
#डंडा #गढ़वा #प्रखंड_अस्तित्व : प्रखंड की मान्यता रद्द की अनुशंसा के विरोध में जनआंदोलन तेज हुआ।
गढ़वा जिले के डंडा प्रखंड में प्रशासनिक अनुशंसा के खिलाफ व्यापक जनविरोध देखने को मिला। प्रखंड की मान्यता समाप्त किए जाने की आशंका के बीच डंडा प्रखंड बचाओ संघर्ष समिति के आह्वान पर एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित हुआ। बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों ने इसमें भाग लिया। आंदोलन के माध्यम से प्रशासन को स्पष्ट संदेश दिया गया कि जनभावनाओं की अनदेखी स्वीकार्य नहीं है।
- डंडा प्रखंड बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले एकदिवसीय धरना।
- उपायुक्त की अनुशंसा के खिलाफ सड़कों पर उतरा जनसैलाब।
- महिला, पुरुष, युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल।
- भाकपा माले, झामुमो सहित विभिन्न संगठनों का समर्थन।
- बीडीओ को मांग पत्र सौंपकर निर्णय वापस लेने की मांग।
- सड़क से सदन तक आर-पार की लड़ाई का ऐलान।
गढ़वा जिले के डंडा प्रखंड में शुक्रवार को अभूतपूर्व जनआंदोलन देखने को मिला, जब डंडा प्रखंड के अस्तित्व को बचाने के लिए सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। डंडा प्रखंड बचाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में आयोजित इस एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन में प्रखंड क्षेत्र के सभी वर्गों के लोग शामिल हुए। महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और जनप्रतिनिधियों की भारी उपस्थिति ने आंदोलन को व्यापक स्वरूप दे दिया।
प्रखंड कार्यालय के समक्ष जोरदार धरना-प्रदर्शन
धरना-प्रदर्शन डंडा प्रखंड कार्यालय के समक्ष आयोजित किया गया, जहां प्रदर्शनकारियों ने उपायुक्त द्वारा डंडा प्रखंड की मान्यता रद्द करने की अनुशंसा के खिलाफ कड़ा विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए स्पष्ट कहा कि डंडा प्रखंड किसी की कृपा से नहीं, बल्कि लंबे जनसंघर्ष और आंदोलन के बाद अस्तित्व में आया है, इसलिए इसे किसी भी सूरत में समाप्त नहीं होने दिया जाएगा।
संघर्ष समिति का स्पष्ट संदेश
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डंडा प्रखंड बचाओ संघर्ष समिति से जुड़े विभिन्न दलों के नेताओं ने कहा कि यदि प्रशासन जनभावनाओं के विरुद्ध निर्णय लेने पर अड़ा रहा, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। नेताओं ने कहा कि प्रखंड की रक्षा के लिए जनता हर प्रकार की कुर्बानी देने को तैयार है और यह लड़ाई अंत तक लड़ी जाएगी।
कालीचरण मेहता का तीखा प्रहार
सभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले जिला सचिव सह संघर्ष समिति के अध्यक्ष कालीचरण मेहता ने कहा:
“डंडा की जनता को सभी भेदभाव भुलाकर एकजुट रहना होगा। उपायुक्त द्वारा प्रखंड हटाने की अनुशंसा जनता की आकांक्षाओं पर सीधा हमला है, जिसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।”
उन्होंने चेतावनी दी कि जो भी डंडा के अधिकारों पर हमला करेगा, उसे जनता एकजुट होकर मुंहतोड़ जवाब देगी।
प्रशासनिक तर्कों पर सवाल
पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष सुषमा मेहता ने प्रशासनिक और वित्तीय मापदंडों के आधार पर प्रखंड एवं अंचल की मान्यता रद्द करने की अनुशंसा को हास्यास्पद करार दिया। उन्होंने कहा कि विकेंद्रीकरण से ही विकास योजनाओं का सही क्रियान्वयन संभव है और छोटे प्रखंड बनने से आम जनता को समय और धन दोनों की बचत होती है।
