
#पलामू #मानवतस्करी : नाबालिग को मजदूरी के बहाने ले जाकर गायब करने के मामले में जिला कोर्ट का सख्त निर्णय।
पलामू जिला कोर्ट ने मानव तस्करी के एक गंभीर मामले में दो अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए कठोर सजा सुनाई है। वर्ष 2017 में नाबालिग को मजदूरी के बहाने बाहर ले जाकर लापता करने का यह मामला एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट से जुड़ा पहला एफआईआर था। अदालत ने दोनों सगे भाइयों को 10-10 वर्ष की सश्रम कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है। यह फैसला मानव तस्करी के विरुद्ध न्यायिक सख्ती का स्पष्ट संदेश देता है।
- दो अभियुक्तों को 10-10 वर्ष की सजा।
- 50-50 हजार रुपये का जुर्माना।
- मामला 2017 का, नाबालिग लापता।
- एएचटीयू थाना का पहला केस।
- जिला कोर्ट का सख्त फैसला।
पलामू जिले में मानव तस्करी के एक पुराने लेकिन गंभीर मामले में न्यायालय ने अहम फैसला सुनाया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश 09 की अदालत ने लेस्लीगंज थाना क्षेत्र के बासडीह चौरा निवासी दो सगे भाइयों को दोषी पाते हुए कठोर दंड दिया है। दोषियों की पहचान एलन पांडेय और मिथिलेश पांडेय के रूप में हुई है। अदालत ने दोनों को 10-10 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
जुर्माना नहीं देने पर अतिरिक्त सजा
अदालत ने कारावास के साथ-साथ दोनों अभियुक्तों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि अभियुक्त जुर्माने की राशि जमा नहीं करते हैं, तो उन्हें एक-एक वर्ष की अतिरिक्त कारावास भुगतनी होगी। यह फैसला मानव तस्करी जैसे अपराधों पर सख्त रुख को दर्शाता है।
2017 में नाबालिग के गायब होने से जुड़ा मामला
यह मामला वर्ष 2017 का है। लेस्लीगंज थाना क्षेत्र का रहने वाला एक नाबालिग एलन पांडेय और मिथिलेश पांडेय के साथ मजदूरी के लिए दिल्ली जा रहा था। यात्रा के दौरान ही वह नाबालिग रहस्यमय तरीके से लापता हो गया। परिजनों ने आरोप लगाया था कि दोनों भाइयों ने नाबालिग को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गए, लेकिन बाद में उसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी।
एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट का पहला एफआईआर
पूरे मामले में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) थाना के गठन के बाद यह पहला एफआईआर दर्ज किया गया था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच को प्राथमिकता दी गई। लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोनों अभियुक्तों को दोषी ठहराया।
पुलिस और जांच एजेंसियों की भूमिका
तत्कालीन एएचटीयू थाना प्रभारी इंस्पेक्टर दुलर चौड़े ने इस मुकदमे का अनुसंधान किया था। वर्तमान में वे लातेहार जिला में पदस्थापित हैं। उन्होंने बताया कि नाबालिग की खोज के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास किए गए थे।
जांच के दौरान उत्तर प्रदेश के सभी जिलों से संपर्क किया गया। पुलिस जांच में यह जानकारी सामने आई थी कि नाबालिग कानपुर और इलाहाबाद रेलवे स्टेशन के बीच कहीं गायब हुआ था। नाबालिग का सुराग पाने के लिए आरपीएफ, जीआरपी और अन्य तकनीकी माध्यमों की भी सहायता ली गई, लेकिन अभियुक्तों ने उसके संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी।
एसपी ने की सजा की पुष्टि
पलामू एसपी रीष्मा रमेशन ने दोनों अभियुक्तों को सजा सुनाए जाने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि यह फैसला मानव तस्करी के मामलों में पुलिस और न्यायपालिका की गंभीरता को दर्शाता है और ऐसे अपराधों में संलिप्त लोगों के लिए कड़ा संदेश है।
न्यूज़ देखो: मानव तस्करी पर सख्त रुख का संकेत
यह फैसला बताता है कि मानव तस्करी जैसे संगीन अपराधों में कानून अब किसी भी स्तर पर नरमी बरतने को तैयार नहीं है। नाबालिगों की सुरक्षा और दोषियों को सजा दिलाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अपराध के खिलाफ सजगता ही सुरक्षा की कुंजी
मानव तस्करी जैसे अपराध समाज के लिए गंभीर खतरा हैं।
संदिग्ध गतिविधियों की सूचना समय पर देना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
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