
#पलामू #प्रशासनिक_लापरवाही : स्थायी अधिकारियों के अभाव में विकास कार्य ठप, जनता और जनप्रतिनिधियों में बढ़ता आक्रोश।
पलामू जिले का पाण्डु प्रखंड बीते कई महीनों से गंभीर प्रशासनिक संकट से गुजर रहा है, जहां न तो स्थायी प्रखंड विकास पदाधिकारी हैं और न ही अंचल अधिकारी। पूरा प्रखंड प्रभारी व्यवस्था के भरोसे संचालित हो रहा है, जिससे सरकारी योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। सप्ताह में केवल कुछ दिन अधिकारी की मौजूदगी के कारण आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति ने प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- पाण्डु प्रखंड, पलामू में महीनों से नहीं है स्थायी बीडीओ और सीओ।
- एक ही पदाधिकारी को दोनों पदों का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया।
- अधिकारी की उपस्थिति सप्ताह में मात्र तीन दिन।
- 10 पंचायतों का प्रशासन प्रभारी व्यवस्था पर निर्भर।
- आवास, पेंशन, प्रमाण पत्र और भूमि विवाद जैसे कार्य प्रभावित।
- जनप्रतिनिधियों और संगठनों ने आंदोलन की चेतावनी दी।
पलामू जिले का पाण्डु प्रखंड इन दिनों प्रशासनिक अराजकता और सरकारी उदासीनता का प्रतीक बनता जा रहा है। यहां महीनों से न तो स्थायी प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) की नियुक्ति है और न ही अंचल अधिकारी (सीओ) का पद भरा गया है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक दृष्टि से चिंताजनक है, बल्कि सीधे तौर पर हजारों ग्रामीणों के दैनिक जीवन और अधिकारों को प्रभावित कर रही है।
प्रभारी व्यवस्था पर चल रहा पूरा प्रखंड
पाण्डु प्रखंड के अंतर्गत कुल 10 पंचायतें आती हैं, लेकिन इतने बड़े प्रशासनिक क्षेत्र को केवल प्रभारी व्यवस्था के सहारे चलाया जा रहा है। वर्तमान में एक ही पदाधिकारी को बीडीओ और सीओ दोनों का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, जो सप्ताह में मात्र तीन दिन ही प्रखंड कार्यालय में उपस्थित रहते हैं। शेष दिनों में पूरा प्रखंड बिना किसी स्थायी नेतृत्व के काम करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकारी की अनुपस्थिति में न तो फाइलों का निष्पादन होता है और न ही जनसमस्याओं का समाधान। प्रखंड कार्यालय मानो सिर्फ नाम का रह गया है।
सरकारी योजनाएं ठप, जनता बेहाल
स्थायी अधिकारियों के अभाव का सबसे बड़ा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना, वृद्धा-विधवा पेंशन, जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र, भूमि विवाद, मनरेगा समेत कई अहम योजनाएं और सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हैं।
ग्रामीण रोज़ प्रखंड कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन, टालमटोल और अगली तारीख ही मिलती है। कई मामलों में जरूरी दस्तावेज़ महीनों से लंबित पड़े हैं।
प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब प्रखंड में स्थायी अधिकारी ही नहीं हैं, तो सरकार जवाबदेही किससे तय करेगी। क्या पाण्डु प्रखंड सरकार की प्राथमिकताओं से बाहर हो चुका है, या फिर यह लापरवाही जानबूझकर बरती जा रही है—यह प्रश्न अब खुलकर उठने लगे हैं।
जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों का फूटा गुस्सा
इस गंभीर स्थिति को लेकर जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों का सब्र जवाब देने लगा है। उन्होंने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र स्थायी बीडीओ और सीओ की नियुक्ति नहीं की गई, तो वे आंदोलन और सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे।
पाण्डु प्रमुख की प्रतिक्रिया
पाण्डु प्रमुख नीतू सिंह ने कहा कि प्रखंड को तत्काल स्थायी बीडीओ और सीओ मिलना चाहिए।
नीतू सिंह ने कहा: “स्थायी अधिकारियों के अभाव में विकास कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं। लगभग छह माह पूर्व मैंने स्वयं माननीय मंत्री दीपिका पांडे सिंह को आवेदन सौंपा था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।”
राजनीतिक दलों का आरोप
झामुमो प्रखंड अध्यक्ष इरफान आलम ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से अविलंब स्थायी अधिकारियों की नियुक्ति की मांग की।
इरफान आलम ने कहा: “अब और देरी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
राजद प्रखंड अध्यक्ष शमशेर आलम ने इस स्थिति को साजिश करार देते हुए कहा कि पाण्डु प्रखंड को जानबूझकर विकास से दूर रखा जा रहा है।
शमशेर आलम ने कहा: “स्थायी अधिकारियों का न होना विकास कार्यों को रोकने जैसा है।”
पूर्व जिला परिषद सदस्य का बयान
पूर्व जिला परिषद सदस्य अनिल चंद्रवंशी ने जिला प्रशासन पर सीधा सवाल उठाते हुए कहा कि यह खुली नाकामी है।
अनिल चंद्रवंशी ने कहा: “इस लापरवाही ने पाण्डु प्रखंड को कम से कम दस साल पीछे धकेल दिया है।”
प्रशासनिक उदासीनता या सिस्टम की विफलता?
पाण्डु प्रखंड की मौजूदा स्थिति केवल एक प्रखंड की समस्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की व्यापक विफलता को उजागर करती है। स्थायी अधिकारियों की नियुक्ति जैसे बुनियादी विषय पर महीनों तक निर्णय न होना शासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
न्यूज़ देखो: सिस्टम की कमजोरी उजागर करता पाण्डु प्रखंड
पाण्डु प्रखंड की स्थिति बताती है कि प्रभारी व्यवस्था लंबे समय तक किसी भी प्रशासनिक इकाई को सुचारू रूप से नहीं चला सकती। स्थायी बीडीओ और सीओ की अनुपस्थिति ने विकास, योजनाओं और जनसेवाओं को ठप कर दिया है। अब निगाहें जिला प्रशासन और राज्य सरकार पर टिकी हैं कि वे इस गंभीर लापरवाही पर कब कार्रवाई करते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जागरूक जनता ही बदलाव की ताकत
प्रशासनिक लापरवाही का सबसे बड़ा असर आम नागरिकों पर पड़ता है। यदि समस्याओं पर समय रहते आवाज नहीं उठाई गई, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें, सवाल पूछें और जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाएं। इस खबर को साझा करें, अपनी राय कमेंट में रखें और जिम्मेदार प्रशासन की मांग को और मजबूत बनाएं।





