#खलारी #मैकलुस्कीगंज #रैयत_आंदोलन : नौकरी व मुआवजा मांग पर 10 मार्च को बंदी का ऐलान।
खलारी क्षेत्र के मैकलुस्कीगंज पिपरवार राजधर साइडिंग रेल लाइन फेज वन से जुड़े रैयतों ने नौकरी और मुआवजा की मांग को लेकर 10 मार्च को बंदी की घोषणा की है। हेसालोंग गंझु टोला में आयोजित बैठक में सीसीएल प्रबंधन पर देरी का आरोप लगाते हुए आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया गया। रैयत विस्थापित मोर्चा के नेतृत्व में कोयला ढुलाई बाधित करने की चेतावनी दी गई है।
- मैकलुस्कीगंज–पिपरवार रेल लाइन फेज वन रैयतों की बैठक हेसालोंग गंझु टोला में आयोजित।
- नेतृत्व में शिवनारायण लोहरा, अध्यक्ष रैयत विस्थापित मोर्चा रोहिणी करकट्टा ओसीपी शाखा।
- 10 मार्च को बंदी व कोयला ढुलाई बाधित करने की चेतावनी।
- रैयतों ने सीसीएल अशोक पिपरवार एरिया प्रबंधन पर देरी का आरोप लगाया।
- बैठक में उपस्थित: हेमलाल गंझु, कृष्णा भोगता, सुकर गंझु, विनय टोप्पो, रमेश साहू, रंजीत मुंडा, ताहिर अंसारी, सुनील मुंडा, मगरा मुंडा।
खलारी क्षेत्र में एक बार फिर रैयतों का आंदोलन तेज होने की तैयारी दिख रही है। मैकलुस्कीगंज पिपरवार राजधर साइडिंग रेल लाइन फेज वन से प्रभावित रैयतों ने नौकरी और मुआवजा की मांग को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। हेसालोंग गंझु टोला में आयोजित बैठक में रैयतों ने एक स्वर में 10 मार्च को बंदी करने की घोषणा करते हुए स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई तो वे चरणबद्ध आंदोलन के साथ कोयला ढुलाई भी बाधित करेंगे।
हेसालोंग गंझु टोला में हुई अहम बैठक
रैयत विस्थापित मोर्चा रोहिणी करकट्टा ओसीपी शाखा अध्यक्ष शिवनारायण लोहरा के नेतृत्व में आयोजित इस बैठक में मैकलुस्कीगंज पिपरवार राजधर साइडिंग रेल लाइन फेज वन से जुड़े रैयतों ने अपनी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में ग्रामीणों ने कहा कि वर्षों से नौकरी और मुआवजा के लिए वे लगातार आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन अब तक कई रैयतों को उनका अधिकार नहीं मिल सका है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सत्यापन और अन्य कागजी प्रक्रिया में अनावश्यक देरी के कारण उन्हें बार-बार कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जिससे उनमें भारी आक्रोश व्याप्त है।
नौकरी में देरी को लेकर सीसीएल प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी
बैठक के दौरान रैयतों ने सीसीएल अशोक पिपरवार एरिया प्रबंधन के प्रति नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना था कि प्रबंधन की ओर से पहले नौकरी देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब भी कई फाइलें सत्यापन के लिए लंबित हैं।
शिवनारायण लोहरा ने कहा:
“फेज वन के रैयत नौकरी और मुआवजा के लिए कई वर्षों से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन अब तक कई लोगों को नौकरी नहीं मिल पाई है। इससे रैयत ग्रामीणों में काफी आक्रोश है।”
उन्होंने यह भी कहा कि लगातार आंदोलन और मांगों के बावजूद फाइल सत्यापन की प्रक्रिया में तेजी नहीं लाई जा रही है, जो रैयतों के साथ अन्याय के समान है।
सत्यापन प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग
बैठक में रैयतों ने मांग की कि लंबित फाइलों का जल्द से जल्द सत्यापन कर प्रक्रिया पूरी की जाए ताकि प्रभावित परिवारों को उनका हक और अधिकार मिल सके। उन्होंने प्रशासन और सीसीएल प्रबंधन से समन्वय बनाकर शीघ्र समाधान निकालने की अपील की।
शिवनारायण लोहरा ने कहा:
“सीसीएल पिपरवार प्रबंधन ने रैयतों को जल्द नौकरी देने का आश्वासन दिया था, इसलिए सत्यापन की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाना चाहिए।”
10 मार्च को बंदी और कोयला ढुलाई रोकने की चेतावनी
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि समय से पहले सकारात्मक पहल नहीं हुई तो 10 मार्च को मैकलुस्कीगंज पिपरवार रेल लाइन फेज वन क्षेत्र में बंदी की जाएगी। रैयतों ने चेतावनी दी कि वे जोरदार आंदोलन करते हुए फेज वन में कोयला ढुलाई को बाधित करेंगे।
ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि इस बार वे आरपार की लड़ाई के मूड में हैं और अपने अधिकारों से पीछे नहीं हटेंगे। उनका आरोप है कि वर्षों से प्रभावित परिवारों को रोजगार और मुआवजा के मामले में टालमटोल की नीति अपनाई जा रही है।
आंदोलन में शामिल हुए कई ग्रामीण और रैयत
बैठक में बड़ी संख्या में रैयत और ग्रामीण उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से हेमलाल गंझु, कृष्णा भोगता, सुकर गंझु, विनय टोप्पो, रमेश साहू, रंजीत मुंडा, ताहिर अंसारी, सुनील मुंडा, मगरा मुंडा सहित कई लोगों ने अपनी बातें रखीं और आंदोलन को समर्थन दिया।
सभी ने एक स्वर में कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा और प्रशासन को मजबूरन हस्तक्षेप करना पड़ेगा।
प्रबंधन से छल नहीं करने की चेतावनी
बैठक के दौरान नेताओं ने यह भी कहा कि रैयतों के साथ किसी भी प्रकार का छल या देरी अब स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रबंधन यदि समय रहते ठोस पहल नहीं करता है, तो इसका सीधा असर परियोजना और कोयला परिवहन पर पड़ सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना से प्रभावित परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देना कंपनी और प्रशासन की जिम्मेदारी है।
न्यूज़ देखो: रैयतों की नाराजगी अब आंदोलन में बदलने की कगार पर
मैकलुस्कीगंज पिपरवार रेल लाइन फेज वन का यह मामला केवल नौकरी की मांग नहीं बल्कि विस्थापित रैयतों के अधिकार से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। वर्षों से लंबित सत्यापन और रोजगार प्रक्रिया प्रशासनिक संवेदनशीलता की परीक्षा ले रही है। यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो कोयला ढुलाई बाधित होने से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अधिकार और सम्मान के लिए आवाज उठाना ही लोकतंत्र की ताकत है
रैयतों का संघर्ष हमें यह याद दिलाता है कि विकास के साथ न्याय भी उतना ही जरूरी है।
प्रभावित परिवारों को समय पर नौकरी और मुआवजा मिलना उनका अधिकार है, कोई उपकार नहीं।
संवाद, पारदर्शिता और संवेदनशील प्रशासन से ही ऐसे विवादों का समाधान संभव है।
जरूरी है कि सभी पक्ष शांतिपूर्ण तरीके से समाधान की दिशा में आगे बढ़ें।
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