
#खूंटी #शहादत_दिवस : डोम्बारी बुरू में बिरसा उलगुलान के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके संघर्ष को किया गया स्मरण।
खूंटी जिले के ऐतिहासिक डोम्बारी बुरू में शुक्रवार को बिरसा उलगुलान के शहीदों की स्मृति में श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में राज्य सरकार के मंत्री, वर्तमान एवं पूर्व जनप्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। सभी ने भगवान बिरसा मुंडा और अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ शहादत देने वाले वीरों को नमन किया। यह आयोजन आदिवासी इतिहास, संघर्ष और स्वाभिमान की विरासत को जीवंत रखने का प्रतीक बना।
- डोम्बारी बुरू में आयोजित हुआ शहादत दिवस समारोह।
- भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण।
- राज्य मंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री हुए शामिल।
- शहीदों की स्मृति शिला पर अर्पित किए गए फूल।
- सांस्कृतिक कार्यक्रम और ग्रामीण सहभागिता रही विशेष।
खूंटी जिले के डोम्बारी बुरू में आयोजित इस श्रद्धांजलि समारोह में बिरसा उलगुलान के शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और दूर-दराज से पहुंचे ग्रामीणों की बड़ी भागीदारी रही। आयोजन का उद्देश्य आदिवासी समाज के ऐतिहासिक संघर्ष और शहादत को याद करते हुए नई पीढ़ी को उससे जोड़ना रहा।
आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण, शहीदों को नमन
समारोह के दौरान राज्य की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, खूंटी विधायक रामसूर्या मुंडा, कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी, पूर्व विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा समेत कई जनप्रतिनिधियों ने भगवान बिरसा मुंडा की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद अंग्रेजों की गोलीबारी में शहीद हुए वीरों की स्मृति में स्थापित शिला पर फूल अर्पित कर सभी ने उन्हें नमन किया।
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की का संदेश
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा:
“डोम्बारी बुरू केवल एक स्थल नहीं है, बल्कि यह जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए लड़ी गई ऐतिहासिक लड़ाई का प्रतीक है।”
उन्होंने कहा कि शिक्षा समाज के विकास की सबसे मजबूत नींव है और समाज की एकजुटता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति होती है। उन्होंने आदिवासी समाज से शिक्षा और संगठन के माध्यम से आगे बढ़ने का आह्वान किया।
अर्जुन मुंडा ने उलगुलान की विरासत पर डाला प्रकाश
पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा:
“भगवान बिरसा मुंडा द्वारा शुरू किया गया उलगुलान आदिवासी समाज को स्वाभिमान और जागरूकता का रास्ता दिखाता है।”
उन्होंने अधिकारों के प्रति सजग रहने और संवैधानिक ढांचे के भीतर विकास के रास्ते पर चलने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने खूंटी के पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं का सत्य सामने आना चाहिए।
विधायक रामसूर्या मुंडा ने परंपरा और विकास पर दिया जोर
खूंटी विधायक रामसूर्या मुंडा ने अपने संबोधन में कहा कि बिरसा मुंडा की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि समाज को अपनी परंपरा, संस्कृति और रीति-रिवाजों की रक्षा करते हुए राज्य और राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान देना चाहिए।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों से भावुक हुआ माहौल
श्रद्धांजलि समारोह के दौरान आयोजित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को भावनात्मक बना दिया। आदिवासी नृत्य, गीत और पारंपरिक कार्यक्रमों के माध्यम से शहीदों के बलिदान को याद किया गया। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने शहादत दिवस के इस आयोजन में भाग लिया।
स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी और पारंपरिक खेल
इस अवसर पर मेले का भी आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी, हस्तशिल्प और पारंपरिक खेलों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। इससे न केवल सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा मिला, बल्कि स्थानीय कारीगरों और उत्पादों को भी मंच मिला।
न्यूज़ देखो: शहादत से प्रेरणा, पहचान से भविष्य
डोम्बारी बुरू का यह आयोजन बताता है कि आदिवासी इतिहास केवल अतीत नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की दिशा तय करने वाली प्रेरणा है। जनप्रतिनिधियों की सहभागिता से यह संदेश स्पष्ट हुआ कि शहादत की विरासत को सम्मान देना और उसे विकास से जोड़ना जरूरी है। ऐसे आयोजन सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
शहादत को स्मरण, जिम्मेदारी को पहचान
बिरसा उलगुलान के शहीदों की कुर्बानी हमें अधिकार, स्वाभिमान और एकजुटता का पाठ पढ़ाती है। अपनी संस्कृति और इतिहास को जानें, उस पर गर्व करें और सकारात्मक बदलाव का हिस्सा बनें। इस खबर पर अपनी राय साझा करें, इसे आगे बढ़ाएं और शहादत की प्रेरणा को जन-जन तक पहुंचाएं।





