
#देवघर #आजीविका_उत्सव : देशभर की दीदियों के हस्तनिर्मित उत्पादों ने सरस मेले में दिखाया आत्मनिर्भर भारत का सशक्त स्वरूप।
देवघर जिले में आयोजित पलाश आजीविकोत्सव सरस मेला 2026 का 31 जनवरी को औपचारिक समापन हुआ। 25 जनवरी से शुरू हुए इस मेले में देश के विभिन्न राज्यों से आई स्वयं सहायता समूह की दीदियों ने अपने हस्तनिर्मित उत्पादों का प्रदर्शन और विक्रय किया। समापन समारोह में मेले की उपलब्धियों, महिला उद्यमिता और ग्रामीण आजीविका को मिले प्रोत्साहन को रेखांकित किया गया। यह आयोजन आत्मनिर्भरता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुआ।
- 25 से 31 जनवरी 2026 तक देवघर में आयोजित हुआ पलाश आजीविकोत्सव सरस मेला।
- देश के विभिन्न राज्यों से आई सखी मंडल दीदियों ने लगाए स्टॉल।
- हस्तनिर्मित उत्पादों को मिला व्यापक बाजार और सराहना।
- उप विकास आयुक्त पियूष सिन्हा ने की महिला उद्यमिता की सराहना।
- बेहतर प्रदर्शन करने वाली दीदियां समापन समारोह में सम्मानित।
देवघर जिले में आयोजित पलाश आजीविकोत्सव सरस मेला 2026 न केवल एक प्रदर्शनी रहा, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की मेहनत, हुनर और आत्मनिर्भरता का जीवंत उत्सव बनकर उभरा। 25 जनवरी से 31 जनवरी 2026 तक चले इस मेले में देशभर से आई सखी मंडल की दीदियों ने अपने-अपने स्टॉल लगाकर हस्तनिर्मित उत्पादों को प्रदर्शित किया। मेले के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों ने शिरकत की और विभिन्न राज्यों की कला, संस्कृति और स्वाद से रूबरू हुए।
सरस मेला बना महिला उद्यमिता का मंच
पलाश आजीविकोत्सव सरस मेला का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को बाजार उपलब्ध कराना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना रहा। इस आयोजन के माध्यम से दीदियों को सीधे ग्राहकों से जुड़ने का अवसर मिला। इससे न केवल उत्पादों की बिक्री हुई, बल्कि महिलाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ा।
मेले में झारखंड के सभी जिलों के साथ-साथ अन्य राज्यों से आई दीदियों ने भाग लिया। उनके द्वारा लगाए गए स्टॉलों पर स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक वस्त्र, घरेलू उपयोग की सामग्री और खाद्य उत्पादों की अच्छी खासी मांग देखने को मिली।
हस्तनिर्मित उत्पादों की रही खास पहचान
सरस मेले में हस्तनिर्मित उत्पादों की समृद्ध श्रृंखला आकर्षण का केंद्र रही। इसमें रेशम वस्त्र, बांस से बने सजावटी और उपयोगी सामान, मिट्टी के बर्तन, जूट उत्पाद, पारंपरिक आभूषण, मसाले, अचार, पापड़ और स्थानीय व्यंजन शामिल रहे। प्रत्येक स्टॉल अपने राज्य और जिले की पहचान को दर्शा रहा था।
ग्राहकों ने इन उत्पादों की गुणवत्ता, पारंपरिक डिजाइन और किफायती दामों की सराहना की। कई दीदियों ने बताया कि मेले के दौरान उन्हें उम्मीद से बेहतर बिक्री का अनुभव हुआ, जिससे भविष्य में उत्पादन बढ़ाने की प्रेरणा मिली।
खानपान और संस्कृति ने जोड़ा लोगों को
मेले का एक बड़ा आकर्षण विभिन्न राज्यों के पारंपरिक खानपान स्टॉल रहे। यहां आगंतुकों को अलग-अलग क्षेत्रों के व्यंजन चखने का अवसर मिला। इसके साथ ही वेशभूषा, लोक कला और संस्कृति से जुड़े उत्पादों ने मेले को बहुरंगी स्वरूप प्रदान किया।
देवघरवासियों के लिए यह मेला एक ही स्थान पर देश की विविधता को देखने और समझने का अवसर बना। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी वर्गों ने मेले का भरपूर आनंद लिया।
समापन समारोह में अधिकारियों का संदेश
समापन समारोह को संबोधित करते हुए उप विकास आयुक्त पियूष सिन्हा ने कहा कि सरस मेला यह प्रमाणित करता है कि स्वयं सहायता समूह की दीदियों द्वारा बनाए गए उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में झारखंड समेत विभिन्न राज्यों से आई दीदी उद्यमियों ने अपनी मेहनत, हुनर और आत्मनिर्भरता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया है।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे आयोजन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देते हैं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भविष्य में भी इस तरह के मंच उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि दीदियों को अपने उत्पादों के लिए स्थायी बाजार मिल सके।
बेहतर प्रदर्शन करने वाली दीदियों का सम्मान
समापन अवसर पर उन दीदियों और स्वयं सहायता समूहों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने मेले के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। बेहतर बिक्री, आकर्षक प्रस्तुति और गुणवत्ता के आधार पर चयनित दीदियों को सम्मान मिलने से उनमें नई ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ।
सम्मान समारोह ने यह संदेश दिया कि मेहनत और कौशल को पहचान और सम्मान मिलता है। इससे अन्य समूहों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली।
ग्रामीण आजीविका को मिला नया आयाम
पलाश आजीविकोत्सव सरस मेला 2026 ने यह साबित किया कि यदि सही मंच और अवसर मिले, तो ग्रामीण महिलाएं भी सफल उद्यमी बन सकती हैं। यह मेला केवल कुछ दिनों का आयोजन नहीं, बल्कि दीर्घकालिक प्रभाव छोड़ने वाला प्रयास रहा, जिसने महिला सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन को नई दिशा दी।

न्यूज़ देखो: आत्मनिर्भरता की जमीनी तस्वीर
सरस मेला 2026 ने ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक क्षमता और बाजार की संभावनाओं को उजागर किया है। यह आयोजन दिखाता है कि स्वयं सहायता समूह आत्मनिर्भर भारत की मजबूत कड़ी बन सकते हैं। अब जरूरत है कि ऐसे मेलों को और नियमित तथा व्यापक बनाया जाए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
हुनर को पहचान, मेहनत को सम्मान
ग्रामीण महिलाओं की सफलता पूरे समाज के लिए प्रेरणा है।
ऐसे आयोजनों से आत्मनिर्भरता और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।
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