग पहाड़ से की छापेमारी, ASP ऑपरेशन के नेतृत्व में कार्रवाई
- गुप्त सूचना पर नौडीहा, छतरपुर और नावाबाजार थाना की संयुक्त टीम ने चलाया अभियान
- डायरी में लेवी का हिसाब, मोबाइल नंबर और संगठन की जानकारी बरामद
- बिहार और झारखंड में हत्या, वसूली और हथियार के कई मामलों में आरोपी
घटना का पूरा विवरण
पलामू जिले की पुलिस को नक्सल अभियान में बड़ी सफलता मिली है, जहां टीएसपीसी (तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी) संगठन से जुड़े एक लाख के इनामी नक्सली जीबलाल यादव को गिरफ्तार किया गया है। यह गिरफ्तारी नावाबाजार थाना क्षेत्र के तुरीदाग पहाड़ से हुई है।
एसपी रीष्मा रमेशन के निर्देशन में ASP (ऑपरेशन) राकेश कुमार सिंह के नेतृत्व में पुलिस की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर इस नक्सली को दबोचा।
गिरफ्तारी और छापेमारी की प्रक्रिया
गुप्त सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की गई, जिसमें जानकारी मिली थी कि टीएसपीसी कमांडर शशिकांत जी अपने दस्ते के साथ तुरीदाग पहाड़ के आसपास मौजूद है।
नावाबाजार, छतरपुर और नौडीहा बाजार थानों की टीमों ने संयुक्त रूप से इलाके में अभियान चलाया और एक संदिग्ध व्यक्ति को पकड़ा। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह टीएसपीसी का सक्रिय सदस्य जीबलाल यादव उर्फ रमेश यादव उर्फ सुभाष यादव है।
“गिरफ्तार उग्रवादी संगठन के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा था। उसके पास से संगठन से जुड़ी कई अहम जानकारी बरामद की गई है।”
— राकेश कुमार सिंह, एएसपी (ऑपरेशन)
बरामद सामान और दस्तावेज
पुलिस ने गिरफ्तार नक्सली के पास से टीएसपीसी संगठन का लिखित पर्चा, एक पॉकेट डायरी बरामद की है। इस डायरी में लेवी वसूली का हिसाब-किताब, विभिन्न व्यक्तियों के मोबाइल नंबर और संगठन के अन्य अहम विवरण दर्ज हैं।
अपराधियों का पुराना इतिहास
53 वर्षीय जीबलाल यादव मूल रूप से बिहार के गया जिले के भदवर थाना क्षेत्र का निवासी है, और वर्तमान में हडही गांव में रह रहा था।
बिहार और झारखंड के कई जिलों में उस पर हत्या, पुलिस पर हमला, जबरन वसूली और अवैध हथियार रखने जैसे गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। बिहार सरकार ने इस पर एक लाख रुपए का इनाम घोषित कर रखा था।
पुलिस टीम की भूमिका और कार्रवाई
यह कार्रवाई पलामू पुलिस की सक्रियता और गुप्त सूचना तंत्र की सटीकता का नतीजा है। टीएसपीसी जैसे प्रतिबंधित संगठन की कमर तोड़ने के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
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