
#बरवाडीह #आदिवासी_अधिकार : सीएनटी भूमि संरक्षण और भूमाफियाओं के विरोध में पलामू प्रमंडल स्तरीय मेदिनी सेना का गठन।
लातेहार जिले के केचकी संगम पर सोमवार को पलामू प्रमंडल स्तरीय ‘मेदिनी सेना’ का गठन किया गया। चेरो आदिवासी भैयारी पंचायत के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में आदिवासी और दलित समुदाय की सीएनटी भूमि पर कथित हमलों और अवैध कब्जों के खिलाफ संगठित संघर्ष का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। आयोजन का उद्देश्य जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए संगठित मंच तैयार करना बताया गया।
- केचकी संगम, लातेहार में पलामू प्रमंडलीय मेदिनी सेना का गठन।
- सीएनटी एक्ट 1908 के उल्लंघन और भूमाफियाओं की सक्रियता पर गंभीर आरोप।
- रामराज सिंह चेरो की अध्यक्षता में हुआ कार्यक्रम।
- अजय सिंह चेरो ने युवाओं से संगठित संघर्ष का आह्वान किया।
- लातेहार, पलामू और विभिन्न प्रखंडों के पदाधिकारियों का चयन।
- 31 जनवरी तक प्रखंड कमेटी गठन का निर्देश।
बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत केचकी संगम सोमवार को उस समय सामाजिक और राजनीतिक चेतना का केंद्र बन गया, जब पलामू प्रमंडल में आदिवासी और दलित समुदायों की भूमि की रक्षा के लिए ‘मेदिनी सेना’ का औपचारिक गठन किया गया। इस आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि जल, जंगल और जमीन के मुद्दे पर समुदायों में गहरी चिंता और आक्रोश है।
सीएनटी भूमि पर कथित हमलों को लेकर उठा मुद्दा
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश संरक्षक रामराज सिंह चेरो ने की। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि पलामू प्रमंडल के कई इलाकों में सीएनटी एक्ट के अंतर्गत संरक्षित आदिवासी और दलितों की पुस्तैनी जमीन पर भूमाफियाओं द्वारा अवैध कब्जा किया जा रहा है। कई मामलों में प्रशासन की निष्क्रियता या कथित मिलीभगत के कारण समुदायों को अपनी ही जमीन से बेदखल किया जा रहा है। वक्ताओं ने कहा कि यह केवल जमीन का मामला नहीं, बल्कि अस्तित्व, संस्कृति और भविष्य का सवाल है।
संगठन के उद्देश्य और वैचारिक आधार
उपस्थित सैकड़ों लोगों को संबोधित करते हुए त्रिपुरारी सिंह चेरो ने मेदिनी सेना के उद्देश्यों को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि संगठन जल, जंगल और जमीन की रक्षा के साथ-साथ भय, भूख और भ्रष्टाचार से मुक्ति तथा अन्याय, अत्याचार और शोषण के खिलाफ संघर्ष करेगा।
त्रिपुरारी सिंह चेरो ने कहा: “यह संगठन किसी एक व्यक्ति या क्षेत्र के लिए नहीं, बल्कि पूरे पलामू प्रमंडल के आदिवासी, दलित और पिछड़े समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए बनेगा।”
युवाओं को संगठित संघर्ष का आह्वान
प्रदेश अध्यक्ष अजय सिंह चेरो ने युवाओं से आह्वान किया कि वे महाराजा मेदिनी राय के आदर्शों पर चलते हुए जनकल्याण के लिए संगठित हों। उन्होंने कहा कि सीएनटी एक्ट 1908 का संरक्षण प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन यदि कानून का उल्लंघन होता है तो मेदिनी सेना संवैधानिक मूल्यों के तहत शांतिपूर्ण और संगठित संघर्ष करेगी।
अजय सिंह चेरो ने कहा: “पलामू प्रमंडल ऐतिहासिक रूप से आदिवासी, दलित और पिछड़े वर्गों का संरक्षण स्थल रहा है। इस पहचान को बचाने के लिए हमें एकजुट होना होगा।”
अन्य वक्ताओं ने रखे विचार
कार्यक्रम में सदर उपप्रमुख शीतल सिंह निराला, कौड़िया पंचायत समिति सदस्य अजीत सिंह चेरो, यमुना सिंह चेरो सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधन किया। सभी ने एक स्वर में कहा कि भूमि से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई नहीं होने से सामाजिक असंतोष बढ़ रहा है। ऐसे में संगठित मंच की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
कार्यक्रम का संचालन चेरो आदिवासी भैयारी पंचायत के पलामू जिला कोषाध्यक्ष सुनील सिंह चेरो ने किया, जबकि अंत में कौड़िया मुखिया पति रविंद्र सिंह चेरो ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
पदाधिकारियों का चयन और संगठनात्मक ढांचा
गठन के दौरान विभिन्न जिलों और प्रखंडों के पदाधिकारियों का चयन किया गया।
लातेहार जिला: अध्यक्ष विनय सिंह चेरो, सचिव संतु सिंह चेरो, कोषाध्यक्ष पुनीत सिंह चेरो, उपाध्यक्ष सुमन सिंह चेरो।
पलामू जिला: अध्यक्ष विश्वास सिंह चेरो (गुड्डन), सचिव सत्येंद्र नारायण सिंह चेरो, कोषाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह चेरो, उपाध्यक्ष सोनू सिंह चेरो।
चैनपुर प्रखंड: अध्यक्ष दीपक सिंह चेरो, सचिव अजय सिंह चेरो, कोषाध्यक्ष विशाल सिंह चेरो, उपाध्यक्ष करण कुमार सिंह।
सदर प्रखंड: अध्यक्ष अरुण सिंह चेरो, सचिव सतेन्द्र सिंह चेरो, कोषाध्यक्ष मनोज सिंह चेरो, उपाध्यक्ष मनोज सिंह चेरो।
तरहसी प्रखंड: अध्यक्ष बीपीन सिंह चेरो, सचिव पंकज सिंह चेरो, कोषाध्यक्ष नवीन सिंह चेरो।
सभी चयनित सदस्यों को 31 जनवरी तक अपनी-अपनी प्रखंड कमेटियों के गठन का निर्देश दिया गया। साथ ही शीघ्र ही प्रदेश स्तरीय कमेटी के विस्तार की तिथि घोषित करने की बात कही गई।

न्यूज़ देखो: भूमि अधिकारों पर बढ़ता सामाजिक संघर्ष
मेदिनी सेना का गठन यह संकेत देता है कि पलामू प्रमंडल में भूमि और संसाधनों को लेकर असंतोष गहराता जा रहा है। आदिवासी और दलित समुदाय अब संगठित होकर अपनी आवाज बुलंद करना चाहते हैं। प्रशासन के लिए यह चेतावनी भी है कि कानून के पालन में किसी भी तरह की लापरवाही सामाजिक तनाव को बढ़ा सकती है। आने वाले दिनों में संगठन की भूमिका और उसकी रणनीति पर सभी की नजरें रहेंगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जल जंगल जमीन बचाने का सामूहिक संकल्प
यह पहल बताती है कि अधिकारों की रक्षा तभी संभव है, जब समाज संगठित हो।
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