सौतेले व्यवहार का आरोप
डंडा की वर्तमान जिला पार्षद अजय कुमार चौधरी उर्फ अजय मेटल ने कहा कि गढ़वा जिले के अन्य प्रखंड जैसे विशुनपुरा, बड़गढ़, सगमा, खरौंधी क्या सभी मानक मापदंड पूरे करते हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि उपायुक्त ने डंडा के साथ सौतेला व्यवहार करते हुए गुपचुप तरीके से प्रखंड की मान्यता रद्द करने की अनुशंसा सरकार को भेजी है।
उन्होंने कहा:
“हम लोग चुप बैठने वाले नहीं हैं। चट्टानी एकता के साथ सड़क से सदन तक आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।”
आम जनता पर पड़ने वाले प्रभाव
छपरदगा पंचायत समिति की पूर्व सदस्य रहीना बीबी ने कहा कि यदि डंडा प्रखंड हटाया गया तो आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। वहीं भीखही पंचायत के मुखिया वीरेंद्र चौधरी ने कहा कि यदि किसी मापदंड में कमी है तो उसका विस्तार किया जा सकता है, लेकिन प्रखंड को समाप्त करने की अनुशंसा दुर्भाग्यपूर्ण है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की याद दिलाई
संघर्ष समिति के उपाध्यक्ष सह झामुमो प्रखंड अध्यक्ष कामेश्वर चौधरी ने बताया कि 4 अक्टूबर 2008 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिबू सोरेन ने डंडा प्रखंड का उद्घाटन किया था। करीब 20 वर्षों से प्रखंड संचालित है और करोड़ों रुपये की लागत से सरकारी भवनों का निर्माण हुआ है। उन्होंने कहा कि जनता और जनप्रतिनिधियों की राय के बिना लिया गया निर्णय नौकरशाही मानसिकता को दर्शाता है।
आंदोलन को मिला बाहरी समर्थन
पलामू भाकपा माले जिला सचिव रविंद्र भुइंया ने भी आंदोलन को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की। इसके अलावा डंडा मुखिया रूपा देवी सहित कई अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी सभा को संबोधित करते हुए प्रखंड के अस्तित्व की रक्षा का संकल्प दोहराया।
संचालन और सहभागिता
कार्यक्रम की अध्यक्षता कालीचरण मेहता ने की, जबकि संचालन तौकीर आलम ने किया। धन्यवाद ज्ञापन जवाहर चौधरी द्वारा प्रस्तुत किया गया।
धरना-प्रदर्शन में डंडा प्रमुख प्रतिनिधि चंदन कुमार चौधरी, पूर्व जिला पार्षद विजय चौधरी, पूर्व मुखिया नंदू चौधरी, नरेश विश्वकर्मा, उप प्रमुख नंदू चौधरी, अनिल कुमार चौधरी, सुनील गुप्ता, गुड्डू प्रसाद गुप्ता, राकेश गुप्ता, उपेन्द्र कुमार चौधरी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

न्यूज़ देखो: प्रशासनिक फैसलों पर जनभावनाओं की अनदेखी भारी पड़ सकती है
डंडा प्रखंड में उमड़ा जनसैलाब यह स्पष्ट करता है कि प्रशासनिक निर्णय केवल फाइलों तक सीमित नहीं रह सकते। जनसहमति और जमीनी हकीकत की अनदेखी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक है। अब देखना होगा कि सरकार और प्रशासन इस जनआवाज को कितनी गंभीरता से लेते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
लोकतंत्र में आवाज उठाना ही सबसे बड़ा अधिकार
डंडा की जनता ने यह दिखा दिया कि अपने अधिकारों और अस्तित्व की रक्षा के लिए एकजुट होना कितना जरूरी है। यदि आप भी मानते हैं कि प्रशासनिक फैसलों में जनभावनाओं का सम्मान होना चाहिए, तो अपनी राय साझा करें। इस खबर को आगे बढ़ाएं, चर्चा में भाग लें और जागरूक नागरिक होने का दायित्व निभाएं।







