
#सिमडेगा #मकरसंक्रांतिदान : वनवासी परिवारों के सहयोग हेतु शहर के प्रमुख स्थलों पर चलेगा सेवा अभियान।
मकर संक्रांति के पावन अवसर पर वनवासी कल्याण केंद्र, झारखण्ड की ओर से सिमडेगा शहर में दान सेवा अभियान आयोजित किया जा रहा है। इस अभियान के तहत हनुमान वाटिका, महावीर मंदिर चौक और गुलजार गली में विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे। प्राप्त दान सामग्री का उपयोग जिले के दूरदराज इलाकों में रहने वाले जरूरतमंद वनवासी परिवारों की सहायता के लिए किया जाएगा। आयोजन का उद्देश्य पर्व को सामाजिक सेवा और मानवीय संवेदना से जोड़ना है।
- वनवासी कल्याण केंद्र, झारखण्ड के तत्वावधान में दान सेवा अभियान।
- मकर संक्रांति के अवसर पर सिमडेगा शहर में आयोजन।
- हनुमान वाटिका, महावीर मंदिर चौक और गुलजार गली में स्टॉल।
- प्रातः 9 बजे से अपराह्न 3 बजे तक खुले रहेंगे सेवा केंद्र।
- दान सामग्री से दूरदराज के वनवासी परिवारों को मिलेगी सहायता।
हिन्दू सनातन परंपरा में मकर संक्रांति का विशेष धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व है। यह पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है और इसे पुण्य, दान, सेवा और नई शुरुआत का पर्व माना जाता है। इस दिन पवित्र स्नान, दान और जरूरतमंदों की सहायता करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसी भाव को जीवंत रूप देने के लिए वनवासी कल्याण केंद्र, झारखण्ड की ओर से सिमडेगा शहर में विशेष दान सेवा अभियान आयोजित किया जा रहा है।
शहर के प्रमुख स्थलों पर लगाए जाएंगे सेवा स्टॉल
इस दान सेवा अभियान के अंतर्गत सिमडेगा शहर के तीन प्रमुख स्थलों पर विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे। इनमें हनुमान वाटिका (गांधी मैदान), महावीर मंदिर चौक और गुलजार गली शामिल हैं। ये स्टॉल प्रातः 9:00 बजे से अपराह्न 3:00 बजे तक आम नागरिकों के लिए खुले रहेंगे, ताकि अधिक से अधिक लोग इसमें भाग लेकर दान कर सकें।
जरूरतमंद वनवासी परिवारों तक पहुंचेगी सहायता
आयोजकों के अनुसार, अभियान के माध्यम से समाज से प्राप्त दान सामग्री का उपयोग सिमडेगा जिले के दूरदराज ग्रामीण और वनवासी क्षेत्रों में रहने वाले अत्यंत जरूरतमंद परिवारों की सहायता के लिए किया जाएगा। जिले के कई वनवासी इलाकों में आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी है, जहां भोजन, वस्त्र और दैनिक उपयोग की सामग्री का अभाव देखा जाता है। ऐसे में यह दान अभियान उनके जीवन में राहत और सहारा बनने का प्रयास है।
पर्व को सेवा से जोड़ने की पहल
वनवासी कल्याण केंद्र के कार्यकर्ताओं ने बताया कि मकर संक्रांति केवल उत्सव और परंपरा का पर्व नहीं है, बल्कि यह सेवा, समर्पण और सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश भी देता है। उनका कहना है कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के जीवन में खुशहाली लाना ही इस पर्व का सच्चा अर्थ है। इसी सोच के साथ यह दान सेवा अभियान शुरू किया गया है।
समाज की छोटी मदद, बड़ा बदलाव
आयोजकों ने यह भी बताया कि अक्सर लोगों को लगता है कि उनका छोटा सा दान बहुत प्रभाव नहीं डाल पाएगा, लेकिन जब समाज एकजुट होकर आगे आता है तो यही छोटे-छोटे प्रयास बड़े बदलाव का कारण बनते हैं। वनवासी क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के लिए यह सहयोग केवल सामग्री नहीं, बल्कि सम्मान और अपनापन का संदेश भी है।
कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका
इस अभियान को सफल बनाने के लिए वनवासी कल्याण केंद्र के कार्यकर्ता पूरी सक्रियता से जुटे हुए हैं। स्टॉल पर मौजूद कार्यकर्ता दान देने आए लोगों को अभियान के उद्देश्य और वनवासी क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति से भी अवगत कराएंगे। इससे लोगों में संवेदनशीलता बढ़ेगी और समाज सेवा के प्रति जागरूकता भी मजबूत होगी।
शहरवासियों से सहभागिता की अपील
संस्था की ओर से सिमडेगा शहरवासियों से विशेष अपील की गई है कि वे मकर संक्रांति के इस पावन अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में दान सेवा स्टॉल तक पहुंचें। मुक्तहस्त दान कर न केवल पुण्य के भागी बनें, बल्कि जरूरतमंद वनवासी भाइयों-बहनों के जीवन में आशा और विश्वास की किरण जगाने में भी सहभागी बनें।
सामाजिक एकता का प्रतीक बनेगा अभियान
वनवासी कल्याण केंद्र का मानना है कि यह दान सेवा अभियान केवल सहायता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सामाजिक एकता और सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक भी बनेगा। जब शहर और गांव, सक्षम और जरूरतमंद, सभी एक सूत्र में बंधते हैं, तभी समाज सशक्त बनता है।

न्यूज़ देखो: पर्व से जुड़ी सेवा की सशक्त पहल
मकर संक्रांति जैसे पर्व को सामाजिक सेवा से जोड़ना यह दर्शाता है कि परंपराएं आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन सकती हैं। वनवासी कल्याण केंद्र की यह पहल जरूरतमंदों तक सीधी मदद पहुंचाने का माध्यम बन रही है। अब देखना होगा कि समाज किस हद तक इस अभियान में सहभागिता करता है और इसे जनआंदोलन का रूप देता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
दान से बनेगा बदलाव, सेवा से बढ़ेगा अपनापन
मकर संक्रांति पर किया गया छोटा सा दान किसी वनवासी परिवार के लिए बड़ी राहत बन सकता है। पर्व की खुशियां तभी पूर्ण होती हैं, जब वे सब तक पहुंचें।
आप भी इस सेवा अभियान का हिस्सा बनें, अपनी सहभागिता दर्ज कराएं। खबर को साझा करें, दूसरों को प्रेरित करें और समाज में सेवा की संस्कृति को मजबूत करें।





