
#रामगढ़ #पातोबांध #बालविवाहमुक्त_ग्राम : ग्रामीणों ने सामूहिक शपथ लेकर सामाजिक बदलाव की मजबूत नींव रखी।
रामगढ़ प्रखंड के लखनपुर पंचायत अंतर्गत पातोबांध गाँव में 4 फरवरी 2026 को विशेष ग्राम सभा आयोजित कर बाल विवाह के खिलाफ ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। ग्राम प्रधान देवेंद्र हेंब्रम की अध्यक्षता में हुई इस सभा में पंचायत प्रतिनिधि, स्वास्थ्य एवं शिक्षा कर्मी, धर्मगुरु और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। सभी ने सर्वसम्मति से गाँव को “बाल विवाह मुक्त ग्राम” बनाने का संकल्प लिया, जो बाल अधिकार संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
- पातोबांध गाँव में 4 फरवरी 2026 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन।
- ग्राम प्रधान देवेंद्र हेंब्रम की अध्यक्षता में हुआ कार्यक्रम।
- पंचायत प्रतिनिधि, स्वास्थ्य-शिक्षा कर्मी और धर्मगुरु रहे उपस्थित।
- बाल विवाह के सामाजिक, कानूनी और स्वास्थ्य दुष्प्रभावों पर विस्तृत चर्चा।
- सभी ग्रामीणों ने सामूहिक शपथ लेकर बाल विवाह न करने का लिया संकल्प।
रामगढ़ प्रखंड के लखनपुर पंचायत अंतर्गत पातोबांध गाँव में आयोजित विशेष ग्राम सभा ने सामाजिक बदलाव की दिशा में एक सशक्त संदेश दिया है। इस सभा का मुख्य उद्देश्य गाँव में बाल विवाह जैसी कुप्रथा को पूरी तरह समाप्त करना और आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित, शिक्षित और सशक्त भविष्य देना रहा। सभा में ग्रामीणों की भागीदारी और एकजुटता ने यह स्पष्ट कर दिया कि समाज अब इस सामाजिक बुराई के खिलाफ जागरूक हो चुका है।
ग्राम सभा की अध्यक्षता ग्राम प्रधान देवेंद्र हेंब्रम ने की, जबकि पंचायत प्रतिनिधियों के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग के कर्मी और स्थानीय धर्मगुरुओं की भी सक्रिय मौजूदगी रही। बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, बुजुर्ग और युवा ग्रामीणों ने इसमें हिस्सा लेकर इस संकल्प को सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार किया।
ग्राम सभा में क्यों उठा बाल विवाह का मुद्दा
सभा के दौरान वक्ताओं ने बताया कि बाल विवाह न केवल एक सामाजिक बुराई है, बल्कि यह बच्चों के मौलिक अधिकारों का भी गंभीर उल्लंघन है। कम उम्र में विवाह बच्चों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास को प्रभावित करता है। विशेष रूप से बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर इसके दूरगामी नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं।
स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि कम उम्र में विवाह और गर्भधारण से मातृ मृत्यु दर, कुपोषण और शिशु मृत्यु दर का खतरा बढ़ जाता है। वहीं शिक्षा कर्मियों ने कहा कि बाल विवाह बच्चों की पढ़ाई छीन लेता है और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के अवसरों से वंचित कर देता है।
कानूनी पहलुओं पर दी गई जानकारी
ग्राम सभा में बाल विवाह से जुड़े कानूनी प्रावधानों की भी विस्तार से जानकारी दी गई। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत यह एक दंडनीय अपराध है। इसमें शामिल लोगों पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
ग्रामीणों को बताया गया कि कानून केवल दंड देने के लिए नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और उनके बेहतर भविष्य के लिए बनाया गया है। यदि समाज खुद जागरूक होकर इस कुप्रथा को रोक ले, तो कानूनी हस्तक्षेप की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी।
धर्मगुरुओं और पंचायत की अहम भूमिका
सभा में उपस्थित धर्मगुरुओं ने भी बाल विवाह के खिलाफ स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म में बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ की अनुमति नहीं है। समाज में फैली गलत परंपराओं को धर्म के नाम पर सही ठहराना अनुचित है।
पंचायत प्रतिनिधियों ने आश्वासन दिया कि पंचायत स्तर पर बाल विवाह रोकने के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत किया जाएगा। किसी भी संदिग्ध मामले की सूचना तुरंत प्रशासन और संबंधित विभागों को दी जाएगी।
सामूहिक शपथ ने बढ़ाया संकल्प का भरोसा
सभा के अंत में सभी ग्रामीणों ने खड़े होकर सामूहिक शपथ ली कि वे न तो अपने घर में और न ही अपने गाँव में बाल विवाह होने देंगे। साथ ही यदि कहीं भी इस तरह की सूचना मिलेगी, तो वे उसे रोकने के लिए आगे आएंगे।
यह सामूहिक शपथ केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की सार्वजनिक घोषणा के रूप में देखी जा रही है। ग्रामीणों ने इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य की नींव बताया।
सामाजिक जागरूकता की दिशा में मजबूत कदम
पातोबांध गाँव का यह निर्णय दर्शाता है कि जब समाज खुद आगे बढ़कर पहल करता है, तो बदलाव संभव है। बाल विवाह जैसी गहरी जड़ें जमाए कुप्रथा को खत्म करने के लिए सरकारी प्रयासों के साथ-साथ सामुदायिक सहभागिता सबसे अहम होती है।
ग्रामीणों का मानना है कि शिक्षा, जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी के जरिए ही इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है। पातोबांध का यह कदम आसपास के गाँवों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।
न्यूज़ देखो: बदलाव की मिसाल बना पातोबांध
पातोबांध गाँव ने यह साबित कर दिया कि सामाजिक बदलाव केवल नीतियों से नहीं, बल्कि जनभागीदारी से आता है। बाल विवाह मुक्त ग्राम बनने का संकल्प बच्चों के अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा की दिशा में मजबूत संदेश देता है। अब सवाल यह है कि क्या अन्य पंचायतें भी इस पहल से प्रेरणा लेकर आगे आएंगी।
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बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना ही सच्ची प्रगति
बाल विवाह रोकना केवल कानून का पालन नहीं, बल्कि समाज की नैतिक जिम्मेदारी है।
जब पूरा गाँव एक साथ खड़ा होता है, तभी कुप्रथाओं की जड़ें कमजोर पड़ती हैं।
यदि आप भी बच्चों के अधिकारों और उज्ज्वल भविष्य में विश्वास रखते हैं, तो इस खबर को साझा करें।
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